मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 27 April 2011

१०० नम्बर से पूरी कुंडली

               नोयडा पुलिस ने १०० नंबर पर मदद मांगने या शिकायत करने वालों तक जल्दी ही पहुँचने के लिए नयी तकनीकि का पूरा प्रयोग करने पर प्रायोगिक स्तर पर अमल करने का फैसला किया है और यदि यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले दिनों में एनसीआर में १०० नम्बर का मायने पूरी तरह से बदल जायेंगें. आमतौर पर लोग पुलिस की मदद के लिए १०० नम्बर पर काल करते हैं और कई बार पूरी जानकारी इकट्ठी होने और पुलिस के पहुँचने में बहुत देर हो जाती है क्योंकि यह तालमेल नहीं बन पाता है कि कौन सी पीसीआर घटनास्थल के पास है या फिर कौन सबसे जल्दी मदद पहुंचा सकता है. इससे सबसे बड़ी बात यह होगी कि पुलिस पर काम करने की जवाबदेही भी बढ़ जाएगी क्योंकि अभी तक सही सूचना न होने का रोना रोकर पुलिस खुद घटना स्थल तक जाने में पूरी दिलचस्पी नहीं लेती है.
               अब १०० नम्बर पर की जाने वाली हर कॉल पूरी तरह से सर्विलांस पर होगी जिससे कॉल करने वाले की सही स्थिति का पता कॉल के समय ही चल जायेगा आज के समय में जिस तरह से मोबाइल फ़ोन का चलन बढ़ा है तो अधिकांश कॉल भी इन्हीं से आती हैं. इस सम्बन्ध में सभी मोबाइल कम्पनियों से सहयोग लेकर इस पूरे तंत्र को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया जायेगा और कॉल करने वाले व्यक्ति के बारे में पल पल की जानकारी भी मिलती रहेगी. इससे दो बड़े फायदे यह होंगें कि कॉल आते ही पता चल जायेगा कि किस जगह से कॉल की जा रही है जिससे उस क्षेत्र में उपलब्ध पीसीआर को तुरंत घटना स्थल पर पहुँचने के लिए कहा जा सकेगा. आम तौर पर जिस तरह से पीसीआर की तैनाती है उससे यही लगता है कि सूचना देने के ५ मिनट के अन्दर ही पुलिस घटना स्थल पर पहुँच जाएगी. साथ ही फ़र्ज़ी कॉल करके पुलिस को परेशान करने वालों को भी आसानी से दबोचा जा सकेगा क्योंकि अभी तक बहुत सारे लोग फ़र्ज़ी कॉल करके पुलिस को परेशान भी किया करते हैं. 
          यह सही है कि तकनीकि का प्रयोग आज के समय में बहुत आवश्यक है पर क्या हमारी पुलिस में आम तौर पर इतनी संवेदन शीलता बची है कि वह सभी के साथ मानवता से पेश आ सके ? शायद आज के समय में हमारी पुलिस व्यवस्था में इस बात का समावेश करने की बहुत आवश्यकता है ? नए नियम और कानून के साथ सुविधाओं से केवल काम में तेज़ी लायी जा सकती है पर कहीं से भी पुलिस को संवेदन शील नहीं बनाया जा सकता है. आज के समय में पूरे देश में पुलिस जिस तरह से काम करती है उसे देखते हुए कुछ भी संभव है और नेताओं के साथ इसके गठजोड़ ने आम लोगों का जीवन और कठिन कर दिया है. अच्छा हो कि अब पूरे पुलिस तंत्र में आमूल चूल परिवर्तन किया जाए जिससे इस तरह के छोटे परन्तु महत्वपूर्ण परिवर्तनों का लाभ जनता तक वास्तव में पहुँच सके.        
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