मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 2 January 2010

अपराधी संग पुलिस ?

मुंबई पुलिस शुरू से ही अपराधियों के साथ सांठ-गांठ रखने के लिए बदनाम रही है वैसे ऐसा भी नहीं कि देश के अन्य भागों कि पुलिस का रिकार्ड बहुत अच्छा हो ? फिर भी नए साल के जश्न में जी तरह से पुलिस के बड़े अधिकारी अपने पद और गरिमा को भूल कर अपराधियों के साथ शामिल हुए वह निश्चित तौर पर शर्म की बात है. जिस देश में इन्हीं अपराधियों की संगत के कारण आतंकियों को देश में पनाह मिल जाती हो उनके साथ पुलिस का यह दोस्ताना रवैया क्या सन्देश देता है ? अच्छा होगा कि इस मामले की अच्छे से जांच करा ली जाये और उसके बाद दोषी पाए गए पुलिस वालों को तुरंत सेवा मुक्त कर दिया जाना चाहिए भले ही वे कितने बड़े अधिकारी हो ? पर जिस अपराधी के कहने पर ये अधिकारी वहां पहुंचे थे निश्चित ही उनके और बड़े अधिकारियों और नेताओं से भी संपर्क होंगें जिनका उपयोग कर वे अपने चहेते अधिकारियों को बचा भी सकते हैं ? देश में जब आतंक के खिलाफ इतने प्रयास किये जा रहे हैं तो पुलिस का यह रवैया पता नहीं उसे किस दिशा में ले जायेगा ? सबसे पहले पुलिस को समुचित वेतन दिया जाना चाहिए जिससे वे अपने परिवार का खर्चा सर उठाकर चला सकें और कोई अपराधी उन्हें खरीदने का प्रयास भी न करे. कुछ समस्याओं के साथ जीने वाले लोग बहुत आसानी से अपराधियों के कुचक्र में फँस जाते हैं जिससे निकलना बहुत ही मुश्किल होता है. फिर भी मुंबई पुलिस और गृह मंत्रालय को यह देखना चाहिए कि इस तरह की घटनाओं को किस तरह से रोका जा सकता है ? 

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

4 comments:

  1. पुलिसकर्मी भी आम जनता से निकले हुए लोग हैं ...रात दिन राज नेताओं और अपराधियों से संपर्क में बने रहते हैं ...उन्हें भी अपनी ख़ुशी मानाने का पूरा हक़ है ...अब ख़ुशी उसी के साथ तो बंटी जायेगी जिनके साथ ज्यादा समय गुजरा जाये ...
    नव वर्ष की बहुत शुभकामनायें ....!!

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  2. BTW: पुलिस और अपराधी अलग-अलग प्राणी होते है क्या ? :)

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  3. सब जिन्दा रहने और कुर्सी बचाये रहने की जुगत है और यह जुगलबंदी उसी का परिणाम है.

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