मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Thursday, 2 June 2011

सलीम शहजाद और पाक

पाक में कानून और व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती ही जा रही है जिस तरह से पाक नौसेना के अधिकारियों और अल कायदा के गठजोड़ का खुलासा करने वाले ४० वर्षीय पत्रकार सैयद सलीम शहजाद की अपहरण करने के बाद हत्या की गयी वह पाक के लिए और भी बुरे दिन आने की सूचना देता है. पूरी दुनिया यह जानती है कि जिहाद के नाम पर पाक में क्या चल रहा है वहा पर जिस तरह से सरकारी स्तर पर आतंक का पोषण जिया उल हक के समय से किया गया है अब पाक उसके परिणाम भोग रहा है. आज वहां के बारे में इतना कुछ सामने आने पर भी सरकार के पास करने के लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि पाक में हमेशा से ही सरकार पर सेना भारी रहती है वहां पर केवल दुनिया को दिखाने के लिए ही लोकतंत्र आदि का ढिंढोरा पीता जाता है जबकि वास्तविक नियंत्रण हमेशा से ही सेना के पास रहता आया है. सरकारी स्तर पर पोषित किया गया आतंक कभी भी अपना फन उठाकर अपने आका को डस सकता है.
     ऐसा नहीं है कि इस्लामी चरमपंथियों ने ऐसा पहली बार किया है पर इस बार यह एक ऐसे पत्रकार के साथ किया गया है जिसने १ दिन पहले ही वहां कि सेना और आतंकियों के बीच चल रहे घिनौने खेल को दुनिया के सामने लाकर रख दिया था. शहजाद ने दो महीने पहले ह्युमन राइट्स के कार्यकर्ता को भी मेल भेजकर यह बताया था कि आईएसआई के दो अधिकारियों ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया है. ऐसा नहीं है कि पाक के इस चेहरे को बाकी दुनिया नहीं देख चुकी है पर आज भी पाक के लिए हर तरह की सहायता लिए खड़े देशों को यह अपने स्वार्थ में समझ ही नहीं आता है कि सही क्या है और ग़लत क्या ? उनकी आँखों पर अपने स्वार्थ की पट्टी इतनी मजबूती से बंधी हुई है कि वे कुछ भी सुनने देखने की स्थिति में नहीं हैं ? सारी दुनिया ने अभी तक जिस तरह से पाक की इन हरकतों को अनदेखा किया है वह आने वाले समय में सभी को भारी पड़ने वाली है.
    पाक में कहा जाता था कि न्यायपालिका और प्रेस काफी हद तक स्वतंत्र हैं पर वकीलों के मुशर्रफ के ख़िलाफ़ आन्दोलन में न्यायपालिका को कितने पापड़ बेलने पड़े यह सभी ने देखा और आज प्रेस पर जिस तरह से हमले हो रहे है वह भी अमेरिका को चिंताजनक नहीं लगता है तो इसे क्या कहा जाए ? अमेरिका केवल दक्षिण एशिया में भारत के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ही पता नहीं और कितनी ग़लतियाँ करने वाला है ? उसे यह लगता है कि भारत को पाक के साथ उलझाये रखने से ही उसकी बहुत सारी समस्याएं ख़तम हो जाएँगी पर पाक का साथ रख कर आज तक किसी भी देश को कुछ हासिल नहीं हुआ है. आतंकी प्रेस पर हमला करके पाक में भी प्रेस का मुंह बंद करना चाहते हैं जैसा उन्होंने अफ़गानिस्तान में किया था और बाद में अफ़गानिस्तान की कोई भी ख़बर बाहरी दुनिया तक आनी बंद हो गयी थी ? अब भी समय है कि अमेरिका पाक को दी जाने वाली हर तरह की सहायता पर विचार करे और जितनी रोकी जा सकती हो उसे तत्काल रोक दे क्योंकि आज जो संसाधन अमेरिका पाक को आतंकियों से लड़ने के लिए दे रहा है कल ये सब आतंकियों के हाथों में होंगें और अमेरिका उनसे संघर्ष कर रहा होगा ?
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