मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 2 May 2011

उ०प्र० में फिर से पेपर लीक

            नैतिकता के विरुद्ध जाकर काम करने वाले लोगों ने एक बार फिर से उत्तर प्रदेश के लोगों को कटघरे में खड़ा कर ही दिया. सीबीएसई बोर्ड की एआईईईई परीक्षा के पेपर फिर से लीक होने से जहाँ एक तरफ इस बोर्ड की साख़ पर बट्टा लगा वहीं शिक्षा क्षेत्र के मुन्ना भाइयों के बारे में एक बार फिर से सोचने का समय भी आ गया है. अभी तक जिस स्तर पर ये लोग इस धंधे को चला रहे थे उससे यही लगता है कि इनको किसी का भी डर नहीं है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने जिस तेज़ी को दिखाते हुए इसमें शामिल लोगों को पकड़ने में सफलता पाई वह बहुत अच्छी बात है पर अभी भी पुलिस के हाथ बड़े लोगों तक नहीं पहुँच पाए हैं और पुलिस का विशेष कार्यबल इस मामले पर काम कर रहा है जिससे आने वाले समय में शायद कुछ और सुराग हाथ लग जाएँ. 
     यह सही है कि अखिल भारतीय स्तर पर कोई भी परीक्षा कराने के लिए बहत संसाधनों की आवश्यकता होती है और परीक्षा जैसे किसी भी मसले में नैतिकता पर ही सारा कुछ टिका होता है और बोर्ड अपने स्तर पर कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाहता है फिर भी पेपर बोर्ड से निकल जाने के बाद इनकी पूरी ज़िम्मेदारी सम्बंधित राज्य और विद्यालय के प्रधानाचार्य पर ही होती है. बोर्ड केवल सुरक्षात्मक कदम ही उठा सकता है उसके अलावा उसके पास करने के लिए बहुत कुछ नहीं होता है. फिर भी अपने संसाधनों से बोर्ड ने जिस तरह से केवल दो घंटे की देरी से पेपर करा लिए वह उसकी हर स्तर पर की गयी तैयारी को ही दर्शाते हैं. फिर भी इस मामले में कुछ ऐसा करने की ज़रुरत है जिससे आने वाले समय में इतनी भी गुंजाईश न रहे और कोई भी इन पपेर्स से छेड़-छाड़ न कर सके. 
    इस मामले में जो सबसे आवश्यक और महत्वपूर्ण पहलू है उसे कभी भी नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता है क्योंकि जिस तरह से ६ लाख रूपये में पेपर बिक रहे थे तो इसका मतलब यही है कि कहीं न कहीं इन परीक्षाओं की शुचिता को इनमें भाग लेने वाले बच्चों के माता पिता भी ख़राब कर रहे हैं क्योंकि कोई भी बच्चा जो पढ़ रहा है आख़िर ६ लाख रूपये अपने माता पिता के बिना कहाँ से ला सकता है ? कोचिंग कराने वाले संस्थानों में भी इस तरह का गोरखधंधा खूब चलता है क्योंकि उनमें से कुछ पढ़ाने से अधिक इस तरह की चोर बाज़ारी में भी लिप्त हो जाते हैं. आज यह सारा कुछ केवल पुलिस के बल पर नहीं रोका जा सकता है क्योंकि जब तक इसमें शामिल हम लोग इनकी शुचिता के लिए प्रयास नहीं करेंगें तब तक कोई भी परीक्षा केवल भय और तनाव के माहौल में ही सम्पन्न हो पायेगी.     
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