मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 17 January 2011

गाँव शहर से अच्छे....

एक ऐसी खबर जिसको पढने के बाद लोगों का शायद शिक्षित होने और शिक्षित लोगों के अधिक दूरदर्शी होने पर से विश्वास उठ जायेगा. नोएडा में जिस तरह से शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में लड़का/लड़की का लिंगानुपात बिगड़ा हुआ है उसे देखकर यही लगता है की शहरी क्षेत्र के लोगों में लड़के की चाह कुछ ज्यादा ही जोर मार रही है. ऐसा कुछ करते समय उनको इस बात का एहसास बिलकुल भी नहीं होता है कि आने वाले समय में अगर लड़कियां नहीं होंगीं तो उनके लड़कों की शादी के लिए देखे गए उनके सपने कहाँ से पूरे होंगें ?  पर शायद इन माँ-बाप को अभी केवल इतना ही दिखाई दे रहा है कि वे आज अपने घरों में लड़कियों को आने से रोक सकने में समर्थ हो पा रहे हैं ? आने वाले समय में उनके यही कदम उन्हें पता नहीं कहाँ कहाँ भटकने को मजबूर कर देंगें ? 
            इस पूरे मामले में जहाँ आंकड़े देखकर यह पता चलता है कि २००१ की जनगणना के बाद से अब कन्या लिंगानुपात कुछ बढ़िया हुआ है पर आज भी यह संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है ? एक तरफ जहाँ ग्रामीण क्षेत्र में यह ९२०/१००० है वहीं शहरी क्षेत्र में यह ८५५/१००० पर अटकी हुई है. इसका क्या मतलब निकला जाये कि शहरी क्षेत्र में लोग अपनी शिक्षा का इस तरह से उपयोग कर रहे हैं और कुछ लालची चिकित्सकों की सहायता से कुछ रूपये खर्च करके वे पूरे समाज के ताने बाने को छिन्न भिन्न करने पर आमादा हैं. क्या शिक्षा का यही अर्थ लगाया जाए कि कुछ लोग आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल करके अपने मन की करने पर लगे हुए हैं. अभी तक जिन जांचों से गर्भ में होने वाली बीमारियों का पता लगाया जाता था उसका दुरुपयोग आज भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए किया जा रहा है ? क्या आने वाले समय में भारत चिकित्सा जगत से जुड़े इन नए आयामों के प्रयोग के लायक समझा भी जायेगा ?
              क्या हमारी शिक्षा अब इतनी ही रह गयी है कि हम अपने भविष्य के निर्धारण के समय इस तरह से लड़कियों को नियंत्रित करते चलें ? प्रकृति अपने हिसाब से चलती है और इस तरह से प्राकृतिक असंतुलन को जन्म देने वाले यह नहीं जानते हैं कि अनजाने में वे कहीं न कहीं से सामाजिक संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं? अभी तक जो काम छोटे स्तर पर किया जा रहा है अगर उसे ही पूरा देश अपना ले तो इस समाज का क्या होगा और आने वाले समय में लड़कों के लिए शादी योग्य लड़कियां कहाँ से आयेंगीं ? धिक्कार है ऐसे चिकित्सकों पर जो केवल कुछ रुपयों के लालच में इस तरह की घटिया हरकतें करने से भी बाज़ नहीं आते हैं ? क्या आधुनिक और सभ्य समाज इसी तरह के होते हैं ? इस काम की शुरुआत पंजाब और हरियाणा से हुई थी और आज भी वहां पर स्थिति कुछ सुधरी सी नहीं लगती है ? कई ख़बरें तो ऐसी भी मिली कि इन लड़कों के लिए केरल और बिहार से लड़कियां लायी जा रही हैं ? इस सारे मसले में हम सभी को अपनी अपनी नैतिकता के साथ जीना सीखने की आवश्यकता है और जब तक हम यह नहीं सीख सकेंगें तब तक यह असंतुलन दूर नहीं होगा...
       

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

2 comments:

  1. स्त्री अभिशप्त है तिरस्कृत होने के लिए।

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  2. सार्थक आलेख। धन्यवाद। जील जी से सहमत हूँ।

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