मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 29 January 2012

मतदान और मणिपुर


     मणिपुर में कल हुए चुनाव में जिस तरह से छुटपुट हिंसा के बीच ८२ % मतदान की ख़बर आई है वह निश्चित तौर पर अच्छी है क्योंकि आज जब चुनाव आयोग हर स्थिति में वोट प्रतिशत बढाने की कोशिशों में लगा हुआ है तो उसमें इतने वोट पड़ना ही महत्वपूर्ण है. मणिपुर जिस तरह से आतंकियों से प्रभावित क्षेत्र रहा है और वहां पर जिस तरह से दुर्गम इलाके भी हैं उनमें मतदान का इतना प्रतिशत वास्तव में आयोग के साथ पूरे देश लिए अच्छी ख़बर है. आज आयोग हर तरह से इस बात का प्रयास कर रहा है की किसी भी तरह से अधिक से अधिक मतदाता आगे आकर चुनाव में अपने मनपसंद प्रत्याशी को वोट दें क्योंकि पिछले कुछ चुनावों में मतदाताओं की उदासीनता के कारण कम वोट पड़ते हैं और इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि जो अपने वोट किसी भी प्रकार डलवा लेते है वे जीत जाते हैं और उसके कारण देश को अच्छे राजनेता भी नहीं मिल पाते हैं और जो प्रत्याशी हिम्मत करके सामने आते भी है उनको वोट देने वाले घरों में बैठे रहते हैं. 
     आज हर देशवासी का यह कर्त्तव्य है कि वह मतदान के दिन घर से निकले और देश के भविष्य के लिए अच्छे प्रत्याशी को वोट देने का प्रयास करे क्योंकि जिस तरह से राजनीति में असामाजिक तत्व हावी होते जा रहे हैं उसके बाद किसी के लिए भी यह सोचना और कहना मुश्किल है कि बिना मत दिए देश की इस दशा को कैसे सुधार जाये ? आज इस तरह के असामाजिक तत्व अगर संसद और विधान मंडलों में जगह बना पाने में सफल हो रहे हैं तो उसके पीछे आम मतदाता ही अधिक ज़िम्मेदार है क्योंकि अब आयोग द्वारा इस बात की पूरी व्यवस्था की जाने लगी है कि पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान ही हो जिससे किसी को भी अपने मत का प्रयोग करने में कोई परेशानी न हो. आयोग द्वारा असामाजिक तत्वों को रोकने के लिए जो भी कदम उठाये जाते हैं उनसे आम लोगों को भी परेशानी होती है अपर देश के लिए अच्छे लोगों को चुनने के लिए एक दिन की यह परेशानी कोई मायने नहीं रखती है. आज जिस तरह से बाहुबलियों के दुर्ग में आयोग द्वारा सुरक्षा का एहसास जगाया जाता है उससे आम लोगों में वोट देने का साहस आता है.
     देश तभी आगे बढ़ सकेगा जब चुनाव के समय आम मतदाता घरों से बाहर निकल कर अपने और देश के लिए अच्छे प्रत्याशी को चुनेगा और आयोग ने अब इस बात की पूरी व्यवस्था कर ली है कि किसी भी तरह से किसी को भी मत देने से कोई भी रोक न सके तो अब यह हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम भी आगे बढ़कर देश का भविष्य चुनने में पूरी कोशिश करें क्योंकि जब तक आम नागरिक वोटर के रूप में जागरूक होकर अपने कर्तव्य को नहीं समझेगा तब तक किसी भी दशा में इस स्थिति को बदला नहीं जा सकेगा क्योंकि आयोग जो कुछ भी कर सकता था उसने कर दिया है और अब उसने यह ज़िम्मेदारी आम वोटरों पर दाल दी है कि वे अपने कर्तव्य को समझें और आगे आकर देश के लिए मत दें. आनेवाले समय में यह स्थिति अब केवल अच्छे मतदान प्रतिशत से ही बदली जा सकती है क्योंकि बिना इसके अब देश में कुछ भी ठीक नहीं होने वाला है.  
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

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