मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Friday, 17 June 2011

पाक में सेना और कियानी

       लगता है एक बार फिर से पाक की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं और इस बार यह ख़तरा किसी और से नहीं खुद पाक सेना के द्वारा ही खड़ा किया जाने वाला है. अभी तक जिस तरह से कियानी की पकड़ पाक सेना पर मुशर्रफ के बाद से मज़बूत बनी हुई थी वह ओसामा के मारे जाने के बाद से काफी ढ़ीली पड़ती जा रही है. अभी तक कुछ भी ऐसा नया नहीं हुआ है जो किसी भी तरह से अब कियानी की स्थिति को अब मज़बूती की तरफ़ ले जा सके ? जैसा कि सभी जानते हैं कि पाक सेना का हर फैसला ११ शीर्ष कमांडरों की समिति द्वारा ही लिया जाता है और अभी तक कियानी के ख़िलाफ़ बोलने का साहस कोई भी नहीं कर पाता था और उनकी स्थिति को कोई चुनौती देने वाला भी नहीं था पर अब जिस तरह से अमेरिका पाक में घुसकर ओसामा को मारने के बाद किसी भी आतंकी को कहीं से भी ढूंढ कर मारने के बारे में अपनी मंशा ज़ाहिर कर चुका है तो उससे पाक की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. किसी भी स्थिति में अस्थिर पाक इस पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा ख़तरा हमेशा से ही रहा है.
   यह स्पष्ट है कि अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए पाक को तब तक पूरी सहायता देता रहेगा जब तक उसका मकसद पूरा नहीं हो जाता पर इससे पहले एक बात यह भी हो सकती है कि पाक सेना में विद्रोह की चिंगारी भड़क उठे और वह कियानी से पीछा छुड़ा ले ? कियानी के जाने का मतलब अमेरिका को भी खूब समझ में आता है और उस स्थिति में पाक के अन्दर इस तरह से खुले आम काम करने की आज़ादी अमेरिका को नहीं मिलने वाली है. अभी भी जिस तरह से पाक में अमेरिका के ड्रोन हमले जारी हैं और उसमें बराबर छोटे बड़े आतंकी मारे जा रहे हैं उससे कियानी पर इस बात के लिए दबाव बढ़ता ही जा रहा है कि वे अमेरिका को ऐसे खुलेआम हमले करने से रोकें. अमेरिका को आज पाक में कियानी जैसे पिट्ठू की ज़रुरत है तो इस स्थिति में हो सकता है कि कियानी को बचाए रखने के लिए वह कुछ समय तक ड्रोन हमले रोक दे और बाद में इनको फिर से शुरू कर सके. आज पाक में कियानी से अच्छा अमेरिका को कोई नहीं मिलने वाला है क्योंकि नेता तो केवल वहां पर मुखौटे के रूप में ही होते हैं.
        बात यहाँ पर अमेरिका और पाक के संबंधों की हो और भारत पर उसका असर न पड़े यह असंभव है क्योंकि जब भी पाक में कोई घरेलू संकट अपने चरम पर होता है तो पाक इस सारे में भारत की तरफ़ लोगों का ध्यान मोड़ने की कोशिश हमेशा से ही करता रहा है क्योंकि वहां की सेना और नेताओं को पता है कि जब भी कुछ गड़बड़ हो तो भारत को ज़िम्मेदार ठहराओ और हमला करने के साथ सबक सिखाने की बातें भी करो जिससे पाक की जनता खुश होती है और वह अपनी सारी परेशानी भूल जाती है. पर यह स्थिति भारत के लिए बहुत चिंताजनक हो जाती है क्योंकि आज जिस तरह से पाक मानसिक, आर्थिक और सामाजिक तौर पर पूरी तरह से दीवालिया हो चुका है और ऐसी स्थिति में वह विकास के पथ पर बढ़ते हुए भारत को किसी प्रत्यक्ष या परोक्ष युद्ध में धकेल सकता है. भारत को इन सारी स्थितियों पर ध्यान रखते हुए आगे की बात सोचने की ज़रुरत है और आवश्यकता पड़ने पर सशस्त्र संघर्ष के लिए भी तैयार रहना चाहिए.          
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