मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Thursday, 11 June 2009

किसकी गलती किसको फल ?

एक घटना जो किसी भी संवेदन शील व्यक्ति को अन्दर तक झकझोर सकती है लखनऊ में घटी। दो दिन पूर्व एक व्यक्ति क्वालिस गाड़ी से एक औरत को उतार कर चला जाता है वह उस समय अचेतावस्था में थी। कई स्थानों पर उसका इलाज करने की कोशिश की गई और अंत में उसे मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में भरती किया गया, कल अंततः वह बिना होश में आए ही इस बेरहम दुनिया से चली गई। उसका इलाज कर रहे चिकित्सकों ने बताया की वह हेपेटाइटिस बी से पीड़ित तथा २५ सप्ताह की गर्भवती भी थी।
सवाल यह उठता है की क्या कोई इतना संवेदन शून्य भी हो सकता है ? पता नहीं जो व्यक्ति उसे लावारिसों की तरह छोड़ गया वह कौन था ? उससे कोई सम्बन्ध था भी या नहीं , हो सकता है कि इस महिला की इस दशा का जिम्मेदार वह व्यक्ति ही हो ? पर यह घटना कई सवालों का उत्तर खोजने पर मजबूर कर देती है कि आख़िर कैसे कोई इस तरह की हरकत कर सकता है ? क्या मानवीय संवेदनाएं इतनी ओछी हो गई हैं कि वे रिश्ते को भूल जायें या फिर इस महिला को किसी तरह के अनैतिक व्यापर में धकेलने वालों को जब इसकी बीमारी का पता चला हो तभी उन्होंने इसका इलाज कराने की बजाय उसे छोड़ देना ही उचित समझा हो ? शायद अब वह उनके लिए लाभ का सौदा न रह गई हो ? एक संभावना यह भी हो सकती है कि उसका परिवार इतना गरीब हो कि वे लोग इतनी बड़ी बीमारी का इलाज ही न करा सकते हों ? पता नहीं और क्या क्या हो सकता है पर वह महिला एक सवालों की फेहरिस्त तो छोड़ ही गई जो किसी के मन में भी आ सकते हैं ? कौन लोग थे जिन्होंने उसका इस्तेमाल तो किया पर जब उसे सहारे की ज़रूरत थी तो वे कन्नी काट कर निकल लिए ? हो सकता है कि वे समाज की नज़रों से बच गए हो पर एक बात निश्चित है कि इस तरह से एक असहाय प्राणी को छोड़कर अपनी दुनिया में आसानी से वापस लौट जाने वाले व्यक्ति और हैवान में क्या फर्क हो सकता है ?
संसार में बहुत कुछ होता रहता है पर जब कभी ऐसा कुछ हो जाता है तो वास्तव में मानवता और मानवीय रिश्तों से चिढ सी मचने लगती है और एक बात कह दूँ कुछ लोग सहमत तो नही होंगें पर एक पुरूष यह कार्य करके गया था इसलिए अपने पुरूष होने पर भी घिन आती है .........

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

11 comments:

  1. जी आपने ठीक कहा कुछ लोग तो इंसानोँ क़ॆ रूप मेँ जानवर से भी बदतर हैं क्योँक़ि जानवर भी ऐसी हरकत करते हुए सोचेगा लेकिन इन शैतानोँ की तो सोच समझ सब खतम हो चुकी होती है ..दीपा

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  2. आशुतोष

    जो भी रहा होगा वो हमारे बीच का ही कोई रहा होगा। हम सब शर्मिंदा है। लेकिन यह कहानी सिर्फ मानवीय रिश्तों के बिखरने की नहीं है,इसकी भी है कि चिकित्सा कितनी महंगी और पहुंच के बाहर होती जा रही है। डाक्टर और मरीज़ के बीच संवाद में इतनी कमी है कि बात कर सिर्फ हताशा ही बढ़ती है और इतना कम जवाब मिलता है कि मन अपने अंधेरी गलियों में भटक कर जवाब खोजने लगता है।
    उसके लिए भी अपनी पत्नी को छोड़ना आसान फैसला नहीं रहा होगा। वो कमज़ोर इंसान तो रहा ही होगा लेकिन समाज देखिये। उसके आस पास के रिश्तेदारों ने भी कोई संबंल नहीं दिया होगा। सरकार दे सकती थी मगर उसे तो परवाह ही नहीं।

    हम वाकई जानवर होते जा रहे हैं। अच्छा किया कि आपने इस बात को सामने रख दिया। यह तो पता चले कि हम कभी इंसान थे।

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  3. इस दुनिया मे बहुत कुछ अनुतरित ही रह जाता है और एक संवेदनशील व्यक्ति इन सवालों को जीवन भर ढूँढता रहता है बहुत बडिया लेख है आभार्

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  4. aur ham pata nahin kin kin baataon ko lekar kehte fir rahe hain ki ham bahut adhunik ho gaye hain...bahut hee dardnaak aur dukhee kar dene walee ghatnaa...

