मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 21 December 2009

वोट देना अनिवार्य क्यों नहीं ?

स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान को अनिवार्य घोषित करने के लिए गुजरात में जो प्रयास किये जा रहे हैं वे सराहनीय हैं। देश में जनता का जिस तरह से नेताओं और पार्टियों से मोह भंग हो रहा है उसे देखते हुए यह कदम बहुत आवश्यक था। अभी इसके परिणामों के बारे में तो कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी पर चुनाव के दिन घर पर छुट्टी मनाने वालों के लिए यह वास्तव में बहुत कष्टदायक होने वाला है। सबसे बड़ी बात यह है कि जनता ही जागरूक नहीं है अपने कर्तव्य के लिए तो फिर उसे कोई हक नहीं बनता है कि वो अपने अधिकारों की बात करे। देश में जो काम एक दो सालों में हो जाना चाहिए वह १५ साल में भी नहीं हो पाता क्योंकि उसको न करने पर जनता को दंड देने का कोई प्रावधान नहीं बनाया गया है जिसका नुकसान देश को ही होता है। नेता लोग हो सकता है कि इस तरह के कानून का विरोध करने पर उतर आयें क्योंकि वे नहीं चाहेगें कि समाज के सभी वर्ग के लोग वोट डालकर उनका सीमित वोटों में चलने वाला खेल बिगाड़ कर रख दें। कोई भी नेता सिर्फ अपने वोट डलवाने में ही विश्वास करता है किसी दूसरे के वोटों में उसे दिलचस्पी होगी भी क्यों ? उसे तो अपना उल्लू ही सीधा करना है बस वह अपने वोटों के पड़ जाने से हो जाता है। कायदे से वोट देने को अनिवार्य बना दिया जाना चाहिए जिससे सही प्रतिनिधि चुने जा सकें और बहुत कम वोट पाकर नेता चुनाव न जीतने पायें। क्यों नहीं देश के विकास में सभी का योगदान होना चाहिए ? कायदे से चुनाव को सीधे इन्टरनेट पर संचालित करना चाहिए और कहीं पर भी कई दिनों तक चुनाव होना चाहिए जब तक पूरी तरह से वोटिंग न हो जाये। आयोग को देखने के लिए एक दो स्थानों पर नेट से वोटिंग करनी चाहिए क्योंकि तब चुनाव के लिए बहुत अधिक बल की आवश्यकता भी नहीं होगी पर इसके लिए समय अधिक देना होगा। किसी छोटे राज्य गोवा आदि से इसकी शुरुवात की जा सकती है। फिल हाल यहाँ पर बात केवल अनिवार्य वोटिंग कि है इसलिए नेट वोटिंग पर बाद में अन्य पोस्ट में चर्चा की जाएगी। अभी इस कदम का स्वागत होना चाहिए और जल्दी ही इसका उपयोग पूरे देश में होना चाहिए।

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4 comments:

  1. अच्छा और उपयोगी सुझाव है!
    " इस कदम का स्वागत होना चाहिए और जल्दी ही इसका उपयोग पूरे देश में होना चाहिए।"

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  2. मैं अनिवार्य वोटिंग का विरोधी हूँ क्योंकि इससे अल्पसंख्यकों (मुख्यत: मुसलमानों) को कोई लाभ नहीं होगा। वे पहले से ही लगभग शत-प्रतिशत और थोकबन्द वोटिंग करते आ रहे हैं।

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  3. मोदी जी की इस पहल से कौंग्रेस और उसके वोट बैंक के बीना के तार बजने लगे है ! अगर पूरे देश ने ऐसी मांग कर दी और हर नागरिक को वोट डालना अनिवार्य कर दिया गया तो इनके वोट बैंक का एकाधिकार तो ख़त्म हो जाएगा ?

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  4. मोदी जी की यह पहल देश के हित में है इसे पूरे देश मे लागू किया जाना चाहिए। इस से जाति का समीकरण बनाने वालो को मुँह की खानी पड़ेगी। दलित और किसी मजहब विशेष को आधार बना कर राजनिति करने वालो पर भी अंकुश लगेगा।

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