मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 13 October 2010

काला धन और सूचना

केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रवर्तन निदेशालय को यह आदेश देकर अच्छा ही किया कि उसे देश से बाहर गए काले धन के बारे में एक अनुमान जनता के सामने देना चाहिए. आयोग ने निदेशालय की यह दलील ठुकरा दी जिसमें उसने मांग की थी की वह संज्ञान में आये काले धन के आंकड़ों का न तो समर्थन कर सकता है और न ही विरोध ? आयोग ने निदेशालय की इस मांग को भी ठुकराया कि वह सूचना अधिकार में आने वाले इस मामले में सूचना देने के लिए बाध्य नहीं है. इस पर आयोग ने साफ़ तौर पर यह स्पष्ट कर दिया कि भ्रष्टाचार से जुड़े किसी भी मामले में कोई भी सूचना देने से इंकार नहीं किया जा सकता है और इस मामले में भी पूरे अनुमान की सूचना दी जानी चाहिए.
           हालांकि आयोग ने इस मामले में जांच के आधार और शामिल लोगों के बारे में सूचना देने से निदेशालय को बरी कर दिया अब वह बिना इसतौर तरीके का खुलासा किये अपने अनुमान को बता सकता है. आयोग के एक फैसले से यह तो हुआ है कि अब भविष्य में भ्रष्टाचार से जुड़े हुए किसी भी मुद्दे में यह एक नज़ीर बन जाएगी कि ऐसे मामलों के बारे में सूचना सार्वजनकि करना अब विभागों की मजबूरी होगी. आयोग ने यहाँ पर एक बात बहुत ही स्पष्ट तरीके से कही कि इस तरह के मामलों में कानून की पेचीदगियों के स्थान पर यह बताया जाना चाहिए कि इस तरह के पैसे के प्रवाह से देश ने अपने कितने संसाधन गवां दिए हैं ? यह बिलकुल सही ही है कि अब समय आ गया है कि इस तरह के मामलों में सख्ती की जाये जिससे जो पैसा विदेशों में जमा हो चुका है उसके बाद अब और पैसा वहां के बैंकों में न जाने पाए. इस बारे में अब प्रवर्तन निदेशालय को बहुत सख्ती करने की ज़रुरत है.
           देश का बहुत सारा पैसा इस तरह से बाहर के देशों में जमा कराया गया है जिसके चलते यहाँ पर भ्रष्टाचारियों ने एक सामानांतर अर्थ व्यवस्था बनाकर रख दी है. देश में बहुत सारे कानून अस्तित्व में हैं पर जिन लोगों पर उन कानूनों को लागू कराने की ज़िम्मेदारी है वे ही पता नहीं किस तरह से काम करते रहे हैं जिससे देश का बहुत सारा पैसा बाहर जाता रहा है और आज भी लगातार जा रहा है. अब इस आदेश से शायद एक मोटा अनुमान देश की जनता के सामने आ सके कि आख़िर हमारे देश का कितना पैसा बाहर के बैंकों में अवैध तरीके से जमा किया गया है. यह सही भी है कि इन खातों के बारे में केवल एक अनुमान ही लगाया जा सकता है और कोई ऐसा कारण नहीं है कि इस बारे में एक आंकलन प्रस्तुत न किया जा सके ?    


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