मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Thursday, 27 April 2017

यूपी- बिजली सुधार चुनौतियाँ और संभावनाएं

                                        उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग और आपूर्ति में बढ़ते फासले के बीच जिस तरह के कदम लगातार उठाये जाने चाहिए थे उनमें पिछले २५ वर्षों में निरंतर उपेक्षा किये जाने के कारण पिछले दशक में संभवतः प्रदेश की अधिकांश जनता को केवल ८ घंटे बिजली से काम चलना पड़ा था. यह प्रदेश की सरकारों और जनता के लिए बहुत ही चुनौती भरा काम था और स्थिति इतनी बिगड़ गयी थी कि राज्यपाल शास्त्री को यहाँ तक कहना पड़ा था कि यह सब पूर्व की सरकारों के पापों का फल है. आखिर दुनिया के कई देशों से अधिक आबादी वाला प्रदेश और उसकी चुनी हुई सरकारें बिजली की आपूर्ति के मामले में क्यों बुरी तरह से विफल हुई आज इस पर विचार किये जाने की आवश्यकता है क्योंकि आज़ादी के बाद से देश में एक परंपरा सी चली आ रही थी कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए सरकारों के पास सदैव ही प्राथमिकता के आधार पर धन उपलध रहा करता था जिससे नए बिजली संयंत्र लगाने का काम लगातार चलता ही रहता था. नब्बे के शुरुवाती दशक से जिस तरह से प्रदेश में सामजिक विभाजन शुरू हुआ उसके बाद जनता भी धर्म और जाति आधारित चुनावों की तरफ मुड़ गई जिससे मूलभूत ढांचे को निरंतर विकसित करने की प्रक्रिया को लगातार बाधित किया गया और बहुत सारे अन्य क्षेत्रों में भी प्रदेश अपने उन पायदानों से भी नीचे चला गया जहाँ कभी वह आसानी से हुआ करता था.
                  संप्रग की पिछली केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में विद्युतीकरण की प्रतिशतता को बढ़ाये जाने के लिए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम को लागू किया गया पर इसमें जिस तरह से राज्य सरकारों की सहमति और भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी उसके चलते तत्कालीन मायावती सरकार ने इस दिशा में नगण्य काम किया जिससे आधारभूत पारेषण और वितरण का जो नवीन ढांचा खड़ा किया जाना था वह पूरी तरह से बहुत पीछे छूट गया. अखिलेश सरकार आने के बाद उनकी तरफ से निश्चित तौर पर तहसील मुख्यालयों पर १३२ केवीए की क्षमता बनाये जाने को लेकर काम शुरू किया गया जिसके बाद प्रदेश के कुछ हिस्सों में यह काम पूरा होने के बाद वोल्टेज और बिजली की उपलब्धता आदि में गुणात्मक सुधार भी हुआ. जब तक यह काम पूरी तरह से नहीं हो जाता है तब तक प्रदेश में स्थिति पूरी तरह से सुधरने वाली भी नहीं है क्योंकि आज प्रदेश में बिजली की उत्पादन तो क्षमता के अनुरूप या उससे अधिक हो रहा है पर ऊर्जा संयंत्रों से उचित क्षमता की पारेषण लाइन उपलब्ध न होने के कारण उनका पीक ऑवर्स में भी पूरा उपयोग नहीं किया जा सकता है. निश्चित तौर पर अखिलेश सरकार ने बिजली की उपलब्धता के लिए ठोस उपायों की शुरुवात की थी जिसके चलते आज आदित्यनाथ सरकार को उसे गति देने की आवश्यकता भर है. केंद्र की सबको बिजली देने की योजना में यूपी को संतृप्त किए बिना लक्ष्य को नहीं पाया जा सकता है और यह अच्छा ही है कि अब सरकार ने एक पूर्णकालिक विद्युत मंत्री की नियुक्ति कर दी है जिससे उनके लिए पूरे प्रदेश में काम करना आसान होने वाला है.
