मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 12 January 2011

घोड़े से पहले कोड़ा

                     आख़िर कार लखनऊ में बैठकर योजनायें बनाने वाले बाबुओं की समझ में यह बात आ ही गयी कि पूरे प्रदेश में जो कुछ भी चल रहा है उससे केवल वहीं पर बैठकर पार नहीं पाया जा सकता है. इस क्रम में सरकार ने पहले प्रदेश के थानों को ऑनलाइन करने का आदेश दे दिया और इस दिशा में अब जाकर ध्यान दिया कि जब पूरे प्रदेश के अधिकांश हिस्से में सरकार ९ घंटे से अधिक बिजली ही नहीं दे पा रही है तो आख़िर अब इन क्षेत्रों में कम्प्यूटर कैसे चलाये जायेंगें ? यह सही है कि प्रदेश के दूर दराज़ के इलाकों में बिजली है ही नहीं और इस तरह के किसी भी आधुनिकीकरण के लिए आज बिजली की सबसे पहले आवश्यकता होती है ? यह एक ऐसी योजना है जो पूरे प्रदेश की जनता में पुलिस की छवि को सुधार सकती थी और साथ ही पूरे प्रदेश के अपराधों पर नियंत्रण रखने का एक अच्छा साधन बन सकती थी पर जिस तरह से इसे उलटी तरह से लागू किया गया उससे इस पूरी  योजना की सफलता ही संदिग्ध हो गयी.
                     अभी तक प्रदेश में जितनी भी योजनायें बनायीं जा रही हैं उनकी सफलता किस हद तक है यह इन योजनाओं से जुड़े आंकडें खुद ही बता देते हैं ? इस समय प्रदेश में मुख्यमंत्री के स्वप्न लोक की जो भी योजनायें हैं वे भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही हैं और प्रदेश की सरकार केवल इन योजनाओं का ढिंढोरा ही पीट रही है. पुलिस सुधार आज पूरे प्रदेश की नहीं वरन पूरे देश की आवश्यकता है और इन पर सख्ती से अमल किये बिना अब अंग्रेजों के ज़माने की पुलिस व्यवस्था से काम नहीं चलाया जा सकता है क्योंकि आज देश और समाज के सामने नए तरह के ख़तरे आने लगे हैं. अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों का मुकाबला अयोध्या और वाराणसी में प्रदेश की पुलिस आज भी पुराने हथियारों से करने को विवश है प्रदेश सरकार को आम लोगों की सुरक्षा से अधिक अपने हित के काम अधिक पसंद आते हैं तो इसे प्रदेश का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है ?
                   प्रदेश में आज आवश्यकता है कि पूरी सरकारी व्यवस्था को एक अभियान के तहत चलाया जाए क्योंकि अब प्रदेश को छोटे सुधार की आवश्यकता नहीं है वरन यहाँ पर पूरे तंत्र को सुधारने की दिशा में काम किये जाने की आवश्यकता है. अब यहाँ पर बिहार की तरह एक अभियान होना चाहिए जिसमें केवल प्रदेश के विकास की बात हो क्योंकि जब तक प्रदेश भी पूरी तरह से विकास के पथ पर नहीं चलेगा तब तक पूरे देश का विकास भी अवरुद्ध होता रहेगा अब समय है कि राजनेता अपने व्यक्तिगत हितों पर ध्यान न देकर पूरे प्रदेश के बारे में सोचना शुरू कर दें जब प्रदेश में खुशहाली होगी तभी देश की खुशहाली अच्छी लगेगी वरना इतनी बड़ी आबादी को उसके हाल पर छोड़कर कैसे तरक्की की जा सकेगी ? अब इस बात का आज से सुधार होना चाहिए कि किसी भी नए काम को तभी शुरू किया जायेगा जब उससे जुड़ी मूलभूत सुविधाएँ वहां पर उपलब्ध होंगीं ? पूरे प्रदेश में कुछ एक साथ लागू करने के स्थान पर उसे शहरों से लागू किया जा सकता है. पर आम जनता और नेताओं की सोच में बहुत बड़ा अंतर होता है जहाँ पर जनता की आवश्यकताएं शुरू होती हैं वहीं पर आज के आम नेता की सोच जवाब दे जाती है ?             


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