मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 25 August 2009

हिन्दी की अनिवार्यता..

जिस तरह से केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने हिन्दी को देश जोड़ने वाली भाषा के रूप में विकसित करने पर बल दिया उससे कोई भी असहमत नहीं हो सकता है पर बात जब भाषा की हो और हिन्दी की हो तो दक्षिण के राज्यों खासकर तमिलनाडु में सबसे अधिक हलचल दिखाई देती है। बात कुछ हद तक समझने की भी है इस देश में बहुत सारे विवाद ऐसे हैं जिनका कोई मतलब ही नहीं है पर अपने वोटों के लालच में नेताओं को वे बहुत बड़ा मुद्दा दिखाई देते हैं और जिसको आधार बनाकर नेता भाषा के विवाद खड़े करने में सक्षम हो जाते हैं। यह सच है की इस देश को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा की ज़रूरत है पर जब इस बात को कोई हिन्दी भाषी नेता कहता है तो दक्षिण में इसे थोपने जैसा माना जाता है। देश की आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी क्या उत्तर भारत में कोई दक्षिण भारत की भाषाएँ पढ़ना चाहता है ? शायद कोई नहीं ? देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए किसी दूसरे पर दबाव तो नहीं बनाया जा सकता। हम सभी हिन्दी भाषी लोग इसे पता नहीं क्यों समझना नहीं चाहते ? मुझे याद है कि केवल मुलायम सिंह ने अपने एक बार के मुख्य मंत्रित्व काल में भारतीय भाषओं को आगे लाने की बात कही थी। अच्छा हो कि संसद में हमारे नेता इतना सीखने के साथ ही एक दो अन्य भारतीय भाषाएँ भी सीखें और केवल हिन्दी या अंग्रेजी में बोलने के अलावा अपनी-अपनी अन्य भाषाओं का उपयोग करें। नेता यह तो चाहते हैं कि दक्षिण हिन्दी सीख ले पर क्या उत्तर अन्य भाषाएं सीखने को तैयार हैं ? यह बात पक्की है कि यदि ये सांसद ही केवल एक अन्य भाषा सीख कर उसका कुछ उपयोग करना शुरू कर दें तो संसद में भाषाई गुलदस्ता देखते ही बनेगा। कितना अच्छा हो कि कोई भी अपनी भाषा का उपयोग न कर रहा हो और अन्य भारतीय भाषा को सम्मान दे रहा हो ? यह बात दावे के साथ कही जा सकती है कि अगर उत्तर के लोग इस बात पर अमल करेंगें तो दक्षिण के लोग संसद में केवल हिन्दी में ही बोलते दिखाई देंगें। भाषा दबाव से नहीं लड़ी जा सकती इसे लागू करने के लिए हमें भी दूसरी भाषाओं का सम्मान करना सीखना ही होगा। देश को सूत्र में पिरोने के लिए भाषा की नहीं इच्छा शक्ति की ज़रूरत है .... पर क्या है किसी नेता में इतनी इच्छा शक्ति ? आइये नेताओं को उनके हाल पर छोड़ कर हम तो एक भाषा सीखने का प्रयास करना शुरू ही कर दें... बदलाव तभी आता है जब हम अपने में बदलाव लाने का प्रयास करते हैं.
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

2 comments:

  1. केवल और केवल हिंदी ही वह भाषा है जो देश को एक सूत्र मैं पिरो सकती है

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