           यूपी में बिजली की चोरी सदैव ही सबसे बड़ा मुद्दा रहा है और पिछली सरकार में जिस तरह से हर ट्रांसफार्मर तक मीटरिंग की व्यवस्था को शुरू किया गया था अब उसे हर ट्रांसफार्मर तक पहुंचाए जाने की आवश्यकता है क्योंकि जब तक निचले स्तर पर बिजली चोरी रोकने के लिए अधिकरियों और कर्मचारियों को उत्तरदायी नहीं बनाया जायेगा तब तक स्थिति को सुधारा नहीं जा सकता है. आज भी पूरे प्रदेश में अवैध रूप से बिजली को जलाया जा रहा है जिससे विभाग को राजस्व की हानि होती है और ईमानदार उपभोक्ताओं के लिए बिजली निरंतर मंहगी होती जा रही है. इसके साथ एक मुश्त समाधान जैसी योजनाओं से पूरी तरह बचा जाना चाहिए क्योंकि इससे ईमानदार और समय से बिल चुकाने वाले उपभोक्ताओं के लिए नुकसान ही होता है तथा जो लोग विभाग पर बोझ बने रहते हैं उनके लिए सदैव ही छूट वाली योजनाएं सामने आती रहती हैं इससे जहाँ लोगों में समय से बिल जमा न करने की प्रवृत्ति बढ़ती है वहीं पूरी व्यवस्था पर कैंप आदि लगाने और अतिरिक्त काम करने का बोझ भी बढ़ता है. पावर कारपोरेशन ने जिस तरह से ऑनलाइन बिल के भुगतान की सेवा शुरू की है अब उसमें पंजीकृत उपभोक्ताओं को खुद ही रीडिंग भरने की छूट भी दी जानी चाहिए जिससे वे अपने बिल के लिए विभाग के कर्मचारियों की बाट न जोहते रहें ? आज भी अधिकांश स्थानों में बिजली का बिल समय से नहीं दिया जाता है जिससे उपभोक्ता चाहते हुए भी बिल का भुगतान नहीं कर पाते हैं आशा है कि सरकार इस दिशा में काम करने के बारे में सोचते हुए एक सरल एप्लीकेशन बनाएगी जिससे आम उपभोक्ता भी मोबाइल के माध्यम से अपने उपयोग की रीडिंग भर कर बिल का भुगतान करने में सक्षम हो सकेगा.
             बिजली की चोरी रोकने के लिए पूरे प्रदेश में सभी स्थानों पर एक निश्चित समय सीमा देकर लोगों को अपनी दुकानों के लिए कनेक्शन लेने के लिए कहा जाना चाहिए और उसमें असफल होने के बाद उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही के बारे में सोचा जाना चाहिए. छोटे व्यापारियों के लिए वाणिज्यिक वर्ग में आधा किलोवॉट की नयी श्रेणी भी शुरू की जानी चाहिए क्योंकि बहुत सारी ऐसी दुकानें भी होती हैं जिनमें कोई लोड नहीं होता और एक किलोवॉट का कनेक्शन लेना व्यापारियों के लिए कठिन होता है जिससे वे अपने आसपास के दुकानदारों के साथ सांठगांठ करके बिजली जलाने का काम भी करने को मजबूर हो जाते हैं. विद्युत दरों में भी नए सिरे से बदलाव करने की आवश्यकता है और मीटरिंग को वैकल्पिक परिवर्तनीय लोड के साथ किये जाने के बारे में सोचना चाहिए जिससे हर उपभोक्ता अनावश्यक रूप से लोड के बोझ से न मारा जाये. प्रति माह रीडिंग लेते समय उस माह के अधिकतम लोड के अनुसार उपभोक्ता से फिक्स चार्ज लिया जाना चाहिए जिससे स्वयं उपभोक्ता भी बिजली बचाने के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू कर सके. उदाहरण के तौर पर इस सेवा के लागू होने पर किसी उपभोक्ता का बिल मौसम के अनुसार परिवर्तित होता रह सकता है क्योंकि अलग अलग मौसम में बिजली की आवश्यकताएं भी बदल जाती हैं साथ ही मिनिमम बिल जैसे उपभोक्ता विरोधी उपायों से पूरी तरह से बचने की आवश्यकता भी है क्योंकि फिक्स चार्ज मिनिमम बिल आदि के नाम पर अभी तक सभी निगम अपनी नाकामियों को उपभोक्ताओं से वसूलने के में लिप्त दिखाई देते हैं.            
