मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 2 November 2010

हुर्रियत को आईना...

जम्मू कश्मीर इस्लामी इत्तिहाद नामक एक अनजाने से संगठन द्वारा कश्मीर घाटी में चिपकाये गए पोस्टर्स के बाद हुर्रियत बौखला सी गयी है अभी तक जो काम वह भारत के खिलाफ़ अपने को दिखाने के लिए किया करती थी अब उसको पहली बार किसी ने उसकी भाषा में ही समझाने का प्रयास किया है. यह सच है कि सच का सामना करने की हिम्मत बहुत कम लोगों में होती है और वे सच से मुंह फेरकर अपने को सही साबित करने की कोशिश करने में लग जाया करते हैं ? इस संगठन ने घाटी में इस तरह की अराजकता के लिए हुर्रियत को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया है और कहा है कि इसने आम कश्मीरी का जीना हराम किया हुआ है. जब लोगों को अपनी रोज़ी रोटी कमानी होती है तो ये रोज़ ही हड़ताल और बंद बुलाये रखते हैं जिससे आम लोगों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, अगर देखा जाये तो भारत में कश्मीर का विलय एक बात है और इस तरह से पूरी घाटी को बंधक बनाये रखना बिलकुल दूसरी बात है.
          ज़ाहिर है कि यह बात पाक परस्त हुर्रियत समेत किसी भी अलगाववादी गुट को रास नहीं आने वाली है. पर इस तरह की समस्या का कोई समाधान निकालना भी बहुत ही कठिन काम है. हुर्रियत का काम केवल घाटी में किसी भी प्रकार से अराजकता बनाये रखना है जिससे मीडिया के द्वारा यह खबर पूरी दुनिया में जाती रहे कि भारतीय सुरक्षा बल वहां पर बहुत ज़्यादती कर रहे हैं ? जबकि घाटी के लोग भी जानते हैं कि इस सब में सुरक्षा बलों से ज्यादा भूमिका इन हुर्रियत के नेताओं की ही है. हुर्रियत ने इसे सरकारी कोशिश बताते हुए इससे गुमराह न होने की अपील की है पर आखिर हुर्रियत की समझ में यह क्यों नहीं आता है कि किसी भी झूठे मसले को आखिर कब तक जिंदा रखा जा सकता है ? पर हुर्रियत तो आखिर हुर्रियत है उसने पाकिस्तान का दिया हुआ एक ऐसा चश्मा पहना हुआ है कि उसे वही दिखाई देता है जो पाकिस्तान उसे दिखाना चाहता है ?
        आज के समय में जब दुनिया बहुत आगे जा रही है तब भी हुर्रियत जैसे कुछ संगठन घाटी की प्राकृतिक परिस्थियों का लाभ उठाकर कश्मीर को विकास की पटरी पर दौड़ना ही नहीं चाहते हैं. घाटी के नौजवानों को आखिर हुर्रियत क्यों हैदराबाद, बंगालुरू, गुडगाँव और नोयडा के युवाओं के साथ नहीं देखना चाहती है ? आज जब पूरे देश के युवा अपने भविष्य के बारे में सोचते हैं और अपने सपनों को सच करने की कोशिश कर रहे हैं वहीं हुर्रियत कश्मीरी नौजवानों के हाथ में पत्थर देकर उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचाने का काम कर रही है. ठीक है अगर हुर्रियत को लगता है कि कश्मीर में लोगों के साथ अन्याय हो रहा है तो उसे उनके हक़ के लिए लड़ने से कोई नहीं रोक सकता है पर उस एक हक़ के लिए पूरे कश्मीर को अराजकता में झोंकने को कहाँ तक सही कहा जा सकता है ? अच्छा हो कि इस तरह के सभी मामले राजनैतिक स्तर पर ही निपटाए जाएँ और कश्मीर के आम लोगों को अपना काम करके कश्मीर को तरक्की की रह पर बढ़ने से रोका तो न जाये ? फिलहाल यह कहा जा सकता है कि अब ऊँट पहाड़ के नीचे आ रहा है ? 
 

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1 comment:

  1. गलती सरासर धर्मनिरपेक्षियों की है, जिन्होंने हिन्दू विहीन करा दी घाटी और अब फल भुगत रहे हैं..

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