मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 18 October 2009

पाक मजबूरी में चेता..

चित्र बी बी से हिन्दी से साभार
कल जिस तरह से पाक सेना ने इस बात की घोषणा कर दी की उसने वजीरिस्तान राज्य में तालिबान विद्रोहियों के खिलाफ निर्णायक मोर्चा खोल दिया है और साथ ही यह भी स्वीकार किया की यह अभियान आतंकियों के सफाए तक लगातार चलता रहेगा उससे यही पता चलता है कि अब पाक और उसकी सेना को यह पता चल गया है कि उसकी एक ग़लती ने ख़ुद पाक के वज़ूद पर ही सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। किसी भी देश के लिए सबसे अधिक परेशानी की बात यही होती है कि उसके सैन्य बल लगातार आतंकियों के निशाने पर आते रहें ? अभी तक जब इराक़ या अफ़गानिस्तान में अमेरिका-नाटो फौजों के साथ जब इस तरह की घटनाएँ होती थीं तो पाक एक बार में ही विदेशी सेनाओं की बात करने में नहीं चूकता था। अब उसकी इस्लामी विस्तारवादी आतंकी नीतियों के कारण आज उसकी हालत ख़ुद बेचारे जैसी हो गई है क्योंकि अब सशक्त हो चुके ये आतंकी किसी ज़रदारी या आई एस आई की बात मानने को तैयार नहीं हैं। उनके लिए एक ही काम है कि जो भी उनके काम के बीच में आए उसी पर हमला शुरू कर दो। आज पाक सरकार के लिए यह समझना बहुत मुश्किल हो गया है कि जिन आतंकियों को उन्होंने जिहाद के लिए तैयार किया था वे ही उसके खिलाफ़ आज हथियार उठा कर खड़े क्यों हो गए हैं ? इस बात की तह में जाए बिना कोई यह समझ नहीं सकता कि इन आतंकियों की मानसिकता क्या है ? जिहाद के नाम पर आए पैसे का कोई हिसाब नहीं होता कि कहाँ कैसे कसने कितना दिया गया और धर्म के नाम पर इकठ्ठा किया गया यह धन आतंकी अपने हिसाब से उड़ाते रहते हैं। जब दुनिया भर से आया यह पैसा ग़लत हाथों में जाने लगता है और कोई भी उसका हिसाब मांग लेता है तो इन आतंकी आकाओं को यह बहुत खलता है। आज के समय में अपने को पाक सरकार से भी बड़ा साबित करने के चक्कर में आतंकी पाक में बहुत दुस्साहस पर उतर आए थे जिसके कारण पाक के पास अपने वज़ूद को साबित करने के के लिए उनके खिलाफ़ व्यापक अभियान चलाने के आलावा कोई और रास्ता भी नहीं रह गया था।


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