मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Friday, 3 April 2009

वैध या अवैध..

दो दिन पहले सीतापुर के जिला चिकित्सालय में कुत्ते ने नवजात बच्चे को खा डाला..... नहीं इतना घबराने की ज़रूरत नही है इसमें अस्पताल का कोई दोष नहीं है । असल में उस बच्चे को कोई पैदा होते ही छोड़ गया था। वह मासूम किसी इन्सान की नज़र पड़ने से पहले ही कुत्ते को दिख गया। किस इन्सान की बात की जाए यहाँ पर ? वो जिन लोगों ने पता नहीं किन परिस्थितियों में इस बच्चे को दुनिया में आने के लिए मजबूर कर दिया ? फिर बिना किसी उचित मानवीयता के उसे पूरे स्वरुप में विकसित होने दिया, जब उसे अपनाने का समय आया तो उनका ज़मीर जाग गया जिसने उस मासूम को कुत्तों के हवाले कर दिया। आज भी दुनिया में पता नहीं कितने लोग बच्चों के लिए तरसते रहते हैं और जिनको मिल रहे हैं वे इस तरह से हरकतें करते रहते हैं। मैं यहाँ पर ऐसा कुछ भी नहीं कहना चाहता जो उस बच्चे के माँ बाप के खिलाफ जाता हो पर एक बात तो सबको सोचनी ही होगी कि आख़िर ऐसा क्या था कि इस बच्चे को अपनाया नहीं जा सकता था ? अगर ऐसा था भी तो किस से पूछ कर उसे इस दुनिया में लाने का इंतजाम क्या गया था ? किसी की मजबूरी हो सकती है पर उस बच्चे को क्यों लाने का प्रयास किया गया जिसके लिए उसके माँ बाप भी नहीं तैयार नहीं थे ? बच्चे कभी भी अवैध हो सकते हैं ? रिश्ते तो अवैध हो सकते हैं पर बच्चों को इसके लिए दोषी मानना कहाँ का न्याय है ? इस दुनिया में पता नहीं कितने रिश्ते ही अवैध होंगें पर उन रिश्तों की परिणिति इतनी बुरी हो यह तो अच्छा नहीं है ? किसी को बिना मानसिक रूप से तैयार किए बगैर ही इस तरह से दुनिया में लाने का प्रयास किस तरह की मानवीयता है ?

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

2 comments:

  1. मैं सच कह रही हूँ कि जिस दिन ऐसा समाचार पड़ने या देखने को मिलता है ...कई दिनों तक नींद नहीं आती ....हमारे देश में कई लोग ऐसे हैं जो संतान को तरसते रहते हैं ....अगर उन्हें ये बच्चा मिल जाता तो उनकी दुनिया ही बदल जाती ....अगर खुद पाल नहीं सकता तो किसी के घर के आगे छोड़ दें ...कम से कम अनाथालय तो पहुँच जाएगा

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  2. क्‍या सच में ऐसा हुआ है ... बहुत बुरी खबर है ... जब सुतान को जन्‍म देनेवालों को ही संतान के प्रति सहानुभूति न हो तो क्‍या किया जा सकता है ... कम से कम उसे अनाथाश्रम तक तो पहुंचा देते।

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