मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 20 August 2018

सिद्धू और राजनीति

                                                         क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू का इमरान खान के शपथ ग्रहण में जाना अपने आप में एक छोटी सी घटना है पर सिद्धू के पाक सेना के जेनरल से गले मिलने को लेकर भारतीय राजनीति और विशेषकर सत्ताधारी भाजपा द्वारा इतना हल्ला मचाया जा रहा है जैसे सिद्धू ने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो. संभवतः भाजपा और मोदी सरकार ने भी यह मुग़ालता पाल रखा होगा कि जिस तरह से मोदी ने अपने शपथ ग्रहण में पड़ोसियों को बुलाया था तो इस बार इमरान खान भी कुछ इस तरह का कदम उठायें पर उनकी तरफ से जिस ठन्डे तरह से भारत के साथ संबंधों पर शुरुवात की गयी है वह अपने आप में भाजपा के लिए सदमे से कम नहीं है क्योंकि यदि पीएम मोदी को पाक द्वारा बुलाया जाता तो भाजपा इसका भरपूर दोहन करती। इमरान ने सिद्धू के अलावा अन्य लोगों को भी बुलाया था पर संभवतः उनकी तरफ से जाने की कोई इच्छा नहीं प्रदर्शित की गयी जिससे सभी का ध्यान केवल सिद्धू की यात्रा पर ही चला गया.
                           यदि भाजपा और मोदी सरकार को सिद्धू या किसी अन्य भारतीय के इमरान के शपथ ग्रहण में शामिल होने पर कोई आपत्ति थी तो उनको जानी की अनुमति ही नहीं देनी चाहिए थी पर इस मौके को भी भाजपा की तरफ से एक अवसर के रूप में देखना उनकी राजनीति को ही दर्शाता है सिद्धू के जाने को लेकर ही भाजपा कांग्रेस पर हमलावर हो गयी थी और उनके पाक जनरल बाजवा से मिलने को लेकर जिस तरह का हो हल्ला मचाया जा रहा है वह भाजपा की दोहरी नीतियों को उजागर करने वाला है. सिद्धू भारत के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में पाक नहीं गए थे और जब उनका दौरा इस तरह का था तो क्या वे पाकिस्तान द्वारा निर्धारित किये गए किसी प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने की स्थिति में थे ? पाक अधिकृत कश्मीर के राष्ट्रपति के साथ उनके बैठने को लेकर भारत सरकार और भाजपा को गंभीर आपत्ति है जबकि सभी जानते हैं कि किसी भी समारोह में मेज़बान देश के प्रोटोकॉल का अनुपालन करना मेहमानों के लिए सामान्य शिष्टाचार होता है.
                         सिद्धू को भाजपा वैसे भी बख्शने के मूड में नहीं है क्योंकि जब पूरा देश मोदी मोदी चिल्ला रहा था तो उस स्थिति में भी सिद्धू ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाने का निर्णय लिया था जो आज भी भाजपा को कचोटता रहता है इसलिए भी सिद्धू हमेशा भाजपा और अकालियों के हमले पर रहते हैं. वैसे भी सिद्धू इतने कमज़ोर नहीं है कि अपने ऊपर किये जाने वाले हमलों का बचाव न कर सकें साथ ही इस बात पर कांग्रेस को भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जब देश के पीएम बिना बुलाये दुश्मन देश के पीएम की बेटी की शादी में शामिल हो सकते हैं तो आधिकारिक रूप से निमंत्रित किये गए सिध्दू वहां पर क्या गले भी नहीं मिल सकते हैं? देश की सीमाओं पर जवान शहीद हो रहे हैं यह बिलकुल सच है पर क्या निर्णय लेने की क्षमताओं को अपने में समाहित किये पीएम मोदी पाक से मोस्ट फेवरेट नेशन का दर्ज़ा वापस लेने का कदम उठा सकते हैं ? क्या वे या भाजपा हाफिज सईद से वैदिक की मुलाक़ात को राष्ट्रहित मानते हैं ? देश की सीमाओं से बाहर पाक के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से हमारे सुरक्षा सलाहकार चोरी से मिलकर किस तरह से जवानों की शहादत को सम्मानित करते हैं?  देश में दबाव में आये चीनी उद्योग और गन्ना किसानों की समस्याओं को अनदेखा करते हुए पाक की चीनी आयात कर भारत में चीनी के दाम लागत से कम कर मोदी सरकार आखिर किसका भला कर रही है ?  भाजपा को यह ध्यान रखना चाहिए कि सिद्धू भारत सरकार या पंजाब सरकार के आधिकारिक प्रतिनिधि के तौर पर पाक में नहीं थे यह उनकी निजी यात्रा थी और किसी भी व्यक्ति की निजी यात्रा के दौरान इस तरह की राजनीति करने से सभी को बचने की आवश्यकता भी है.

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