मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 22 June 2010

भोपाल अब बनी बात..

भोपाल पर आखिरकार इस सरकार ने एक बात तो साफ़ कर ही दी कि अगर कुछ करने का जज्बा हो तो कुछ भी किया जा सकता है. मंत्रियों के समूह की इस मनमोहन सरकार की बिलकुल नयी परिकल्पना के कारण बहुत सारे फैसले जो कैबिनेट में नहीं लिए जा पाते हैं आसानी से विचार विमर्श के बाद कुछ ठोस देकर चले जाते हैं. ऐसा तो नहीं कहा जा सकता है कि मंत्रियों के समूह द्वारा जो कुछ भी सुझाया गया है वह बहुत अच्छा है पर अभी तक भोपाल के नाम पर जनता और पीड़ितों को जिस तरह से ठगा जा रहा था उस प्रक्रिया पर कुछ हद तक विराम तो लगा ही है.
             आज भी देश में पता नहीं कितने औद्योगिक समूह बिना सुरक्षा मानकों की परवाह किये  अपना काम करते ही चले जा रहे हैं. किसी समय अचानक किसी दुर्घटना के होने पर सभी को यह लगने लगता है कि इस मामले में बहुत कुछ किया जाना चाहिए . आज के समय में  जब औद्योगिक गतिविधियाँ निरंतर ही बढ़ रही हैं तो किसी भी तरह से इनकी अनदेखी नहीं की जा सकती है. देश को विकास के नाम पर ऐसे झुनझुने आख़िर कब तक पकड़ाये जाते रहेंगें ? फिल हाल तो हम सभी को इस समय इस बात पर विचार करना ही होगा कि जिनको पिछले २६ वर्षों तक न्याय नहीं मिला उन्हें अब कुछ हद तक न्याय पर भरोसा करना भी सिखाया जाए. देश में कुछ भी करने से पहले इस तरह की मानवीय भूल या लापरवाहियों पर किसी भी तरह की राजनीति करने वालों पर लगाम लगाने का कोई ठोस उपाय होना चाहिए क्योंकि केवल साथ खड़े होना अलग बात है और सही मायने में हमदर्द होना एक दूसरी ही बात है. देश ने बहुत तरक्की कर ली है पर आज भी राजनैतिक तौर पर हमारे लोकतंत्र को जितना परिपक्व होना चाहिए था उतना अभी भी नहीं हो पाया है क्योंकि हमारी सोच लोकतंत्र से ज्यादा अपनी पार्टी और सरकार को बचाने में ही खर्च होती है तो उस स्थिति में कैसे यह सोचा जा सकता है कि नेता निरपेक्ष भाव से कुछ ठोस कदम उठाने का प्रयास करेंगें ?
       फिल हाल समूह द्वारा बहुत कुछ किया जाना अभी भी बाकी है पर इस अच्छी शुरुआत को केवल राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. जो भी कमियां इस समूह के फैसले में रह गयी हैं उन्हें आगे सुधारने का ईमानदारी से प्रयास करना चाहिए. देश अपने सीने पर आगे और इस तरह के घाव देखने की स्थिति में अब नहीं है. पीड़ितों के लिए सरकारें जो भी कर सकें अच्छा है साथ ही दोषियों को सजा दिलवाने का प्रयास भी किया जाना चाहिए .           


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