मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 18 December 2012

आरटीआई का दुरूपयोग

                                 महाराष्ट्र के ठाणे में जिस तरह से एक तथाकथित आरटीआई एक्टिविस्ट को पिछले हफ्ते पुलिस ने लोगों को ब्लैकमेल करके धन वसूलते रंगे हाथों पकड़ा था उसके बाद से एक बार फिर से यही बात उभर कर सामने आ रही है कि यदि कोई किसी एक स्थान पर ऐसा कर सकता है तो देश के दूसरे हिस्सों में भी ऐसा ही नहीं किया जा रहा होगा इस बात को कैसे पता लगाया जाये ? जिस तरह से सूचना अधिकार लागू होने के बाद से ही इसके माध्यम से समर्पित कार्यकर्ताओं ने बहुत बड़ी अनियमितताओं को पकड़ने में सफलता पाई वहीं सरकारी कार्यालयों में निरंकुश होकर काम करने वालों पर भी कुछ दबाव बना दिया था पर कुछ लोगों द्वारा इस तरह की हरक़तों से पैसा बनाने की जुगत से पूरे देश में भ्रष्टाचारियों को ऐसा काम करने का एक नया रास्ता भी मिल सकता है. इससे निपटने के लिए क्या किया जाना चाहिए इस पर गहन विचार किये जाने की आवश्यकता है क्योंकि इस तरह के कानून को जनता के सहयोग के लिए बनाया गया था पर अब इसका उपयोग भी अवैध वसूली में किया जाने लगा है तो इसके बारे में कुछ न कुछ तो सोचना ही पड़ेगा.
                     देश को नयी नीतियों से अधिक पुरानी नीतियों के सफल क्रियान्वयन करने की आवश्यकता है और अभी तक जिस तरह से रोज़ ही भ्रष्टाचारी लोग अपने काम को निकालने के लिए नए नए हथकंडे अपनाते रहते हैं उस स्थिति तो शीघ्रता से कुछ करने की आवश्यकता भी दिखाई देती है. देश में कानून व्यवस्था सँभालने का ज़िम्मा पुलिस का है पर आज किसी भी थाने में बिना रिश्वत दिए कोई सही काम करवा पाना कितना मुश्किल है यह सभी जानते हैं. सूचना अधिकार एक बड़ा हथियार है जिससे भ्रष्टाचारियों पर लगाम भी कसी जा सकती है और आवश्यकता पड़ने पर कोई शातिर दिमाग़ व्यक्ति इससे पैसे बनाने का काम भी कर सकता है. इस तरह के कामों में जब तक आम जनता की भागीदारी नहीं होगी और हम अपने कामों को समाज में चंद ठेकेदारों के हाथों में छोड़ देने का काम करना बंद नहीं करेंगें तब तक किसी भी परिस्थिति में कोई भी कानून हमारे लिए अच्छा साबित नहीं हो सकता है. कानून का काम समाज को दिशा देना का होता है और जो लोग निरंकुश होकर काम करते हैं उन पर लगाम लगाम लगाने का काम भी इसी कानून के माध्यम से ही किया जाता है.
                    सरकार को इस मामले में तुरंत पहल करनी चाहए और इस तरह के जनता जुड़े हुए कानून में तुरंत ही संशोधन करके इसका दुरूपयोग करने वाले के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती धाराएँ लगाने की व्यवस्था करनी चाहिए क्योंकि जब इतने संवेदनशील मसले पर भी भ्रष्टाचारी अपने को आगे रख पाने में सफल हो जायेंगें तो देश में किस कानून से जनता अपना हक़ मांग पायेगी ? देश के विभिन्न कार्यालयों में सही काम करने वालों के लिए भी कोई व्यवस्था की जानी चाहिए और साथ ही विकास और अन्य विभागों से जुड़े हर सरकारी काम को इन्टरनेट पर डालना आवश्यक किया जाना चाहिए जिससे कोई भी व्यक्ति कहीं से भी निगरानी कर सके और इस तरह के मामलों में अनियमितता मिलने पर बिना किसी कागज़ी ताम झाम के अपनी शिकायत इन्टरनेट के माध्यम से ही कर भी सके. हर ज़िले में एक ऐसी हेल्पलाइन शुरू की जानी चाहिए जो केवल इस तरह की अनियमितताओं पर ही नज़र रखने का काम कर सके जिससे आम लोग आसानी से अपनी शिकायतों को सही जगह तक पहुंचा सकें. इस हेल्पलाइन को राज्य कि राजधानियों में लगे हुए सर्वरों में ही ऑनलाइन रिकॉर्ड करने की बाध्यता भी होनी चाहिए जिससे किसी शिकायत को कूड़े के ढेर में न फेंका जा सके. हर शिकायत पर शिकायतकर्ता को एक स्वचालित शिकायत संख्या भी मिलनी चाहिए जिसमें किसी भी व्यक्ति का कोई जुड़ाव न हो. इसके अतिरिक्त अन्य उपाय करके भी भ्रष्टाचारियों पर नज़र रखी जा सकती है और कानूनों का अनुपालन कराया जा सकता है.   
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

3 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (19-12-12) के चर्चा मंच पर भी है | अवश्य पधारें |
    सूचनार्थ |

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  2. सुन्दर लेखनी !!!

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  3. क्या आपने कभी सूचना मांगी है और क्या वो आपको मिल गयी है एक युद्ध लडने से कम नही सूचना मांगना इसका तो उपयोग नही हो पा रहा तो दुरूपयोग कया होगा पर हां अगर अधिकारी मजबूत हो तो वो सूचना मांगने वाले को फंसा जरूर सकता है और अगर माफिया बडा हो तो जेल भिजवा सकता है

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