मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 24 April 2011

लोकपाल विधेयक और जनता

          लोकपाल विधेयक को बनाए के लिए जुटे हुए शीर्ष सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनता से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए एक वेबसाइट शुरू की है जिसके द्वारा आम जनता में से कोई भी अपने सुझाव सीधे इस समिति को दे सकता हैं जिससे जनता की भागीदारी भी इस विदेयक में सुनिश्चित हो सकेगी. यह सही है कि जिस स्तर पर इस अभियान से जनता का जुड़ाव हुआ उसी ने पूरी तरह से केंद्र सरकार को झुकने को मजबूर किया. अब यह बिलकुल सही समय है कि इस विधेयक के प्रावधानों पर विचार करते समय जनता की राय भी ली जाये क्योंकि पता नहीं देश में विभिन्न स्तरों पर व्याप्त भ्रष्टाचार से निपटने के लिए किसी के पास कौन सी अच्छी बात हो ? आज जितनी आवश्यकता इस विधेयक की है उतनी ही आवश्यकता इस को कड़ाई से लागू करने की भी होगी क्योंकि आज भी देश में बहुत सारे कानून हैं पर उनमें व्याप्त कमियों का भ्रष्टाचारी आसानी से फायदा उठा लिया करते हैं.
          इस विधेयक के लिए जिस तरह से जन सुनवाई की बात भी की जा रही है उससे लगता है कि इस बार जनता का पूरा ध्यान इस तरफ लगाने को प्राथमिकता दी जा रही है क्योंकि जब तक जनता इन प्रावधानों के बारे में जागरूक  नहीं होगी तब तक किसी भी तरह से इसको पूरी सफलता नहीं मिल पायेगी. आज जो कमी देश के नागरिकों में है कि हम सरकारें चुनने के बाद अपने कर्तव्य को भूल जाते हैं कि हमें पूरे ५ वर्षों तक यह भी देखना चाहिए कि हमारी चुनी हुई सरकारें ठीक ढंग से काम कर भी रही हैं या नहीं ? क्योंकि जब तक हम अपने हितों का ध्यान रखना नहीं सीखेंगें तब तक कोई भी व्यक्ति कानून का लाभ अपने हितों को साधने के लिए करता ही रहेगा. आज कानून को सभी के लिए समान रूप से लागू करवाने की ज़रुरत है पर हम कानून बनाकर ही चुप हो जाया करते हैं और देश को कुछ भ्रष्ट लोगों को कानून के साथ खिलवाड़ करने के लिए छोड़ दिया करते हैं. देश के नेताओं पर जनता का दबाव बनाये रखने के लिए अब इस बात का प्रावधान भी किया जाना चाहिए कि जिस तरह से हम सांसद विधायक को चुनते हैं उसी तरह से उनके काम काज से संतुष्ट न होने पर हमें इनको हटाने का अधिकार भी होना चाहिए और यह समय २ साल के बाद कभी भी होना चाहिए जिससे इन नेताओं पर यह दबाव बना रहे कि काम न करने पर उनका पद जा सकता है.
      जिस तरह से इस विधेयक के लिए जनता में उत्सुकता है और सरकार भी सामाजिक संगठनों की बातों को पूरी तरह से सुन कर ही आगे कुछ करना चाहती है वह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है. देश में चाहे कुछ भी होता रहे पर जब तक कानून के प्रावधानों के चलते भ्रष्ट लोगों को सजा नहीं मिलेगी तब तक कुछ भी ठीक दिशा में नहीं चल पायेगा. पूरे देश में आज जनता के सहयोग से हर स्तर पर निगरानी समितियों की आवश्यकता है क्योंकि जब तक हर काम को देखने और परखने के लिए अधिकारियों पर दबाव नहीं होगा तब तक वे पूरी निष्पक्षता के साथ काम नहीं कर पायेगें. यह सही है कि सभी अधिकारी भ्रष्ट नहीं होते और न ही सारे नेता ही भ्रष्ट हैं पर मानसिक मजबूती की कमी के कारण ये लोग अवसर आने पर नियमविरुद्ध जाने से भी नहीं चूकते हैं. आज इन लोगों पर पूरी तरह से नकेल कसने की ज़रुरत है और देश की जनता की भागीदारी बढ़ाने की बहुत आवश्यकता है. ऐसा नहीं है कि देश में अच्छे लोगों की कमी है पर आवश्यकता है कि वे लोग देश के विकास में खुद को शामिल कर सकें.    
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