मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 22 August 2010

सांसदों की मज़बूती या मजबूरी

शुक्रवार को संसद में जो कुछ भी सांसदों ने वेतन वृद्धि के नाम पर किया उसका कोई औचित्य नहीं था. वैसे भी यह देश अपने माननीयों पर जितना खर्च कर देता है उतना कोई सोच भी नहीं सकता है ? वेतन वृद्धि के बाद अब प्रत्येक सांसद पर सरकार का ३७ लाख रूपये प्रति वर्ष खर्च होने वाला है अगर एक गरीब देश के नेताओं को यह भी कम लग रहा है तो कैसे कितना खर्च करने के बाद वे संतुष्ट होने वाले है ? देश के लिए आवश्यक पैसों की बात करते समय यह सांसद हमेशा से ही विरोध करते रहते हैं पर जब अपने लिए कुछ करने की बात आती है तो सारे और अधिक पाने के लिए हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं ?
              आज के समय जब हमारे पास संसाधनों की कमी का रोना जाता है तो इस तरह से बहुत अधिक वेतन वृद्धि के बाद भी आख़िर क्यों हमारे सांसद प्यासे क्यों रह जाते हैं ? आज जब पूरा देश मंहगाई का रोना रो रहा है तो भी ये माननीय १ रु में चाय पी रहे हैं ? खाने की थाली १२ रु में अब और अधिक मत जानिए वरना आम जनता को तो दिल का दौरा पड़ सकता है ?  बात यहाँ पर इस बात की नहीं है कि इनके वेतन में वृद्धि की जाए या नहीं बल्कि इस बात की है कि आख़िर यह सब किस तरह से होना चाहिए ? आज तक किसी भी सांसद ने इस बात पर किसी का ध्यान दिलाया कि उनके जो साथी पहले सत्र में आम आदमी थे अचानक उनके हाथ कौन सा अलादीन का चिराग लग गया जिससे वे अचानक ही मंहगी गाड़ियाँ खरीदने लायक हो जाते हैं ? हम सब ने जिस तरह से इनको माननीय होने का दर्ज़ा दिया है तो हम यह भी कभी नहीं चाहेंगें कि किसी भी परिस्थिति में इनको कोई अभाव महसूस हो ? पर जनता के अभाव को ये लोग कब महसूस करेंगें ?
          देश हमारा है जहाँ पर हमें इसकी पूरी हिफाज़त भी करनी है और इसे प्रगति के मार्ग पर भी बढ़ाना है, सांसदों के हर व्यवहार पर उनको प्रशंसा और आलोचना भी मिलनी चाहिए पर उनको भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि कैसे देश तरक्की करे ? वेतन चाहे जितना बढ़ा लो पर जो आप लोग खाते हो उसका भुगतान भी क्यों नहीं तीन गुना करना चाहते हो ? आप देश के सेवक हो अच्छा होगा कि सेवक ही बने रहिये देश को काम करने वाले सभी लोग अच्छे लगते हैं न फिर क्या आप काम नहीं करना चाहते हैं ?              

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

2 comments:

  1. पैसे बढ़ाने के बाद भी संसद में मिलने वाली कैंटीन की सब्सीडि कम नहीं करेगे ये लोग।

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  2. निर्लज्जता और बदनियति

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