मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 17 November 2009

परमाणु प्रतिष्ठानों में हाई अलर्ट

भारत पर संगठित हमला करने के खुलासे के बाद इस रहस्य की रोज़ ही नई कड़ी सामने आ रही है। ख़ुफ़िया रिपोर्टों के अनुसार देश के परमाणु केन्द्र आतंकी हमले का शिकार हो सकते हैं। इन सूचनाओं के आते ही केन्द्र ने सभी राज्यों को परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कड़ी करने और विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दे दिए हैं। आज के समय में जब खतरा बहुत बढ़ गया है तो हम देश वासियों को आतंकियों से निपटने में महारत हासिल करनी होगी जिससे कभी भी ज़रूरत पड़ने पर हम प्रशासन और पुलिस की सहायता कर सकें। यह देश हमारा है और इसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हमारी भी है हम केवल यह कह कर बच नहीं सकते कि पुलिस और अर्ध-सैनिक बल ही इससे निपट सकते हैं। आतंकी हमलों में सबसे पहले तो सुरक्षा कर्मियों पर बन आती है और मारे जाने वालों में अधिकांश हमारे बीच के लोग ही होते हैं। क्यों नहीं हम अपने आस-पास कि गतिविधियों पर नज़र रखते है ? आतंकी जिस धर्म को मानने वाले होते हैं वे उस धर्म के अनुयायियों के लिए ही सबसे बड़ा खतरा होते हैं। पंजाब में आतंक के चरम के समय हम सभी देख चुके हैं कि किस तरह से देश भक्त और जीवंत सिख समुदाय पर ही प्रश्न चिन्ह लग गया था ? जब आम पंजाबी ने यह समझ लिया कि ये आतंकी अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं तो वहां से आतंक के पैर उखड़ गए। ठीक वही हालत आज मुस्लिम समाज के साथ है, बहुत से लोग कहते हैं कि उन्हें केवल मुस्लिम होने के कारण आतंकियों से जोड़ दिया जाता है। ऐसा कुछ हद तक होता भी है पर क्या किसी के पास इस बात का उत्तर है कि ये इस्लामी आतंकी कैसे और किसके कहने पर देश के मुस्लिम बहुल इलाकों में ही शरण पाते रहते हैं ? जब तक इस तरह की शरण बंद नहीं होगी तब तक मुस्लिम समाज भी निशाने पर अपने आप ही रहेगा। कश्मीर में जबसे जनता ने अपना पीछा इन आतंकियों से छुड़ा लिया है तब से वहां की फिजां में भी बदलाव कि खुशबू भर गई है। आज भी समय है कि हम सभी अपने आस-पास की गतिविधियों पर नज़र रखें। सरकार को पुलिस को निर्देश देना चाहिए कि समाज के संभ्रांत लोगों की एक समिति हर गली मोहल्ले में बनाई जाए और उसके काम काज पर नज़र रखी जाए। छोटे स्तर से आने वाली सूचनाएँ ख़ुफ़िया तंत्र को मज़बूत ही करेंगीं। पर क्या कोई इस बारे में सोच रहा है ?

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

1 comment:

  1. सोच तो रहे ही होंगे..कितना फलदायी होगा, कहना मुश्किल है!!

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