मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 5 October 2011

अफ़गानिस्तान और भारत

    भारत यात्रा पर आये अफ़गानी राष्ट्रपति हामिद करज़ई की यह यात्रा कई मायनों में सफल कही जा सकती है क्योंकि आज जिस तरह से दक्षिण एशिया में आतंक ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है और इसके लिए पूरी तरह से ज़िम्मेदार पाकिस्तान इन दोनों देशों के बीच पड़ता है तो इससे भी करज़ई की इस यात्रा का महत्त्व और बढ़ जाता है. यह सही है कि भारत शुरू से ही अफ़गानिस्तान के अच्छे मित्रों में शामिल रहा है जिसके कारण वहां की जनता में भारत की छवि एक मित्र देश के रूप में अधिक है. आज भी वहां पर भारतीय वस्तुओं की उपलब्धता कम होने के बाद भी लोग इन्हें ही खरीदना पसंद करते है और भारतीय फिल्मों का यहाँ पर भी पूरा असर दिखाई देता है. शांति काल में भारत और अफ़गानिस्तान को एक दूसरे कई जितनी ज़रुरत थी उससे कहीं आज है क्योंकि पाक अपने नापाक इरादों से बाज़ नहीं आने वाला है और साथ ही वह पूरी दुनिया से इस्लाम के नाम पर जो चंदा पाता है उसका अधिकांश हिस्सा वह कल्याणकारी योजनाओं या मुसलमानों के उत्थान में करने के स्थान पर केवल आतंकियों को बढ़ावा देने में ही लगाता रहता है.
        भारत ने तालिबान के पतन के बाद से ही अफ़गानिस्तान को हर संभव सहायता दी है और अब वह सामरिक और रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग करने के लिए आगे बढ़ रहा है. जिस तरह से तालिबान ने पूरे अफ़गानी तंत्र का खत्म कर दिया था आज भी उसे पूरी तरह से खड़ा नहीं किया जा सका है आज अफ़गानिस्तान में सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है क्योंकि तालिबान और पाक में पोषण पाने वाले अन्य आतंकी इस बात पर तैयार बैठे हैं कि अफ़गानिस्तान में करज़ई की पकड़ कमज़ोर होते ही वे फिर से सत्ता पर कब्ज़ा कर लें ? ऐसे में भारत ने जिस तरह से वहां की सेना और सुरक्षा बलों को प्रशिक्षित करने की बात कही है वह पूरे क्षेत्र के लिए अच्छी होगी क्योंकि यहाँ पर अमेरिका या अन्य देश जब भी रहते हैं तो उनके ख़िलाफ़ जनता को भड़काना आसान होता है जबकि भारत के ख़िलाफ़ इस तरह के आरोप नहीं लगाये जा सकते है क्योंकि आम अफ़गानी भारत से अपने पुराने रिश्ते आज भी मानता है. यह बात करज़ई भी जानते हैं पर उन्हें अपने यहाँ पुनर्निर्माण में भ्रष्टाचार को पूरी तरह से पछाड़ना होगा वरना जनता इस व्यवस्था से ऊब कर फिर से तालिबान के चंगुल में जा सकता है.
  अफ़गानिस्तान में किसी भी सरकार का पूरा नियंत्रण न होने के कारण वहां पर नशीले पदार्थों की अवैध खेती और उनकी बिक्री का कारोबार भी आतंकियों को आर्थिक सहायता पहुँचाने में काफी मदद करता है जिस कारण से वहां के युवाओं में इस तरह के नशे की आदत भी बढ़ती जा रही है. भारत ने वास्तव में अफ़गानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए जो कुछ भी करना शुरू किया है वह पूरे क्षेत्र के लिए अच्छा है. आज चीन भी यही चाहता है कि पाक किसी न किसी कारण या भय से उसके समीप आता चला जाये जो कि चीन के वर्तमान आर्थिक हितों को सुहाता भी है पर पाक यह भूल जाता है कि चीन अपना काम बन जाने पर किसी को भी नहीं पूछता है. अब भारत और अफ़गानिस्तान के नज़दीक आने से पाक चीन भी इस बारे में कुछ अवश्य सोचना शुरू कर देंगें. भारत वहां पर केवल हितों को साधने के लिए नहीं बल्कि इस पूरे क्षेत्र में वास्तविक खुशहाली लाने के लिए प्रयासरत है जबकि पर अपने पुराने राग को अलापने में ही लगा हुआ है.  
       

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