मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 13 February 2013

हेलीकाप्टर खरीद घोटाला ?

                                              इटली की सरकारी रक्षा कम्पनी के अधिकारी को रिश्वत देने के आरोपों में गिरफ्तार किये जाने के बाद से एक बार फिर से देश के सामने वही समस्या उठ खड़ी हुई है जिसके बारे में काफी समय से विचार किये जाने की ज़रुरत महसूस की जा रही है. पूरी दुनिया में जिस तरह से रक्षा सौदों को पूरा करने के लिए रक्षा उपकरण निर्माता कम्पनियों ने अपने प्रतिनिधि तैनात कर रखे हैं उनके रहते आख़िर कोई भी खरीद दलाली या कमीशन से बची हुई कैसे रह सकती है ? इटली की कम्पनी द्वारा भारत से हेलीकाप्टर सौदा पक्का करने के आरोप में जिस तरह से वहां पर एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है उसके बाद भारत सरकार ने इटली सरकार से जानकारी मांगी है और इस सौदे में घोटाले के आरोपों के सामने आने के बाद से ही जिस तरह से पिछले वर्ष अप्रैल और अक्टूबर में भारत सरकार ने दो बार इटली से जानकारी मांगी है उसके बाद इटली सरकार ने यह जवाब दिया कि मामला न्यायिक रूप से चल रहा है इसलिए इसके बारे में और जानकारी साझा नहीं की जा सकती है. इस परिस्थिति में देश की राजनैतिक स्थिति को देखते हुए सरकार ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से करने के निर्देश दे दिए हैं पर जाँच की पुरानी परिस्थितियों को देखते हुए विपक्ष द्वारा इस मसले पर पूरा हल्ला मचाकर सरकार को घेरा जायेगा.
                                               पुराने रक्षा सौदों से इस बार केवल इतनी अच्छी बात हुई है कि इस सौदे में पारदर्शिता समझौता भी किया गया था जिसके नियमों के अनुसार यदि खरीद में किसी भी स्तर पर किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो उस स्थिति में पूरे सौदे को रद्द कर दिया जायेगा. यदि इसके बाद भी कम्पनी के स्तर पर कुछ ऐसा किया गया है जो इस समझौते के मानकों का उल्लंघन करता है तो पूरा सौदा ही रद्द कर दिया जायेगा. पहली बार किसी रक्षा सौदे में सरकार की तरफ से इस तरह के उपाय किये गए हैं जिनका समर्थन किया जाना चाहिए पर अभी भी जिन परिस्थितियों में रक्षा सौदों में दलाली होती है उनसे पूरी तरह से पार पाने की भी ज़रुरत है और भारत को अपनी नीतियों में पूरी पारदर्शिता के साथ सख्ती भी बरतने के बारे में विचार करने की ज़रुरत है. क्या कारण है कि बोफोर्स के इतने वर्षों बाद भी विश्व के सबसे तेज़ी से आगे बढ़ते हुए लोकतंत्र के पास आज भी ऐसी नीतियां नहीं है जिनके माध्यम से वह अपनी रक्षा ज़रूरतों को पूरा कर सके. बोफोर्स तोपों ने कारगिल युद्ध के समय अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था पर उसकी खरीद में जो कुछ हुआ था उससे उस पर दाग भी लगे थे जो आज तक मैले नहीं पड़े हैं.
                                              कारगिल के समय भी ताबूत घोटाले का ज़िक्र होना शुरू हुआ था पर उसमें भी कुछ नहीं मिल सका जब सभी जानते हैं तो रक्षा सौदों में दलाली आम बात है तो फिर आख़िर क्यों नहीं देश में ऐसी नीतियां बनायीं जाती हैं जिनके माध्यम से आने वाले समय में की जाने वाली किसी भी खरीद को पूरी तरह से पारदर्शी रखा जा सके ? जिस तरह से पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एस पी त्यागी का नाम इस घोटाले में सामने आ रहा है उसकी भी जांच होगी पर बिना किसी सही सबूत के जब हम किसी भी सौदे पर इस तरह से ऊँगली उठाना शुरू कर देंगें और अपनी नीतियों में सही तरीके से बदलाव नहीं करेंगें तो आने वाले समय में पूरे देश का सुरक्षा परिदृश्य ही खतरे में पड़ सकता है ? बोफोर्स के बाद से कम से कम सभी दल किसी न किसी रूप में सत्ता का स्वाद चख चुके हैं भले ही वे सरकार में शामिल रहे हों या फिर उसका समर्थन कर रहे हों पर आज तक एक मज़बूत रक्षा नीति को अंतिम रूप क्यों नहीं दिया जा सका है ? क्या कारण है कि सत्ता में होने पर हमारे नेता सब भूल जाते हैं और विपक्ष में होने पर ही उन्हें देश की चिंता सताती है अब इस तरह की घटिया राजनीति से बाहर निकलकर देश के लिए नयी रक्षा खरीद नीति बनाई जाए और सरकार तथा विपक्ष इसे अविलम्ब पूरा करे जिससे आने वाले समय में देश की रक्षा ज़रूरतें पूरी होती रहें और घोटालों की भी संभावनाएं न रहें.    
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

3 comments:

  1. लाली मेरे लाल की, यह इटली सरकार ।
    नहीं पचा पाई कुटिल, मामा को धिक्कार ।
    मामा को धिक्कार, दुष्ट-त्यागी को खोजो ।
    चापर चॉपर करे, पकड़ लो शामिल जो जो ।
    करूँ नहीं विश्वास, तेज इसकी बिकवाली ।
    हैं चुनाव अब पास, मांगते लोग दलाली ।।

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  3. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त
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