मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 7 July 2010

रेलवे और तत्काल आरक्षण

आखिरकार भारतीय रेल ने बहुत समय बाद ही सही पर प्रयोग के तौर पर कुछ ऐसा करने के बारे में सोचा जिससे तत्काल आरक्षण करने वालों को कुछ राहत मिलने की सम्भावना बन रही है. अभी तक जिस तरह से रेलवे के एजेंटों द्वारा इस सेवा का दुरूपयोग किया जा रहा था उसको देखते हुए कुछ तो किया जाना आवश्यक हो भी गया था. यह सही है कि रेलवे का पूरा तंत्र बहुत बड़ा है और उसमें किसी भी तरह की शिकायत भी बहुत बड़ी मात्रा में ही होती है और उससे परेशान होने वालों की संख्या भी लाखों में ही पहुँचती है.
       वर्तमान में अभी तक तत्काल आरक्षण सुबह ८ बजे से शुरू होता है और उस समय यह स्थिति होती है कि एजेंटों के कारण कुछ देर में ही सारे टिकट बुक हो जाते हैं और आम यात्री को कभी भी आसानी से टिकट नसीब नहीं होता है. इस बारे में बहुत दिनों से यह सोचा जा रहा था कि कुछ तो ऐसा किया जाये जिससे साधारण यात्री भी इस सेवा का लाभ उठा सके ? अब सुबह ८-९ के बीच रेलवे ने अपने एजेंटों को वेबसाइट पर आने से रोकने का प्रस्ताव किया है जिससे इन एजेंटों के द्वारा नेट पर आ जाने के कारण जो समस्या आती थी वह भी दूर हो जाएगी साथ ही टिकट भी आसानी से बन पायेंगें. वैसे भी सुबह गलत तरीके से बनाये गए टिकटों के आधार पर बहुत सारे फर्जी यात्री यात्रा करते रहते थे अब जिस पर काफी हद तक रोक लग जाने की सम्भावना है.
      तत्काल सेवा जो केवल अचानक यात्रा करने वालों के लिए ही शुरू की गयी थी उसका इस हद तक दुरूपयोग होने लगा तह कि किसी स्तर पर उस सेवा को सफल नहीं कहा जा सकता था. बहुत कम यात्री ही और बहुत कम महत्त्व के गंतव्यों पर ही लोगों को इस सेवा के माध्यम से टिकट मिल पाते थे. वैसे तो यह रोक केवल अस्थायी रूप से केवल यह देखने के लिए लगायी गयी है कि क्या इससे कुछ अंतर आता है ? अगर यह यात्रियों की मदद करने में कुछ हद तक भी सफल रही तो इसे आगे स्थायी भी किया जा सकता है. इसके साथ ही जो बहुत महत्वपूर्ण बात देखने वाली होगी कि कहीं ऐसा न हो कि ये एजेंट अब व्यक्तिगत खातों के माध्यम से इस तरह के किसी अन्य रास्ते को खोज लें जिसका कोई तोड़ निकालने में फिर से बहुत समय लग जाये. अच्छा होगा कि रेलवे कुछ ऐसी व्यवस्था भी करे कि किसी एक ही आई पी पते से लगातार किये जाने वाले आरक्षणों और खातों पर भी नज़र बनी रहे जो सुबह ८-९ के बीच में सक्रिय रह रहे हों ? फिलहाल यह आशा की जा सकती है कि इससे आम यात्री को कुछ हद तक दलालों से मुक्ति मिल ही जाएगी. 
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

2 comments:

  1. इसके और भी पक्ष हैं ।

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  2. से भी सुबह गलत तरीके से बनाये गए टिकटों के आधार पर बहुत सारे फर्जी यात्री यात्रा करते रहते थे अब जिस पर काफी हद तक रोक लग जाने की सम्भावना है.

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