मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 15 January 2011

उप मुख्यमंत्री और विकास ?

                      आखिरकार तेलंगाना के लोगों को फौरी तौर पर राहत देने के लिए कांग्रेस ने कुछ सोचना तो शुरू कर ही दिया है जो की आने वाले समय में तेलंगाना और आन्ध्र प्रदेश के लिए अच्छी खबर लेकर आ सकता है. जिस तरह से तेलंगाना क्षेत्र के सांसदों और विधायकों के साथ बैठक करने के बाद कांग्रेस इस बात पर अब विचार कर रही है कि राज्य में तेलंगाना क्षेत्र के किसी विधायक को उप मुख्यमंत्री बना दिया जाये और तेलंगाना के विकास और वहां के लोगों कि उपेक्षा की शिकायतों पर वह पूरी गंभीरता से सोच कर निर्णय देने की प्रक्रिया जल्दी ही शुरू कर सके. आज के समय में बड़े राज्यों में इस तरह की व्यवस्था किये जाने से वास्तव में राज्य के लोगों को ही अधिक सुविधाएँ और विकास की नयी झलक देखने को मिल सकती है. पर राजनैतिक लालच और अपने हितों के साधन में लोग जनता को भूल जाते हैं जिसकी परिणिति इसी तरह से होती है. 
                       आज के समय में जब विकास एक बड़ा मुद्दा है तो किसी भी तरह से इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है ? किसी भी राज्य में सफलता पूर्वक शासन करने के लिए वहां के लोगों की वास्तविक ज़रूरतों पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है यही कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व द्वारा पद पर बैठाये गए लोग कभी भी लोगों की ज़रूरतों पर ध्यान नहीं दे पाते हैं क्योंकि उनका एक मात्र लक्ष्य अपने आकाओं को खुश करना ही होता है. आज देश में जो भी सफल मुख्यमंत्री दिखाई देते हैं उनमें से ज़्यादातर को अपने फैसले लेने की पूरी छूट मिली हुई है तभी वे राज्य से जुड़े मसलों पर पूरी नज़र रखते हुए सही समय पर सही जगह तक सही योजनायें पहुँचाने में सफल सिद्ध हो रहे हैं. किसी की कृपा से एक बार पद मिल सकता है अपर उस पद को बचाए रखने के लिए अच्छा काम भी करना पड़ता है. आज देश की जनता की राजनैतिक सोच परिपक्व हुई है और उसे यह समझ आने लगा है कि केवल कोरे नारों के सहारे राजनीति करने वाले कभी भी उनका कल्याण नहीं कर सकते हैं.
                       देश में त्रिस्तरीय पंचायती राज की कल्पना जब राजीव गाँधी ने की थी तो उसके पीछे उनकी यही मंशा काम कर रही थी कि विकास खंड और जनपद स्तर पर बैठे हुए स्थानीय जन प्रतिनिधि वहां की कमियों से अच्छी तरह से परिचित होते हैं और उनके द्वारा वहां पर विकास के बारे में अच्छे से सोचा जा सकता है पर आज जब यह व्यवस्था लागू है तो केवल कुछ स्थानों को छोड़कर कहीं भी वह परिवर्तन नहीं दिखाई देता है जो उस समय सोचा गया था. आज अगर आन्ध्र में उप मुख्यमंत्री की बात चल रही है तो वह भी एक मजबूरी वश ? मजबूरी में किया गया कोई भी काम मजबूती नहीं प्रदान करता है अगर कांग्रेस वास्तव में ऐसा कुछ करना चाहती है तो पहले उसके सांसदों और विधायकों को सड़क पर उतर कर जनता को अपने विश्वास में ली होगा जिससे पार्टी द्वारा उठाया गया कोई भी कदम उन्हें अच्छा लग सके. इस उप मुख्यमंत्री को पूरे तेलन्गाना का प्रभार पूरी शक्तियों के साथ सौंप देना चाहिए और साथ ही प्रदेश में तेलंगाना की समस्याओं से निपटने के लिए एक मंत्रालय और सर्वदलीय समिति भी बनाई जानी चाहिए. साथ ही वहां की जनता से यह अपील की जा सकती है कि वह एक वर्ष तक इस व्यवस्था को परखे और तब आगे की बात शुरू की जाये. केवल अलग राज्य किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है फिर भी असमानता को दूर करने के लिए लोगों को संघर्ष करने की पूरी छूट भी हमारे संविधान से मिली हुई है.      

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1 comment:

  1. चार उप, चार गुना अधिक विकास जनता का. उप भी तो जनता के हैं...
    सिपाही नहीं बढ़े उस अनुपात में जिसे में डीजी बढ़ गये, कल ही नौ विशेष बना दिए गये.

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