मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 24 February 2010

ममता की समता रेल

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि रेल मंत्री ममता बनर्जी जनता की सक्रिय राजनीति से जुडी हुई हैं तो इस बार के रेल बजट में मंहगाई के दबाव को देखते हुए भी किसी भी दर्जे के किराये में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव शायद ही उनकी तरफ़ से आये. भारतीय रेल बजट दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क का लेखा जोखा होता है और इतने बड़े नेटवर्क को भारत जैसे देश में चलाना ही अपने आप में एक चुनौती रहा है. आज के समय में हर स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार ने योजनाओं कि गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं.
              हर बार की तरह इस बार भी यह बजट जनता के लिए कुछ तोहफे लेकर आ सकता है पर आज सबसे बड़ी ज़रुरत इस बात की है कि देश के व्यस्ततम मार्गों पर शीघ्र ही कुछ किया जाये वरना बहुत जल्दी रेलवे के पास सवारियां होंगीं, डिब्बे होंगें, संसाधन होंगें पर उनके चलने के लिए पटरियां ही नहीं होंगीं. अभी तक उत्तर भारत के रेल मंत्रियों ने जिस तरह से रेलवे का विकास इधर ही किया है उसकी आवश्यकता भी थी क्योंकि देश की बहुत बड़ी आबादी इन्हीं राज्यों में रहती है. अगले १० वर्षों में रेल नेटवर्क को तेज़ी से बढ़ने की आवश्यकता है जिससे आने वाले समय की चुनौतियों को रेल आसानी से झेल सके. देश में बहुत सारे ऐसे उपेक्षित मार्ग भी पड़े हुए हैं यदि उन पर ध्यान दिया जाये तो कम लगत में ही बहुत लाभ कमाने की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है. देश में राजनीति का आलम यह है कि बिना किसी बात पर विचार किये जहाँ मर्ज़ी हो नयी गाड़ियाँ चला दी जाती हैं और उन पर मंत्रियों कि नज़र होने के कारण उनके लाभ आदि के बारे में कोई भी नहीं पूछता है ?
             मुख्य मार्गों के साथ ही जो वैकल्पिक मार्ग रेल के पास हैं और अभी तक उनको पूरी क्षमता के साथ उपयोग में नहीं लाया जा सका है  उन पर विशेष ध्यान देने की ज़रुरत है क्योंकि इनसे कम लागत में ही रेल को चलने लायक नए मार्ग उपलब्ध हो सकते हैं. रेल तंत्र में सुरक्षा और संरक्षा का भी बहुत महत्त्व है और इनके साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए. भले ही गाड़ियों की संख्या न बढ़ पाए और भले ही नयी सुविधाएँ न दी जा सकें पर इस बात पर अवश्य ध्यान दिया जाना चाहिए कि किसी भी स्तर पर इन बातों से कोई समझौता न किया जाये.
            आशा है कि आज का रेल बजट देश में विकास के नए आयाम खोलने कि तरफ होगा क्योंकि जनता से जुड़े लोग जनता की नब्ज़ पकड़ना जानते हैं और आज यह देखा जाना है कि ममता दी ने जनता को कितना समझा है .....


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