मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 16 November 2010

घूस और टाटा समूह

देश में भ्रष्टाचार के आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच जिस तरह से उत्तराखंड की वर्षगाँठ पर टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा ने यह कहकर सभी को चौंका दिया कि उनसे विमान सेवा शुरू करने के लिए १५ करोड़ रूपये घूस के रूप में देने के लिए कहा गया था जिसके बाद टाटा ने सिंगापूर एयर लाइन के साथ अपने शुरू किये जाने वाले संयुक्त उद्यम को यह कहकर रोक दिया था कि राजनैतिक विरोध के चलते यह काम कर पाना संभव नहीं है. रतन टाटा जैसे सम्मानित लोग कभी भी कोई बात ऐसे ही नहीं करते हैं उनका यह राज शायद उनके सीने में ही दफ़्न रहता पर उनको अपने जीवन में इस बात का मलाल है कि उन्होंने हर चुनौती का मुकाबला कर लिया पर देश में विमानन की शुरुआत करने वाले उनके समूह को केवल घूसखोरी के कारण ही इस क्षेत्र से बाहर रहना पड़ा था .
        उल्लेखनीय है कि भारत में सबसे पहले १९३० में टाटा एयर लाइंस की शुरुआत इस समूह ने ही की थी जिसका बाद में १९५० में राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था. अब इन बातों का कोई मतलब नहीं है कि आखिर किस मंत्री ने किस स्तर पर टाटा से भी घूस मांगी थी ? टाटा समूह ने १९९५, २००,२००१ में ३ बार विमानन सेवा में आने के प्रयास किये पर हर बार उन्हें असफलता ही हाथ लगी. उनको केवल इस बात का मलाल अधिक है कि अगर वे भी इस क्षेत्र में आ पाते तो यह उनके लिए एक भावुकता भरा क्षण होता पर इस देश के भ्रष्टाचार के लिए किसी के सपनों के कोई मायने नहीं होते हैं ? यह समूह जिसने अपनी सफलता के झंडे पूरी दुनिया में फहराने की ठान रखी है आज ऐसा लगता है कि वह अपने लोगों के हाथों भी ठोकर लगने के बावजूद आगे बढ़ता रहा क्योंकि उनके साथ सच का मंत्र भी है.
      क्या होता तो क्या होता इस बात के कयास लगाने के स्थान पर अगर इस बात पर विचार किया जाए कि टाटा के होने से विमान क्षेत्र में ज़रूर ही कुछ खास होता तो पता चल जायेगा कि देश ने क्या खो दिया है ? फिल हाल देश में घूस इतनी बढ़ चुकी है कि लोग किस काम के लिए किसी से भी घूस मांगने में नहीं चूकते हैं यह उस नीचता की निम्नता है.... टाटा ने घूस नहीं दी तो कोई बात नहीं पर आज जो विमानन कम्पनियां इस क्षेत्र में हैं उन्होंने कितनी घूस दी थी ? इस बात का पता तो लग्न ही चाहिए और अगर यह आरोप सही साबित होते हैं तो वर्तमान की सभी विमानन कम्पनियों की सेवाओं को ख़त्म कर उन्हें फिर से इस के लिए बुलाना चाहिए जिससे अब सभी को बराबर का अवसर भी मिल सके.

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