मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 3 December 2012

मोबाइल कनेक्शन और सख्ती

                  ९ नवम्बर १२ से लागू हुए ग्राहक पहचान सम्बन्धी नियमों के कारण जहाँ एक तरफ़ नया सिम खरीदने वाले ग्राहकों को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है वहीं अच्छी और बेहतर ग्रहक सेवा देने का दावा करने वाली निजी मोबाइल कम्पनियों के दावे की भी पोल पट्टी खुलती जा रही है. अभी तक पहले से ही चालू किये गए सिम कार्ड बाज़ार में उपलब्ध रहते थे जो कि ग्राहक की पहचान आदि जमा करवाने के बाद काफ़ी ढीली ढाली व्यवस्था के तहत चलते रहते थे. आम ग्राहक इस बात से आज भी अनजान है कि उसके नाम से कहाँ और किस कम्पनी में कितने सिम चल रहे हैं. एक तरफ़ यह पूरी तरह से ग़ैर कानूनी है और साथ देश के किसी भी नागरिक को किसी बड़ी समस्या में फँसाने का काम भी कर सकता है. आम उपभोक्ता से जिस तरह से अभी तक पहचान पत्र आदि की जानकारी ली जाती थी उसे संभाल कर रखने के स्थान पर छोटे विक्रेता किसी और के हाथ बेच देते थे जिनका दुरूपयोग अन्य कम्पनियों के सिम एक्टिवेट करवाने में किया जाता था. इस तरह की व्यवस्था में आख़िर कौन उपभोक्ता अपने को सुरक्षित महसूस कर सकता है ?
         कोर्ट के आदेश के बाद सिम एक्टिवेशन की जो नयी प्रक्रिया शुरू की गयी है उसकी भारत में बहुत दिनों से आवश्यकता थी क्योंकि हम लोग सिम खरीदने को जिस तरह से हलके पन में लेते हैं और अपनी पहचान के प्रति भी बहुत ही लापरवाह रहा करते हैं वह हमें कभी भी किसी बड़ी समस्या में उलझा सकती है. जब हम किसी भी नयी सेवा को प्राप्त करने के लिए अन्य जगहों पर अपनी सही पहचान देते हैं और निर्धारित कागज़ों के सत्यापन तक इंतज़ार करते हैं तो इस परिस्थिति में इतने उतावले पन की क्या आवश्यकता है ? किसी भी व्यक्ति के लिए मोबाइल सेवा में जाने के लिए एक ग्राहक जानकारी सेवा भी शुरू की जा सकती है जिसमें हर के मोबाइल धारक की पूरी जानकारी उसी तरह से रखी जाये जैसे बैंक रखा करते हैं और एक बार ग्राहक पहचान संख्या मिल जाने के बाद उपभोक्ता को यह छूट भी मिलनी चाहिए कि वह केवल उसी संख्या का उपयोग करके किसी भी नयी कम्पनी का सिम खरीद सके. ग्राहकों की यह पहचान एक जगह पर सरकार या ट्राई के नियंत्रण में रखी जानी चाहिए जिससे हर बार देश के किसी भी नए सर्कल में सिम खरीदते समय होने वाली परेशानी से आम लोग बच सकें और मोबाइल कम्पनियां भी अपना काम ढंग से कर सकें.
                आज इस नयी प्रक्रिया के शुरू होने में जो समस्या सामने आ रही हैं उससे देश की सुरक्षा के साथ आम उपभोक्ता की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी क्योंकि अभी तक पहले से ही चालू सिम से कोई ग़ैर कानूनी काम करने पर पुलिस सबसे पहले सिम कार्ड के धारक तक उसी पते से पहुँचती है जो कम्पनी में दर्ज होता है. पर अब इस तरह की व्यवस्था में फर्जी सिम की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी और किसी भी तरह मोबाइल कम्पनियां इस प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं कर पाएंगीं क्योंकि अभी तक वे फ़र्ज़ी सिम के सहारे अपने ग्राहकों की संख्या को बढ़-चढ़कर बताया करती हैं पर अब यह पूरी तरह से पारदर्शी हो जाने वाला है. बहुत बार नयी योजनाओं के कारण भी लोग इन नए सिमों को खरीद कर उसकी सुविधा का लाभ उठाकर फ़ेंक दिया करते थे. सभी मोबाइल कम्पनियाँ इस तरह के गोरख धंधे में लगी हुई हैं जिस कारण से भी असली उपभोक्ताओं की पहचान नहीं हो पाती है. नियमों का बिना मतलब ही उल्लंघन करने वाली आम भारतीय मानसिकता से इस तरह के कड़े नियमों के सहारे ही निपटा जा सकता है. सरकार को किसी भी परिस्थिति में इन नियमों में कोई छूट नहीं देनी चाहिए और आम लोगों और मोबाइल कम्पनियों को इस प्रक्रिया की आदत बना ही लेनी चाहिए.     
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