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  5. यह बदलते समाज की एक सामान्य घटना मात्र है,सामान्य इसलिए क्यूंकि इससे बड़ी संवेदनहीनता वाली घटनाएँ मैंने देखि या सुनी है...!ये उस व्यक्ति का कसूर नहीं है बल्कि समाज का कसूर है क्यूंकि वो व्यक्ति कहीं भी अकेला तो रहता नहीं होगा,उसने संभावित सभी प्रयास भी किये होंगे..किन्तु समाज से अपेक्षित सहयोग ना मिलने पर ही उसने कोई कदम उठाया होगा...!

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  6. इस अतिसभ्य समाज से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है ? मानवता की परिभाषा कहाँ किसी को पता है ?
    होता है पर मैं उस प्राणी को काम दोषी पाता हूँ जो छोंड कर चला गया बल्कि उनको अधिक दोषी पाता हूँ जो समर्थ होते हुए भी उसके परिवार की सहायता को आगे नहीं आये होंगे ... और एक मजबूर अबला को इस निरीह अवस्था में छोड़ के चला गया |
    मैंने कई doctors और nursing home देखे हैं जहाँ वो normal केस को ऑपरेशन केस बना जनता को ठगते हैं | ऐसे मामले खबर नहीं बनते और कई दरिन्दे अपनी दुकान चला रहे हैं |
    आप एक हैं पर संवेदना शून्य नहीं है जान कर ख़ुशी हुई ....
    घटना शर्मसार करने वाली तो है पर यह सत्य है

    वो व्यक्ति जो उसे छोंड कर गया उसके पक्ष में मैं सिर्फ यही कहना चाहूँगा की
    "बहुत मजबूरियां रही होंगी कोई यूँ ही बेवफा नहीं होता"


    Ankit khare

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  7. इस अतिसभ्य समाज से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है ? मानवता की परिभाषा कहाँ किसी को पता है ?
    होता है पर मैं उस प्राणी को काम दोषी पाता हूँ जो छोंड कर चला गया बल्कि उनको अधिक दोषी पाता हूँ जो समर्थ होते हुए भी उसके परिवार की सहायता को आगे नहीं आये होंगे ... और एक मजबूर अबला को इस निरीह अवस्था में छोड़ के चला गया |
    मैंने कई doctors और nursing home देखे हैं जहाँ वो normal केस को ऑपरेशन केस बना जनता को ठगते हैं | ऐसे मामले खबर नहीं बनते और कई दरिन्दे अपनी दुकान चला रहे हैं |
    आप एक doctor हैं पर संवेदना शून्य नहीं है जान कर ख़ुशी हुई ....
    घटना शर्मसार करने वाली तो है पर यह सत्य है

    वो व्यक्ति जो उसे छोंड कर गया उसके पक्ष में मैं सिर्फ यही कहना चाहूँगा की
    "बहुत मजबूरियां रही होंगी कोई यूँ ही बेवफा नहीं होता"


    Ankit khare

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  8. mujhe nahi lagta ki us admi koi majboori rahi hogi....ye kayarta hai...agar uski patni thi to usey samna karna chahiye tha chahe tha...Voh bechari to vaise bhi mritu ki god me ja rahi thi...uske sath khade hokar samna karne me hi mardangi thi..varna haivangi..!!!!
    Radio nawab

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  9. Dear Dr. Aashu

    Maaf karna computer par devnaagri mein nahi likh paata hoon. Saadhuvaad aapki samvedansheelta ko aur us se bhi adhik islye ki aap apni samvedna ko vyakt kar use samaj mein pravaahit karne ko kaaryasheel bhi hue anyatha hum mein se adhikansh samvedna ko sirf sochte hain aur kuch to samvedna ko soch kar time pass bhi kar lete hain kyonki aisi ghatnayein hum utsukta ke pyase logon ki jankaari ki pipasa ko shant karti hai. Ravish NDTV shayad sahmat honge ki TV par ghatna aadharit karyakramon ki safalta ke peechhe yah muhkya kaaran hai. Kisi ko sadak kinare pade dekh kar yeh jaanana ki kya hua hai, mukhya uddeshya hota hai na ki madad karna. Hum apni tulna jaanvar se nahi kar sakte kyonki vo rishton ko, chahe vo parivarik ho ya samajik, tolte nahi hain, fayda nahi dekhte, prathmiktayen nahi tay karte. Shayad hamein pahle jaanvar se seekh leni chahiye.

    Aapki samvedna ko salaam.

    Vijayant
    Meerut

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  10. aadmi manwata shoonya hota ja raha hai...
    bahut achha likha hai...

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  11. bahut jhakjhorne wali ghatna hai . isse manav samaj ki aajkal ki kutsit bhavnao ke bare me pata chalta hai .bahut achaa lage rahe isi tarah se samaj ke logo ko jagate rahe

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