मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 13 September 2011

अमर के साथ जेठमलानी

      नोट के बदले वोट मामले में तिहाड़ में बंद अमर सिंह के केस को लड़ने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी के सामने आने से भाजपा को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है यह सब उस समय हो रहा है जब भाजपा देश में संप्रग सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगते हुए आपातकाल जैसी स्थितियों की बातें कर रही है और अडवाणी एक और रथ यात्रा निकालने के बारे में गहन मंथन करने में लगे हुए हैं. यह सही है कि वकील के तौर पर कोई भी व्यक्ति किसी का भी केस लड़ सकता है पर जिस तरह से जेठमलानी ने यह कहकर सबको चौंकाया कि जब स्टिंग ऑपरेशन भाजपा ने कराया तो नोटों की व्यवस्था भी उन्होंने ने ही की होगी तो उसके बाद भाजपा के लिए बहुत बड़ी शर्मिंदगी का मसला सामने आ गया. भाजपा ने इस मामले से केवल यह कहकर पीछा छुड़ाने का प्रयास किया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए कोई राय नहीं दी जा सकती है. जैसा कि नेता हमेशा ही कहते हैं जेठमलानी ने भी बाद में यह कह दिया कि उनके कहने का मतलब वह नहीं था जो लगाया गया है ? 
   अब यह बात तो कोर्ट में भी स्पष्ट हो रही है कि सरकार ने इस तरह का कोई प्रयास नहीं किया था और भाजपा ने ही यह साबित करने की कोशिश की थी कि सरकार को बचाने में कुछ लोग सक्रिय है जो किसी भी हद तक जा सकते हैं यह सब भाजपा उस समय कर रही थी जब मनमोहन सिंह ने स्पष्ट कर दिया था कि अब सरकार रहे या जाये परमाणु विधेयक को पास करने का प्रयास किया जायेगा क्योंकि यह देश हित में है और उनके कथन के बाद यह बिल पास भी हो गया था पर भाजपा को यह लग रहा था कि इसमें पैसे खिलाये जा रहे हैं ? यह सही है कि सरकारें बचाने के लिए समय समय पर राजनैतिक दल घटिया हरकतें करने से बाज़ नहीं आते हैं खुद भाजपा ने यूपी में दलबदल करके आने वाले पूरे पूरे धड़ों को मंत्री बनाकर मंत्रियों का शतक लगा दिया था तब यह क्या था ? ये मंत्री कितने वर्षों तक इस तरह से अनुचित लाभ उठाते रहे इसका किसी ने हिसाब दिया ? यह सब भारतीय राजनीति में इतना गहरे तक घुस चुका है जिस कारण कहीं से भी कोई इस तरह की घटना हमेशा ही सुनाई देती रहती है.
   राजनीति में आज शुचिता की जगह ही नहीं बची है कोई कितनी भी बड़ी बड़ी बातें कर ले पर जब उसके इतिहास को खंगाला जाता है तो हर जगह केवल नाम ही बदल जाते हैं और भ्रष्टाचार करने का तरीका भी बदल जाता है पर इस तरह की अनैतिक क्रिया बंद नहीं होती है. बात यहाँ पर किसी भी राजनैतिक दल या समूह की नहीं है बल्कि पूरे देश के राजनैतिक तंत्र की है कुछ दल ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे उनके जैसा पवित्र कोई और है ही नहीं पर जब उनके काम जनता के सामने आते हैं तो उनकी बोलती बंद हो जाती है. अच्छा ही है कि अन्ना ने देश के चुनावों वाले राज्यों में भ्रमण करने की योजना बनाई है जिससे जनता को वोट देते समय यह याद भी रहेगा कि किस तरह से भ्रष्ट लोगों को सत्ता से बाहर करना है और सही लोगों को चुनकर देश का भविष्य सुधारने के लिए आगे बढ़ाना है ? अब यह जनता पर है कि वह सभी दलों की इस तरह की अनैतिक हरकतों पर नज़र रखें और समय आने पर इन्हें सबक सिखाने से भी नहीं चूके जिससे सभी दलों और नेताओं को यह पता चल जाये कि अब जनता ने ५ साल तक सोना छोड़ दिया है.
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