मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Thursday, 12 September 2013

बालिका अधिकार और कानून

                                    यूपी के फ़र्रुखाबाद से जिस तरह से काम उम्र की लड़कियों को हार्मोन के इंजेक्शन देकर काम उन्हें समय से पूर्व ही बड़ा किये जाने और उनसे वेश्यावृत्ति कराये जाने की घटना प्रकाश में आई है उससे यही लगता है कि अब समाज में उतनी भी मर्यादा नहीं रह गयी है जिसके अपेक्षा की जाती है हम किया करते हैं । पूरी घटना के बारे में जिस तरह से २०१२ से ही समस्या पर ध्यान दिलाये जाने का प्रयास किया जा रहा है जिसमें एक बालिकाओं के लिये संचालित कथित विश्वविद्यालय में ही उनके साथ इस तरह के गलत और अमानवीय काम किये जा रहे हैं और उस समय तत्कालीन डीएम द्वारा भी जांच के आदेश जारी किये गए थे पर यह काम करने वाले लोगों की पहुँच इतनी ऊंचे तक थी की छापा मारने के बाद की कार्यवाही करने से पहले ही डीएम का ट्रांसफर करवा कर उन्होंने उसका परिचय दे दिया था. इस पूरे मकसद में वे दरिन्दे भले ही अपने मकसद में कामयाब हो गए हों पर आज भी उन लड़कियों के बारे में कुछ नहीं किया जा सका है. जब पूरा मामला उखड़ जाता है तो सरकार और मानवाधिकार के साथ महिला आयोग के लोग भी आगे बढ़कर चिल्लाना शुरू कर देते हैं जिससे भी समस्या से सभी का ध्यान बाँट जाता है और ऐसा काम करने वाले राक्षस आसानी से बच निकलते हैं.
                         मामले में जिस तरह की संवेदनशीलता राज्य सरकार को दिखानी चाहिए थी उसमें वह पूरी तरह से विफल रही है और वहां प़र तैनात वर्तमान डीएम ने जिस तरह से पूरे मामले से अनभिज्ञता ज़ाहिर की है उससे भी यही पता चलता है कि उन दरिंदों की पहुँच कहाँ तक है ? जब पिछली डीएम द्वारा छापेमारी की कार्यवाही पूरी करने तक मामला पहुँचाया जा चुका था तो किन कारकों और किन परिस्थितियों ने इतने महत्वपूर्ण मसले पर वर्तमान डीएम को यह भनक तक नहीं लगने दी या फिर डीएम सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनने का प्रयास कर रहे हैं ? जब कोई व्यक्ति किसी संस्था विशेष में इस तरह के अमानवीय कृत्यों के सञ्चालन की जानकारी दे रहा है तो डीएम को उन आरोपों की जांच करनी चाहिए न की उनके बारे में इतना भोला बन चाहिए कि जैसे उन्हें कुछ पता ही नहीं है ? सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इस पूरे प्रकरण में उडीसा झारखण्ड और छत्तीसगढ़ की उन लड़कियों को लाया जाता है जिन्हें संभवतः धन की कमी या किसी अन्य कारणों से बेच दिया जाता है जो कि बहुत शर्मनाक है.
                               अब इस मसले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग के साथ बाल विकास से जुड़े लोगों को भी आगे आकर कार्यवाही के लिए दबाव बनाना चाहिए क्योंकि जब तक पूरे मामले की तह में नहीं जाया जायेगा तब तक असली दोषियों को पकड़ने में सफलता नहीं मिल पायेगी जिससे भी देश के अन्य हिस्सों में चल रहा इस तरह का अनैतिक काम बंद नहीं किया जा सकेगा ? पूरे देश में लड़कियों को इस तरह से खरीदे बेचे जाने पर काफी लम्बे समय से कानून बने हुए हैं और उन पर किस तरह से अमल किया जाता है यह इस मसले से स्पष्ट ही हो चुका है कि यदि कोई प्रभावशाली व्यक्ति इस तरह के काम में लगा हुआ है तो वह अपने काम को बेधड़क होकर चलाता रह सकता है क्योंकि नेताओं से सांठ गांठ होने के कारण अधिकारी उनका कुछ भी नहीं बिगड़ सकते हैं ? अब समाज को स्वयं ही आगे बढ़कर कुछ सोचना होगा और अपने आस पास की गतिविधियों पर ध्यान रखने की आदत बनानी होगी तभी आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने में सफलता मिल पायेगी. फिलहाल तो वे निर्दोष लड़कियां इस नर्क से खुली दुनिया में सांस लेने के लिये प्रतीक्षारत हैं। 

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