मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 13 May 2014

पाकिस्तान और पोखरण

                                          १६ वर्ष पहले भारत द्वारा पोखरण में किये गए परमाणु परीक्षण आज भी अमेरिका और पाकिस्तान के लिए किसी दुःस्वप्न से काम नहीं हैं और उसके बाद से ही पाकिस्तान इस बात की फ़िराक़ में लगा हुआ है कि उसे किसी भी तरह से इस परीक्षण स्थल की कुछ रेत मिल सके जिससे वह इस सम्पूर्ण परीक्षण की प्रकृति और इससे प्राप्त परिणामों की भारतीय उपलब्धि पर अपनी जानकारी बढ़ा सके. ताज़ा रिपोर्टों में इस बात का खुलासा हुआ है कि आज भी पाकिस्तान अपने सूत्रों के माध्यम से इसी प्रयास में लगा हुआ है कि किस तरह से वहां पर लगे हुए भारतीय सुरक्षा घेरे को तोड़कर वह कुछ सबूत जुटा सके. इस मामले में जहाँ तक भारतीय पक्ष का सवाल है तो आज यह परीक्षण स्थल बीएसएफ की कड़ी सुरक्षा में है और सैन्य क्षेत्र होने के कारण यहां पर किसी का भी आना जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है जिससे पाकिस्तान को किसी भी स्तर पर सफलता नहीं मिल पा रही है. भारतीय गोपनीयता और सुरक्षा घेरे में सेंध लगाने का काम करने पाक का पुराना शगल रहा है.
                                          इस परीक्षण के बाद जहाँ १९७४ में पहले परीक्षण के बाद से ही नाभिकीय बिरादरी में शामिल होने के लिए भारत तत्पर ही था पर जिस तरह से नरसिंह राव सरकार के समय भी इस तरह का प्रयास किया गया था और उसमें अनजाने में कुछ सुरक्षा सम्बन्धी चूक हो जाने के कारण अमेरिका को यह पता लगा गया था कि पोखरण में भारत परमाणु परीक्षण की तैयारी कर रहा है तो उसने वैश्विक बिरादरी के माध्यम से तब आर्थिक रूप से संकट का सामना कर रहे भारत पर दबाव बनाने में सफलता पायी थी. कहा तो यह भी जाता है कि जब अटल को राव ने सत्ता सौंपी थी तो उन्होंने इस परीक्षण के बारे में सारी जानकारी उनसे साझा भी की थी पर एक बार अमेरिकी जासूसी उपग्रहों की चपेट में आने के बाद भारतीय एजेंसियों को अमेरिकी व्यवस्था का पता लग चुका था जिस कारण भी यह परीक्षण अटल सरकार की मंशा के अनुरूप बहुत ही गोपनीयता के साथ संभव हो सके थे.
                                      भारतीय प्रगति से बौखलाते हुए पाक के पास आज भी इस्लाम और जिहाद के अलावा कुछ भी शेष नहीं है और आज भी वह भारत के हर रचनात्मक कदम का विरोध ही किया करता है. परमाणु शक्ति सम्पन हो जाने के बाद भी भारत पाक एक दूसरे के खिलाफ इसका उपयोग आसानी से नहीं कर सकते हैं क्योंकि दोनों के लिए ही सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र सीमा के इतने पास है कि उसका असर हमला करने वाले देश पर पड़े बिना नहीं रह सकता है. अच्छा होता कि भारत की तरह दुनिया के सभी देश अपने परमाणु कार्यक्रम को विकास के लिए उपयोग में लाने का काम ही करते और दुनिया को बेहतर ऊर्जा को सुरक्षित तरीके से उपलब्ध करने का प्रयास भी करते. आज भी पाक को जितनी भारतीय परीक्षण स्थल की रेत की इतनी चाह है उससे यही समझा जा सकता है कि उसके परीक्षणों को लेकर उसके मन में कुछ शंका तो अवश्य ही है तभी वह अपने परीक्षणों को भारतीय कसौटी पर कसने के लिए इतना उतावला हो रहा है जबकि बहरतीय वैज्ञानिकों ने इन परीक्षणों के बाद अपने मिशन को पूरी तरह से सफल बताया था.      
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