मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 8 December 2012

सारे बैंक हमारे

                  एनईऍफ़टी द्वारा बैंकों से धन का हस्तांतरण पहले ही बहुत आसान हो चुका है अब इस कड़ी में सरकार और रिज़र्व बैंक ने मिलकर पूरे देश में किसी भी शाखा में किसी भी शाखा का पैसा जमा कराने की सुविधा भी दे दी है जिससे कोई भी खाताधारक देश के किसी भी हिस्से में होने के बाद भी अपनी मूल शाखा वाले खाते में किसी भी बैंक से धन जमा करा सकता है. अभी तक इस सुविधा के द्वारा धन हस्तांतरण की सुविधा उपलब्ध थी पर लोगों को जानकारी न होने के कारण लोग आज भी अपने घरों से दूर होने पर पैसे जमा करवाने के लिए मूल बैंक की शाखा तक जाते हैं जिससे कई बार उन्हें लम्बी लम्बी लाइनों का सामना करना पड़ता है और उनका समय भी इस तरह से नष्ट होता रहता है. धन हस्तांतरण के मामले में सरकार द्वारा जिस तरह से इतनी सुविधाएँ उपलब्ध करायी जा रही हैं अभी तक उनके बारे में लोगों में जागरूकता का बहुत अभाव है जिससे भी कई बार बैंकों में अनावश्यक रूप से भीड़ जमा होती रहती है और बैंकिंग के सामान्य काम काज पर प्रभाव पड़ता रहता है. देश में शिक्षा का जो स्तर है उसमें यह बात तो सभी जानते हैं कि आज भी बैंकों में काम करवाना आम लोगों के बस की बात नहीं है.
              इस प्रक्रिया में कोई भी ग्राहक देश के किसी भी हिस्से के बैंक में जाकर एक एनईऍफ़टी फॉर्म भरकर अपने धन का हस्तांतरण अपने खाते में कर सकता है जो कि दो घंटो में उसके खाते में पहुँच जायेगा. इसके लिए इस फॉर्म में मूल बैंक का नाम, खाता संख्या, खाता धारक का नाम और बैंक का आईऍफ़सी कोड भरकर धनराशि जमा करवानी होगी जिससे धन उसकी मूल शाखा वाले खाते तक पहुँच जायेगा और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि भी नहीं रहेगी. इतने सारे विवरण भरने के बाद पैसा भेजने से पहले बैंक खाताधारक का नाम और बैंक की शाखा के बारे में पूरी जानकारी चेक कर लेते हैं जिससे किसी भी परिस्थिति में कोई गड़बड़ी न होने पाए फिर भी उपभोक्ता को अपने फॉर्म को भरते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए. इस तरह के सुरक्षित धन हस्तांतरण के लिए दस हज़ार के लिए ३ रूपये और पचास हज़ार तक के लिए ६ रूपये का मामूली शुल्क ग्राहक से वसूल जायेगा. पूरी प्रक्रिया के बारे में जिस तरह से ग्राहकों को जागरुक किया जाना चाहिए वह अभी तक नहीं हो पा रहा है जिससे भी ग्राहक जानकारी के अभाव में अपनी मूल शाखा वाले बैंक की शाखाएं दूसरे शहरों में ढूंढते रहते हैं.   
               बैंकों के लिए इस तरह के काम आसान करने के लिए भी सरकार को जिस तरह से कुशल लोगों की उपलब्धता करनी चाहिए वह अभी तक नहीं हो पा रही है जिससे भी कई बार लोगों के काम उतनी आसानी से नहीं हो पाते हैं जितनी आसानी से हो जाने चाहिए. नयी सुविधाएँ देना तो बहुत आसान है पर खातों की संख्या के अनुसार बैंक में कर्मचारियों का होना भी उतना ही आवश्यक है जिससे यह सभी काम सुचारू ढंग से किये जा सकें. अभी तक जितने भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं उने पास काम का इतना अधिक बोझ है कि वे चाहकर भी सामान्य बैंकिंग नहीं कर पाते हैं. सरकार को बैंकिंग क्षेत्र में सुधार करने के बारे सोचना चाहिए और नयी शाखाएं खोलने के स्थान पर मजबूरी वाली बैंकिंग कर रहे सहकारी बैंकों में सीबीएस प्रणाली लागू करवाने के प्रयास तेज़ी से करने चहिये जिससे वे भी बैंकों पर पड़ने वाले अनावश्यक बोझ को कम करना का काम कर सकें. यदि संभव हो तो देश जिला सहकारी बैंकों का विलय बेहतर परिचालन के लिए राज्य स्तरीय सहकारी बैंक में कर दिया जाए जिससे कम संसाधनों के साथ ही बेहतर ढंग काम किया जा सके. ग्रामीण बैंकों के विलय से प्रदेश स्तर पर उनके परिचालन में बहुत सुधार आया है  तो कुछ उसी तरह के पायलट प्रोजेक्ट बनाकर सहाकरी बांको में भी बेहतर कार्य संस्कृति लाने का काम किया जाना चाहिए.
       
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