मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 11 July 2012

तकनीकी शिक्षा और यूपी

            यूपी में २०१२-१३ के सत्र के लिए एआईट्रिपलई द्वारा २० % सीटों के लिए हुई काउंसलिंग के बाद यहाँ की स्थिति के बारे में बहुत ही निराशाजनक माहौल बना क्योंकि इंजीनियरिंग के लिए ५०% सफल अभ्यर्थी इसके लिए उपस्थित ही नहीं हुए जबकि मैनेजमेंट वाली सीटों पर स्थिति और भी ख़राब रही जहाँ १ % सफल अभ्यर्थी भी आगे की औपचारिकतायें पूरी करने के लिए उपस्थित नहीं हुए. यह माहौल इस समय और भी निराशा पैदा करता है क्योंकि जब प्रदेश में अखिलेश सरकार पूरे माहौल को बदलने के लिए प्रयासरत है तब भी ऐसी निराशाजनक स्थिति अपने आप ही प्रदेश की सारी स्थिति को स्पष्ट कर देती है. यह भी सही है कि मात्र ४ महीने पुरानी सरकार से किसी बड़े चमत्कार की आशा तो नहीं की जा सकती और यह सरकार अपनी पूरी कोशिश से प्रदेश में हर तरह का माहौल सुधारने की कोशिश कर ही रही है. जिस तरह से प्रदेश में तकनीक को बढ़ावा देने की बात हो रही है उसमें ऐसा माहौल वास्तव में सोचने को मजबूर कर देता है.
         इस सबके पीछे अगर देखा जाए तो इन कॉलेजों की अपनी बनायीं परिस्थितियां ही अधिक ज़िम्मेदार हैं क्योंकि जब तक पूरे प्रकरण का समग्र रूप से आंकलन नहीं किया जायेगा तब तक इस समस्या से निपटने में सफलता नहीं मिल पायेगी. सबसे पहले देश और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गौर करना आवश्यक है क्योंकि जब तक शैक्षणिक माहौल को देश और प्रदेश की भावी आवश्यकताओं के अनुसार नहीं चलाया जायेगा तब तक यह स्थिति बनती ही रहेगी. यहाँ पर आवश्यकता से अधिक संस्थानों को अनुमति मिल गयी और इन संस्थानों ने अपने यहाँ पर मूलभूत शैक्षिक अनिवार्यताएं भी उपलब्ध नहीं करायीं जिससे आने वाली समय के लिए इनके लिए मार्ग और भी कठिन हो गया है. अभी तक जहाँ पर माहौल को सुधारने का काम किया जाना चाहिए वहां केवल किसी भी तरह से ये संस्थान अपनी सीटें भरने का जुगाड़ करने में लगे हुए हैं. जब फीस एक सामान ही पड़नी है तो कोई भी अबिभावक अपने बच्चों को कम सुविधा वाले संघर्षशील संस्थान में क्यों भेजना चाहेगा ?
        इस बारे में आज भी नए सिरे से पूरी तरह पुनर्विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि जब तक प्रदेश की आवश्यकता के अनुसार उच्च शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधारी जाएगी तब तक कुछ भी नहीं हो सकता है. आज भी इन संस्थानों को सरकार के साथ मिल बैठकर इस बारे में सोचना चाहिए कि प्रदेश की वास्तविक आवश्यकताएं क्या हैं और किन परिस्थितियों में किस तरह के नए कोर्स शुरू करके प्रदेश में कार्य कुशल और सक्षम लोगों की संख्या में वृद्धि की जाये ? अभी तक जिस तरह से केवल तकनीकी और मैनेजमेंट संस्थाओं को खोलने के लिए ही आवेदन आते रहे और सरकार ने भी बिना आवश्यकता पर विचार किये इनको मान्यता देना किया तो ऐसी स्थिति तो बननी ही थी. अब भी समय है कि इन संस्थानों को आज की ज़रूरतों के अनुसार अन्य कोर्सों को भी अपने यहाँ शुरू करने के बारे में विचार करना चाहिए जिससे अब तक हुई ग़लतियों को सुधारा जा सके और इन संस्थाओं को भी भविष्य के लिए बचाए रखा जा सके वर्ना आने वाले कुछ सालों में इनके लिए अपने अस्तित्व को बचाना ही मुश्किल साबित होने वाला है.     
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