मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

कोबाल्ट-६० और सुरक्षा...

दिल्ली विकिरण मामले में जिस तरह से अब यह बात सामने आ रही है कि दिल्ली विश्व विद्यालय की रसायन प्रयोगशाला से ही नीलामी में यह कोबाल्ट ६० मायापुरी तक पहुंचा था उससे सभी हैरत में हैं. डी यू के कुलपति दीपक पेंटल ने इस बात की नैतिक ज़िम्मेदारी भी ली है और साथ ही यह भी कहा है कि यह देखा जायेगा कि नीलामी में किसी को लाभ पहुँचाने के लिए या लापरवाही के कारण यह रेडियो धर्मी पदार्थ कबाड़ के रूप में चला गया और आगे से इस बात के पूरे प्रबंध किये जाने की बात कही जिससे इस तरह के हादसों से बचा जा सके. सवाल यह है कि क्या रसायन विभाग इसी तरह से काम करेगा ? जिस जगह पर हर तरह के विस्फोटक और अन्य सामग्री बनाने का पूरा मसाला हो उसे कितने हलके से लिया गया ? नियम के अनुसार केवल कार्यवाही से काम नहीं चलने वाला है क्योंकि इस कोबाल्ट से देश विरोधी गतिविधियों को भी अंजाम दिया जा सकता था. अब इस तरह की घटना हो जाने से लोगों को यह भी पता चल गया कि देश के बड़े शिक्षण संस्थानों में रेडियो धर्मी पदार्थ उपलब्ध रहते हैं. कोई लालच में पड़कर इन पदार्थो को गलत हाथों तक भी पहुंचा सकता है. अच्छा हो कि देश में हर जगह इस तरह की सुविधा न दी जाये बल्कि कुछ चुनिन्दा जगहों पर इन पर प्रयोग किये जाएँ साथ ही इस बात का भी ख़याल रखा जाये कि कहीं से भी इन संस्थानों की सुरक्षा और इन पदार्थों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही न होने पाए.
देश में सुरक्षा मानकों की जिस तरह से अनदेखी की जाती है और हमारी भीड़ तंत्र की मानसिकता भी पता नहीं कब क्या करवा दे ? अच्छा हो कि देश में संवेदन शील शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा तंत्र विकसित किया जा सके. जिस तरह से देश में आतंकी हर समय गड़बड़ी फ़ैलाने के लिए आमादा रहते हैं उस परिस्थिति में किसी भी तरह की लापरवाही आख़िर में केवल जनता पर ही भारी पड़ने वाली है. अब भी समय है कि हम जनता के लोग भी सचेत होकर जीना सीख लें क्योंकि कई बार हम यह देख कर भी अनदेखा कर जाते हैं और हमारी उदासीनता बहुत बड़ा नुकसान कर डालती है. देश के हर नागरिक के अब आँखें खोल कर जीने का समय आ गया है और जो सोते रहेंगें वे अपने साथ अपने आस पास के समाज को भी नुकसान पहुँचाने का काम ही करेंगें.

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