मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 29 July 2014

गूगल मैप्स और सुरक्षा

                                                                   देश के कानूनों को धता बताते हुए कोई बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कम्पनी किस तरह से प्रतियोगिता के बहाने संवेदनशील जानकारियों को जुटाने की कोशिशें कर सकती है इसका ताज़ा उदाहरण पिछले वर्ष भारत में आयोजित गूगल मैपाथॉन से मिल जाता है. दिल्ली पुलिस ने इस प्रतियोगिता के बारे में गृह मंत्रालय के आधीन काम करने वाले संगठन सर्वे ऑफ़ इंडिया की शिकायत पर जांच शुरू की तो उसे पता चला कि गूगल ने बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन भी किया है और देश के कई संवेदनशील स्थानों की मैपिंग भी करा ली है. संभवतः खुद गूगल द्वारा अपने स्तर पर कुछ भी कर पाना संभव नहीं था इसीलिए उसने इसे एक प्रतियोगिता का रूप तो दिया पर प्रतिभागियों को भारतीय कानूनों के बारे में कुछ भी नहीं बताया जिससे उन्होंने अनजाने में ही देश के संवेदनशील स्थानों के बारे में जानकारियां साझा भी कर दीं.
                                                                   कानूनी रूप से देश में किसी भी तरह के मैप्स को बनाने के लिए केवल सरकार की तरफ से सर्वे ऑफ़ इंडिया को ही इस बात की अनुमति है और यदि कोई अन्य कम्पनी या एजेंसी इस तरह एक किसी मैप्स को अपनी सुविधा के लिए बनाना चाहती है तो उसे आधिकारिक रूप से अनुमति लेने की आावश्यकता है. गूगल ने इस बारे में खुले तौर पर कानून का उल्लंघन भी किया और मांगे जाने पर जब उसने मैप्स को साझा किया तो उसमें सभी तरह के स्थानों की मैपिंग किये जाने का मामले सामने आया. इसकी औपचरिक शिकायत दिल्ली पुलिस से की गयी और प्रारंभिक जांच में यह सब शिकायतें सही भी पायी गयीं मामले के ओर देश में फैले होने के कारण दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्रालय से विचार कर इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया और अब सीबीआई द्वारा जांच के लिए रिपोर्ट दर्ज़ कर ली गयी है जिससे संभवतः पूरा मामले सामने आने की आशा भी है.
                                                        इस मामले में गूगल इंडिया के अधिकारियों का रवैया बड़ा ही अजीब रहा क्योंकि मैप्स जैसे संवेदनशील मुद्दे पर प्रतियोगिता आयोजित कराते समय उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि इसके लिए भारतीय कानूनों के बारे में भी कुछ जाना जाये और प्रतिभागियों को भी इस तरह के कानून की जानकारी दी जाये ? अब इस परिस्थिति में जिन प्रतिभागियों ने संवेदनशील स्थानों की जानकारी अनजाने में या कुछ ने जानबूझकर भी साझा कर दी हैं तो उससे देश के इन प्रतिष्ठानों के बारे में तो सब कुछ खुल ही गया है. अब कानून के अनुसार गूगल को इसके लिए दोषी माना जाना चाहिए और किसी भी प्रतियोगी को बिना उसका पिछला रिकॉर्ड चेक किये किसी भी तरह से सजा देने के प्रयास भी नहीं किये जाने चाहिए. इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाना चाहिए जिससे गूगल और अन्य अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों को यह सन्देश भेजा जा सके कि इस तरह से भारतीय कानूनों का उल्लंघन करने पर उनके साथ क्या कुछ हो सकता है. जनता के रूप में नेट पर सक्रिय लोगों को कुछ भी साझा करने से पहले यह भी सोचना चाहिए कि आखिर वे इस तरह की जानकारी साझा कर किसकी मदद कर रहे हैं ?      
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