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 11 April 2017

आदित्यनाथ योगी और भाजपा की चुनौती

प्रदेश में हुए विधान सभा चुनावों के बाद जिस प्रचंड जनादेश के साथ पूर्वांचल में पूरी तरह से स्थापित हिन्दू युवा वाहिनी के संरक्षक, गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर और भाजपा नेता आदित्यनाथ योगी ने भाजपा के एक हफ्ते के गहन मंथन के बाद सत्ता संभाली उसके बाद भाजपा और सीएम योगी को विपक्ष से मिलने वाली चुनौतियाँ स्वतः ही कम हो गयी हैं क्योंकि सरकार के सत्ता सँभालते ही उस की आलोचना करना सही नहीं कहा जा सकता है इसलिए अभी सरकार की प्राथमिकताओं और उसके प्रारंभिक क़दमों के बारे में विश्लेषण का काम सत्ता और विपक्ष दोनों तरफ ही चल रहा है. सदन के अंदर विधान सभा में तो कमज़ोर संख्या बल के कारण विपक्ष सीएम आदित्यनाथ को किसी भी तरह की चुनौती देने की स्थिति में नहीं है पर विधान परिषद् में उसकी तरफ से मुद्दों के आधार पर सरकार को रोकने की कोशिश की जा सकती है. प्रदेश की व्यापक सीमाओं और आसन्न चुनौतियों को देखते हुए सरकार के लिए चुनावों और उससे पहले अखिलेश सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर किये गए हमलों के चलते आज एक बार फिर से सीएम आदित्यनाथ के लिए यही मुद्दा सबसे बड़ा साबित होने वाला है और जिस तरह से उन्होंने गृह मंत्रालय अपने पास ही रखा हुआ है उससे कानून व्यवस्था के सभी मामलों पर विपक्ष को सीधे उन पर हमले करने के अवसर मिलते ही रहने वाले हैं.
पिछली सरकारों में प्रदेश में जिस तरह से नेताओं, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते अधिकांश जगहों पर कानून व्यवस्था की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देता था कमोबेश खुद सीएम आदित्यनाथ की स्पष्ट चेतावनी के बाद अब भी वही स्थिति बनी हुई है और पहले जो कार्य सपा के कार्यकर्ता किया करते थे आज वह हिन्दू युवा वाहिनी और भाजपा के कार्यकर्ता करने में लगे हुए हैं. सत्ता प्रतिष्ठान के दलाल हर सत्ता में अपना हिस्सा बांटने पहुँच ही जाते हैं क्योंकि किसी भी दल में वैचारिक समानता के कारण जो लोग जुड़े होते हैं वे कभी भी आसानी से अपनी सरकार के लिए इस तरह की चुनौतियाँ उत्पन्न नहीं करते हैं पर जो लोग सत्ता के साथ चिपकने वाले और सत्ता का लाभ उठाने की कोशिश हर सरकार में करने के माहिर होते हैं वे किसी भी परिस्थिति में सत्ताधारी दल की कमज़ोर और लालची कड़ियों को खोज ही लेते हैं और अपना काम निकालने में जुट जाते हैं. इन लोगों से निपटने के लिए खुद सीएम आदित्यनाथ को अपने स्तर पर सक्रिय होना होगा वर्ना सत्ता के ये दलाल उनकी सरकार के लिए भी चुनौतियाँ खडी करने से बाज़ नहीं आएंगे. लम्बे समय बाद प्रदेश की सत्ता में आयी भाजपा के कार्यकर्ता भी जिस तरह से अपने पुराने हिसाबों को चुकता करने और हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता नई नई जगहों पर समस्याएं खड़ी करने का काम कर रहे हैं वह सरकार और प्रदेश के लिए शुभ नहीं कहा जा सकता है.
