मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 10 July 2011

अल कायदा और अमेरिका

अमेरिकी रक्षा मंत्री लियोन पनेटा ने अपनी पहली अफ़गानिस्तान यात्रा के समय इस बात को ज़ोर देकर कहा है कि यदि दुनिया भर में फैले हुए अल कायदा के लगभग २० लोगों को खत्म किया जा सके तो इस पूरे आतंकी संगठन का सफाया किया जा सकता है. लगता है कि अफ़गानिस्तान में ज़मीनी हक़ीकत और अमेरिका से उसके बढ़ते तनाव के मद्दे नज़र पनेटा ने यह बातें कहीं है पर कहीं से भी यह नहीं लगता है कि अमेरिका या उसके सहयोगी देश इस तरह से पूरी दुनिया से आतंकियों को मिटाने की नियति भी रखते हैं क्योंकि जिस पाकिस्तान को वे अपने यहाँ पर आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई में सहयोगी बताने से नहीं चूकते हैं वही पाकिस्तान आज आतंकियों की पूरी जमात कड़ी करने में जी जान से लगा हुआ है. आज के समय अमेरिका को यह समझना ही होगा कि दुनिया को अब सबसे ज्यादा ख़तरा अल कायदा या तालिबान से नहीं वरन पाकिस्तान से ही है क्योंकि जब तक पाक में आतंकी ढांचा मौजूद है तब तक कोई भी प्रयास किया जाये इसको ख़त्म नहीं किया जा सकता है.  
      अमेरिका के सामने लादेन के पाक में रहने और मारे जाने से भी बढ़कर क्या सबूत आएगा कि पाक खुलेआम अपने यहाँ अपनी देख रेख में अति सुरक्षित क्षेत्र में आतंकियों के रहने का प्रबंध भी करता रहता है और दूसरी तरफ अमेरिका से धन और हथियार भी इकठ्ठा करता रहता है जिनका उपयोग वह भारत के ख़िलाफ़ ही अधिक करता है और साथ ही विश्व भर के आतंकियों को पोषित करने में भी नहीं चूकता है. आज भी अमेरिका जिस तरह से पाक की तरफ़ से ऑंखें मूंदें बैठा है वह उसके साथ ही पूरी दुनिया के लिए घातक साबित होने वाला है क्योंकि आज जिन आतंकियों को पाक प्रशिक्षित कर रहा है कल को वे दुनिया के किस हिस्से में जाकर कहाँ पर अमेरिका के हितों को चोट पहुँचाने का काम शुरू कर देंगें इस बात का आंकलन तो कोई भी नहीं कर सकता है. ख़ुफ़िया सूत्रों के भरोसे बहुत कुछ हासिल करने का दावा करने वाले अमेरिका के पास क्या इस तरह की सूचनाएँ नहीं पहुँचती हैं ? 
     अब भी समय है कि अमेरिका अगर वास्तव में आतंक को दुनिया से मिटाना चाहता है तो उसे इस बात पर ध्यान देना ही होगा कि कहाँ से क्या हो रहा है और अगर आज भारत के ख़िलाफ़ कुछ हो रहा है तो हो सकता है कि कल वही सब अमेरिका के साथ भी होने लगे ? भारत की शुरू से ही यह राय रही है कि पाक पर दबाव बनाकर उसे समझाने का प्रयास करना चाहिए कि वह इस तरह से अपनी सैन्य क्षमता का दुरूपयोग आतंकियों को प्रशिक्षित करने में न लगाये क्योंकि जब अमेरिकी हथियारों को चलाने की स्थिति में ये आतंकी आ जायेंगें तो अमेरिका के लिए और भी मुश्किलें खड़ी हो जायेंगीं. आतंक के ख़िलाफ़ उसकी लड़ी में पाक कहने के लिए तो सबके साथ है अपर वास्तव में वह केवल और केवल चरम पंथियों के साथ ही खड़ा है और इस्लामी दुनिया में अपनी इन हरकतों से अपने को इस्लाम का पुरोधा साबित करना चाहता है.  

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