मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 24 October 2010

खाद्य सुरक्षा ?

सोनिया गाँधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् ने सरकार से कहा है कि वह आने वाले समय में जो खाद्य सुरक्षा गारंटी विधेयक लाने जा रही है उसमें इस बात का भी ध्यान रखे कि देश की ८० करोड़ आबादी को सही समय से त्रुटिहीन प्रणाली के द्वारा समय से अनाज उपलब्ध कराया जा सके. परिषद् की यह सलाह ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार खाद्य सुरक्षा गारंटी विधेयक प्रस्तुत करने के लिए तैयारियां कर रही है. कहने के लिए यह बात बहुत अच्छी लगती है और जिस तरह से मनमोहन सरकार ने कुछ बहुत बड़े काम बहुत शांति के साथ किये हैं उससे लगता है कि यह काम भी उनके लिए मुश्किल नहीं होगा.   
         एक विचार जो इस बैठक से सामने आया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली से भ्रष्टाचार मिटाने के लिए बीपीएल श्रेणी हो हटाकर केवल दो श्रेणी ही बनाये जिसमें से एक को अनाज देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए और दूसरे को आम श्रेणी में रखा जाना चाहिए. पहली श्रेणी को अनाज बहुत ही कम दामों पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए और दूसरी श्रेणी के लोगों को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधे दामों पर अनाज उपलब्ध करना चाहिए. यह ठीक है और देखने में यह विचार बहुत लुभावना लगता है पर जिस तरह से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार का घुन लगा हुआ है वह कहाँ तक बिना घुन लगा अनाज ज़रूरतमंदों तक पहुंचा पायेगी ?
      अच्छा हो कि इस तरह के किसी भी विचार के आने से पहले हमें अपनी वितरण प्रणाली में सुधार करना चाहिए और एक वितरण प्रणाली ही क्यों आज देश को हर स्तर पर भ्रष्टाचार से सख्ती से लड़ने की आवश्यकता है. देश में कानूनों की कोई कमी नहीं है पर जब ज़रुरत होती है तो कुछ लोग कानून की कमियों को खोजकर अपने को साफ़ बचाकर ले जाते हैं ? आज हमारा ध्यान देश में एक ऐसी व्यवस्था बनाने में होना चाहिए जो हर स्तर पर हर बात की समीक्षा कर सकने के अधिकार से युक्त और सक्षम होनी चाहिए. सबसे पहले हमें हर स्तर पर देश को आगे बढ़ाने के लिए आम जनता की सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए क्योंकि बिना इसके कुछ भी सही ढंग से नहीं हो पायेगा.  केवल प्रायोगिक स्तर पर ही सही देश के कुछ गाँवों में ऐसा किया जाना चाहिए कि स्थानीय निष्पक्ष लोगों की एक समिति बनाई जाए जो सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ निर्विवाद और गैर राजनैतिक लोगों को मिलकर बनाई जाए और इसे हर तरह की जांच करने की छूट होनी चाहिए. इस प्रयोग के बाद इसके परिणामों की समीक्षा की जानी चाहिए. यह तय है इस तरह के ठोस जन सहभागिता के काम से ही भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जा सकेगी.   
 
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1 comment:

  1. इसमें भी भ्रष्टाचारी कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे.

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