खुद सीएम आदित्यनाथ न्याय की बात कर रहे हैं और गोरखपुर में उनके लम्बे धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक जीवन में न्याय की बात काफी हद तक परिलक्षित भी होती है पर प्रदेश भर में फैले हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता जिस तरह से अतिउत्साह में दिख रहे हैं और आज समाज के अराजक तत्व भी गले में केसरिया अंगौछा डालकर सत्ता का प्रभाव दिखाने में लग चुके हैं भाजपा को अविलम्ब इस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि अब चुनौती विपक्ष से निपटने के स्थान पर अपने में छिपे उन तत्वों की पहचान करने और सुधार करने की है जो आने वाले समय में सरकार के लिए समस्या बन सकते हैं. सत्ता की तरफ लाभ कमाने के लिए भागने वाले इस मानसिकता के लोगों को अपने अंदर चिन्हित करने के साथ ऐसे तत्वों के संगठन में प्रवेश पर भी कड़ाई से ध्यान देना होगा जिससे आने वाले समय में सरकार के साथ खड़े लोग उसके लिए विभिन्न स्तरों पर अनावश्यक चुनौतियाँ न खडी कर सकें. वैसे तो मंत्रिमंडल चुनना सीएम का विशेषाधिकार होता है पर यूपी की विशालता और चुनौतियों को समझते हुए सीएम आदित्यनाथ यदि दो गृह राज्य मंत्रियों की नियुक्ति करने के बारे में सोचें जिन्हें पूर्वी और पश्चिमी यूपी के कुछ जनपदों की ज़िम्मेदारियों को दिया जाये और मध्य यूपी के बड़े हिस्से को खुद वे अपने नियंत्रण में रखें तो आने वाले समय में कानून व्यवस्था में गुणात्मक सुधार आ सकता है.
सरकार सँभालने के बाद अभी तक सीएम आदित्यनाथ ने किसी भी विभाग में बड़े स्तर पर स्थानांतरण नहीं किये हैं जिससे यह लगता है कि वे अधिकारियों को यह स्पष्ट सन्देश देना चाहते हैं कि जो कानून के अनुसार चलेगा उसके लिए कोई समस्या नहीं आने वाली है पर सरकार की मंशा के अनुरूप खरे न उतरने वाले अधिकारियों के लिए अब सब कुछ उतना आसान नहीं रहने वाला है. यह भी अच्छा ही है कि सीएम आदित्यनाथ खुद आगे आकर सरकार चलाने के लिए कृत संकल्पित दिखाई दे रहे हैं पर आने वाले समय में सीएम के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता जितनी बढ़ती जाएगी व्यस्तता के चलते सरकार चलाने पर उनके लिए इतना ध्यान दे पाना संभव नहीं रह जायेगा इसलिए अभी से उन्हें अपने मंत्रियों और अधिकारियों के सामने पहले साल का लक्ष्य निर्धारित करना होगा जिससे वे २०१९ में होने वाले आमचुनावों तक भाजपा के २०१४ और २०१७ के प्रदर्शन को दोहराकर केंद्र में मोदी सरकार की वापसी का मार्ग भी खोल सकें. यूपी में आज भाजपा के नेताओं में पारस्परिक हितों का टकराव न के बराबर है और इस स्थिति का लाभ कहाँ तक सीएम आदित्यनाथ उठा पाते हैं यह उनके राजनैतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होने वाला है. सरकार बन चुकी है और चूंकि सीएम आदित्यनाथ अधिक लोगों के लिए जवाबदेह नहीं हैं इसलिए उनके लिए कड़े निर्णय करना आसान भी रहने वाला है वे अपने और भाजपा के लिए समाज में स्वीकार्यता को कितना बढ़ा पाते हैं यह तो आने वाले एक दो सालों में स्पष्ट हो पायेगा.
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...