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Tuesday, 10 February 2009

लोक का चीर हरण

यह है हमारी विधान सभा जिसे घटिया नेताओं ने चौराहा बना दिया है, फोटो साभार टाईम्स नाऊ
आज फिर से उत्तर प्रदेश विधान सभा में जो कुछ भी हुआ उसके लिए किस को उत्तरदायी मन जाए यह बहस का विषय हो सकता है पर जिस तरह से कुछ लोग लोकतंत्र का उपहास उड़ने में लगे हुए हैं उससे तो कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। आज ऐसी स्थिति क्यों आई है क्या किसी ने इस बात पर विचार किया ? शायद किसी के पास समय ही नहीं है कि लोकतंत्र के इन गुंडों की ख़बर ले सकें। क्या किसी को याद है कि किस तरह से पहली बार इसी गौरव शाली विधान -सभा में सपा- बसपा के झगड़े में किस तरह से जनता के विश्वास की धज्जियाँ उडाई गई थीं पर क्या लोकतंत्र के किसी के रखवाले ने उस समय दागी लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं की थी। बस यह उसी का परिणाम है जिस से आज भी लोग जब चाहे लोकतंत्र का मज़ाक उड़ने में नहीं पीछे रहते हैं। क्यों नही कोई इस तरह की व्यवस्था बनाई जाए जिसमें इस तरह की हरकत करने वालों को कम से कम २० वर्षों तक चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए। आज जब सारी कार्यवाई रिकॉर्ड की जाती है तो क्यों नही उसे एक सबूत माना जाए और इन दागी लोगों के चुनाव लड़ने पर ही पाबन्दी ही लगा दी जाए। किसी भी परिस्थिति में इन दुर्योधनों को लोकतंत्र का चीर हरण करने के लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता है। अब किसी को तो मन मोहन बन कर लोकतंत्र की द्रौपदी की लाज बचानी ही होगी। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम सभी इन घटिया नेताओं को फिर से दबाव में ले लें और मुंबई कि घटना की तरह इन पर कुछ तो लगाम कस ही सकें। कल देश के प्रमुख समाचार पत्रों में मूर्धन्य संपादक लोग अपनी चिंता ज़ाहिर कर देंगें और आज शाम को टी वी पर कुछ जाने पहचाने चेहरे लोकतंत्र के इस स्वरुप पर चिंता प्रकट कर देंगें और हम भी कुछ बातें करके यह सोचकर चुप हो जायेंगें कि हम कर ही क्या सकते हैं ? आज तो बोलो देश के मिटटी के माधव वरना कहीं ऐसा न हो कि ये नेता देश में ऐसा माहौल बना दें कि यह देश रहने लायक ही न रह जाए।

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