मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 21 March 2011

लीबिया और नाटो

            लीबिया को नो फ्लाई ज़ोन बनाने के तहत अमेरिका और नाटो देशों द्वारा की जाने वाली कार्यवाही के बाद लगता है कि यह मुद्दा भी अरब देश बनाम पश्चिमी देश होने जा रहा है. अब जिस तरह से अपने को घिरा पाकर गद्दाफ़ी ने इसे इस्लाम बनाम पश्चिमी देश की लड़ाई बताने का काम शुरू कर दिया है वह ईराक़ और अफ़गानिस्तान में इस तरह के आरोपों को झेल रही इन गठबंधन सेनाओं के लिए और मुश्किलें खड़ी कर सकता है. यह सही है कि जिस तरह से गद्दाफ़ी ने अपनी सेना का इस्तेमाल अपने ही लोगों के विरुद्ध किया वह गलत था पर यू एन के प्रस्ताव को लागू करने के लिए किसी भी स्थिति में इन देशों द्वारा पूर्वाग्रह से ग्रस्त कोई भी काम और भी गलत सन्देश देने वाला होगा.  इस समय इस्लामी जगत में अमेरिका को वैसे ही संदेह की दृष्टि से देखा जाता है.
       लीबिया के गद्दाफ़ी हमेशा से ही पश्चिमी देशों की आँख की किरकिरी बने हुए हैं पर अब जब इन देशों को मौका मिला है तो वे इसका उपयोग वहां की जनता की भलाई के लिए भी कर सकते हैं. शुरू में केवल कुछ प्रतिबन्ध लगाकर भी काम किया जा सकता है और अगर उसके बाद भी गद्दाफ़ी जनता पर ज़ुल्म करना बंद नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ हर संभव उपाय किये जाने चाहिए. अभी शुरू के दिनों में ही जिस तरह से पश्चिमी सेनाएं उग्र होकर काम कर रही हैं उससे लीबिया में धीरे धीरे गद्दाफ़ी के समर्थक बढ़ने शुरू हो जायेंगें और कट्टरपंथी भी वहां पर पश्चिमी देशों के खिलाफ माहौल बनाने का काम करने में लग जायेंगें जो कि किसी भी परिस्थिति में इन देशों के लिए अच्छा नहीं होगा.
     इस पूरे मसले को केवल यू एन के प्रस्तावों के तहत ही निपटना चाहिए और अमेरिका को अपनी मनमानी नहीं करनी चाहिए. हो सकता है कि कुछ प्रतिबन्ध लगने के बाद गद्दाफ़ी अपने पद से हटने के लिए तैयार हो जाएँ पर उससे पहले इस तरह से लीबिया के सरकारी भवनों को निशाना बनाकर किये जाने वाले हमले किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराए जा सकते हैं. प्रस्ताव में लीबिया के सैनिकों को निहत्थों पर वार करने और उन पर ज़ुल्म से रोकने के लिए कहा गया है न कि किसी भी स्थिति में लीबिया की मूलभूत संरचना को नष्ट करने का ? जिन गद्दाफ़ी को अपनी जनता से लगाव नहीं है उनसे यह आशा कैसे की जा सकती है कि वे वहां की सरकारी संपत्ति से लगाव रखते होंगें ? अब भी समय है कि पूरी तरह से इस प्रस्ताव को लागू किया जाये और कोई भी देश अपनी व्यक्तिगत खुन्नस यहाँ पर न निकाल पाए.       
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