मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

भारतीय नौसेना की ज़िम्मेदारी...

नौसेना प्रमुख के इस बयान का सभी देशों पर क्या असर होगा यह तो बाद में पता चलेगा पर भारत के शांति के लिए सदैव काम करते रहने की बात को उनके बयान से बहुत बल मिला है. प्रमुख निर्मल वर्मा ने यह कहा है कि भारत इस क्षेत्र में हेड मास्टर नहीं बनना चाहता है वह केवल अपनी भूमिका का सही इस्तेमाल कर शांति स्थापित करना चाहता है. अंडमान में चलने वाले १२ देशों के इस नौसैनिक अभ्यास का उद्देश्य केवल इस भाग को आपसी समझ को विकसित करना है इस बार के आयोजन का उद्देश्य इस सबसे बहुत बड़ा है क्योंकि ये सभी सेनाएं किसी प्राकृतिक आपदा के समय आपस में तालमेल करने पर खास तौर से विचार कर अभ्यास करने वाली हैं. सभी जानते हैं कि यह क्षेत्र भूकंप संवेदी है और साथ ही इस इलाके में समुद्री लुटेरों ने भी कई बार अपना प्रभाव जमाने का प्रयास किया है. यदि क्षेत्र कि सभी नौ सेनाएं मिलकर काम करने लगेंगी तो सूचनाओं का आदान प्रदान भी जल्दी हो सकेगा और सभी मिलकर यह के सुरक्षा घेरे को और मज़बूत भी कर पाएंगीं.
इस तरह के पहले अभ्यास में केवल ४ देशों ने ही भाग लिया था पर इस बार इस की उपयोगिता को समझते हुए १२ देशों ने अपनी सेना को भेजा है. भारत के इस प्रयास के महत्त्व को समझते हुए अमेरिका ने भी इसको मज़बूत करने की बात की है और साथ ही भारत से यहाँ कि सुरक्षा पर सहयोग के साथ उचित सहयोग करने पर भी ध्यान देने को कहा है. भारत अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है और जब इस तरह का कोई सहयोग पूरी तरह से विकसित हो जायेगा तो किसी के लिए इतने बड़े सुरक्षा घेरे को भेद पाना आसान नहीं होगा. हिंद महासागर के कुछ द्वीपों पर आतंकियों की भी नज़र है वे उन पर अपना प्रभाव जमाना चाहते हैं अभी हाल ही में मालदीव के बारे में एक रिपोर्ट आई है जिसमें उस पर आतंकियों की नज़रें पड़ने के बारे में आगाह भी किया गया है. आशा है कि भारत की इस भूमिका को समझते हुए सभी देश अपनी सुरक्षा के साथ पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आगे और अच्छे से मिलकर सहयोग करेंगें.

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