मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 13 February 2011

चीन का शांति उपदेश ....

                                      चीन की नीतियां हमेशा से ही विस्तार वादी रही हैं और इस क्रम में ताज़ा संकेत उसकी सत्तारूढ़ पार्टी की पत्रिका नए अंक से मिलता है जिसमें उसने एशिया में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव पर रोक लगाने के लिए अपने उद्देश्यों को भी रेखांकित किया है. चीन ने स्पष्ट तौर पर इस बात को कहा है कि शांति भी बन्दूक की नली से निकलती है पंचशील सिद्धांतों की बात कर भारत की पीठ में छुरा घोपने के बाद अब चीन अपनी शांति लाने की योजना की बातें करता है ? यह सही है कि सख्त प्रशासन के कारण वहां पर बहुत सारी समस्याएं आती ही नहीं हैं पर जब मसला मानवाधिकारों और पड़ोसियों के शांति बनाये रखने की हो तो चीन हमेशा से ही आक्रामक रहता आया है.  जो उसकी कभी ताकत तो कभी कमज़ोरी भी बन जाया करती है
                                  चीन की समझ में यह भी आता है कि भारत समेत कई देश अमेरिका का फ़ायदा भी उठा रहे हैं और आज भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और बड़े बाज़ार के कारण कोई भी देश हमसे सख्त लहज़े में बात करने से परहेज़ करता है, और इस बात को हमसे कई बार युद्ध कर चुका चीन भी समझता है क्योंकि पत्रिका ने साफ तौर पर यह भी कहा है कि भारत जैसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार वाले देश से बिना मतलब कोई विवाद नहीं करना चाहिए ? क्या कारण है कि अब भारत चीन के लिए युद्ध करने के एक देश से बढ़कर कुछ और भी हो गया है ? इसका एक मात्र कारण यही है कि अब चीन को भारत का बड़ा और निरंतर विकसित होता बाज़ार भी दिखाई देने लगा है और भारत उसके जितने पास है उससे वह अपने उत्पाद सस्ते दामों पर यहाँ उपलब्ध कर कर भारी मुनाफ़ा कमा रहा है ? और किसी भी सामान्य परिस्थिति में वह भारत के साथ कोई नया पंगा नहीं लेना चाहेगा पर साथ ही पुराने मुद्दों को भी कभी-कभी गरम करता रहेगा जिससे चीन के लोगों और भारत को यह लगता रहे कि वह अभी भी वैसा ही है
      आने वाले समय में भारत के लिए यह कुछ हद तक संतोष की बात हो सकती है कि चीन अब भारत को एक दुश्मन के स्थान पर अपने व्यापारिक हितों से जुड़ा देश भी मानने लगा है और आने वाले समय में यह व्यापार और बढ़ने के आसार हैं. इस बात का लाभ उठाना अब भारत को भी सीखना होगा जब कोई देश अपनी स्वार्थ के कारण हमारे साथ कुछ रियायत करने की सोच रहा है तो हमें अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल कर अपने हितों को सुरक्षित करने का काम भी कर लेना चाहिए. आज भारत एक ऐसी आर्थिक ताकत बन चुका है जिसका कोई तोड़ दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है तभी कल तक यूरेनियम देने से मना करने वाला आस्ट्रलिया आज खुद ही यह कह रहा है कि वह भी भारत को यूरेनियम बेचने के बारे में सोच रहा है ? ये बड़े देश जो अभी तक हमारी बात नहीं सुनते थे आज सभी हमारे साथ व्यापार करने के इच्छुक हो चुके हैं. फ़िलहाल हमें अपने पड़ोसी चीन के बारे में ही सोचना चाहिए क्योंकि यह हमारे साथ व्यापार करते करते कभी भी अपने पुराने रंग दिखा सकता है ? अच्छा ही है कि पहली बार केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड और अन्य चीन से लगते राज्यों में अब सड़कों का जाल बिछाने की योजना पर काम करना शुरू कर चुकी है और इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि यह काम बिना ढिंढोरा पीटे ही किया जा रहा है.       
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1 comment:

  1. भारतीय नेताओं की सोच सीमित है..

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