मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 12 June 2011

उ० प्र० को लूटते रहो

       संसाधनों के नाम पर जिस तरह की लूट उ० प्र० में मची हुई है उसकी कोई दूसरी मिसाल पूरे देश में नहीं मिल सकती है. सबसे ताज़ा नाम प्रदेश के बड़े और प्रभावशाली लोगों द्वारा नोएडा में बिजली की चोरी किये जाने का मामला प्रकाश में आया है. आज के समय में प्रदेश में अगर कोई रहने लायक जगह बची है तो वह दिल्ली के निकट होने और विकास में दिल्ली के साथ कदम मिलाने वाली पूरे नोएडा क्षेत्र में ही है. पर अब जिस तरह से पूरे प्रदेश में फ़ैली बिजली चोरी की बीमारी ने यहाँ पर अपने पैर पसार लिए हैं उससे यही लगता है कि आने वाले समय में नोएडा में भी पूरे प्रदेश की तरह बिजली कटौती होने की सम्भावना है. अब यह नोएडा के आम लोगों को तय करना होगा कि वे क्या चाहते हैं ? पूरे प्रदेश की तरह बिजली कटौती या फिर आज की तरह निर्बाध बिजली आपूर्ति ? अब आम लोगों को चाँद लोगों की इस लूट के विरोध में शिकायतें करनी ही होंगी क्योंकि आने वाले समय में सबसे ज्यादा परेशानी इन लोगों को ही होने वाली हिया.
   यह भी सही है कि पूरे उत्तर प्रदेश में बिजली हानि के मामले में नोएडा सबसे निचले पर आता है क्योंकि यहाँ पर यह हानियाँ केवल ६ % तक ही हैं. पर जिस तरह से अब प्रदेश की आत्मा को चूसने और भ्रष्टाचार फ़ैलाने वाले कुछ लोगों ने यहाँ पर भी बिजली चोरी शुरू कर दी है उससे यही लगता है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र भी पूरे प्रदेश जैसा ही हो जायेगा. बिजली चोरी के बड़े मामलों में जब कर्मचारियों ने घरों पर जाकर कार्यवाही करने का मन बनाया तो बाहर लगी हुई नेम प्लेट देखकर ही उनकी हिम्मत जवाब दे गयी. असल में पिछले वर्ष कार्यवाही के नाम पर इसी तरह के अभियान को चलने और एक वरिष्ठ नौकरशाह के यहाँ बिजली चोरी पकड़ने के बाद एस डी ओ का तबादला आनन् फानन में ही कर दिया गया था और चोरी में लिप्त लोगों के ख़िलाफ़ कुछ भी नहीं हो पाया था. जब प्रदेश के आला नौकरशाहों के यहाँ पर ही खुले आम दबंगई से बिजली चुरायी जा रही है और उनके ख़िलाफ़ किसी में कुछ भी करने का दम नहीं है तो केवल कहने भर को प्रशासन नाम की चीज़ बची है ?
   प्रदेश में २०१४ तक २४ घंटे बिजली का दावा करने वाली माया सरकार को क्या यह दिखाई नहीं देता कि पॉवर कारपोरशन को किस तरह से नेता और बड़े अधिकारी ही चूना लगाने में जुटे हुए हैं ? आख़िर कौन से कारण रहे कि बिजली चोरी करने वालों के ख़िलाफ़ कुछ करने की हिम्मत अधिकारियों में क्यों नहीं आ पायी ? क्या सरकार के बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों और नेताओं को बिजली चुराने का हक मिला हुआ है ? वैसे ही यह सभी लोग मिलकर प्रदेश की जनता का पैसा फालतू में ही उड़ाने में लगे हुए हैं और जिन स्थानों पर कुछ ठीक चल रहा है वहां अपर यही लोग मिलकर प्रदेश को गड्ढे में धकेलने का काम करने में लगे हुए हैं ? केवल दावों से कुछ नहीं होता है और इस बार पूरे बहुमत से सरकार चलने वाली माया में वह दम नहीं दिखाई दिया जो दूसरों के समर्थन से चलने वाली सरकारों में हुआ करता था. इससे तरह से सरकार ने कितने ही महत्वपुर्ण मुद्दों पर प्रदेश को ४ साल तक रोके रखा है जो पूरे देश के लिए भी बहुत समस्या पैदा करने वाला होने वाला है. पर जब बाड़ ही खेत को खाने लगे तो किसान क्या कर सकता है ?         
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