मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 1 June 2011

लोकपाल विधेयक पर विवाद

    एक बार फिर से लोकपाल विधेयक बनाने के किये गठित समिति में प्रधानमंत्री और न्यायालयों को भी लाये जाने को लेकर विवाद गहरा गया है. इसके बाद ये ख़बरें भी आयीं कि सिविल सोसाइटी के लोग अगली बैठक का बहिष्कार भी कर सकते हैं जिससे इस बिल के बनने पर ही संदेह होने लगा है. पर इस सब के बीच प्रणब मुखर्जी और कपिल सिब्बल ने संवाददाताओं को यह स्पष्ट किया कि सरकार और सोसाइटी के सदस्यों के बीच कुछ मामलों को लेकर मतभेद चल रहा है और जिसे जल्दी ही सहमति के ज़रिये सुलझा लिया जायेगा. सरकार की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया कि अभी कुछ भी तैयार नहीं है फिर भी इस विधेयक का स्वरुप कैसा होगा इस बात पर काफी मंथन किया जा चुका है. अब कुछ मामलों पर मतभेद तो होने ही हैं क्योंकि सरकार को कुछ भी प्रस्ताव देने से पहले पूरे देश से प्रदेशों से राय भी जाननी है क्योंकि वह कोई भी विधेयक केवल अपने दम पर ही नहीं बनाना चाहती है.
    कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि सरकार एक मज़बूत लोकपाल विधेयक लाना चाहती है फिर भी अभी तक पूरे मामले में सहमति नहीं बन  पर रही है क्योंकि सिविल सोसाइटी के सदस्यों में भी कुछ मुद्दों को लेकर आपस में मतभेद गहरे हैं और वे खुद ही एक राय नहीं हैं. जब उनकी तरफ़ से कुछ सहमति जैसी बात आएगी तो सरकार उस पर भी विचार करेगी. सिब्बल ने यह भी कहा कि कुछ मुद्दों पर अभी असहमति है पर उसे जल्दी ही सुलझा कर ३० जून तक बिल का मसौदा तैयार कर लिया जायेगा. उन्होंने यह भी कहा कि बिना वजह सरकार की मंशा पर संदेह नहीं करना चाहिए क्योंकि सरकार खुद ही एक कड़े और प्रभावी विधेयक के बारे में गंभीरता से सोच रही है. अभी तक की बातचीत से कपिल ने संतोष जताते हुए कहा कि कुछ मुद्दों पर अभी वैचारिक मतभेद हैं पर वे ऐसे नहीं हैं जिनका हल नहीं ढूँढा जा सकता हो.
   फिलहाल और चाहे कुछ भी हो पर जिस तरह से इस बिल को बनाने का काम चल रहा है उससे यही लगता है कि इस बार सरकार और सोसाइटी के लोग वास्तव में कुछ बहुत ठोस प्रयास के द्वारा अच्छा विधेयक बनाना चाहते हैं. जब तक इस बिल की कोई प्रस्तावित प्रति सामने नहीं आती है तब तक कुछ भी संदेह करने का हक किसी को भी नहीं है क्योंकि इस मामले में सरकारी तंत्र के साथ सामाजिक लोग भी जनता के सरोकारों के लिए जुटे हुए हैं. यह आशा की जानी चाहिए कि आने वाली ३० जून तक इस विधेयक के प्रारूप को अंतिम रूप दे दिया जायेगा जिससे जो संदेह के बादल अभी मंडरा रहे हैं वे भी छंट जायेंगें. फिलहाल दोनों पक्षों को हर बात पर गहन विचार करने के बाद ही कुछ करना चाहिए क्योंकि वे इस समय देश की दिशा बदलने के लिए काम कर रहे हैं और इस काम में बहुत सारे व्यवधान आने वाले हैं जिनको पार कर ही देश का भविष्य उज्जवल होने वाला है. 
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