मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

बाढ़ और उत्तर प्रदेश

लगता है कि उत्तर प्रदेश के नेपाल की तराई से लगे जिलों की किस्मत में हर वर्ष बाढ़ में डूबना ही लिखा हुआ है क्योंकि जिस तरह से नेपाल से अनियंत्रित पानी हर वर्ष यहाँ आता है उससे निपटने की कोई स्थायी नीति अभी तक नहीं बनायीं जा सकी है. ख़ुद हमारे देश में भी अभियंताओं की पूरी फौज होने के बाद भी इसका कोई कारगर और स्थायी हल दिखाई नहीं देता है. पिछले कुछ वर्षों से ठेकेदार, वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत से जिस तरह से लखीमपुर, बहराइच आदि जिलों में वनों की अँधा धुंध कटाई चल रही है उसने भी बाढ़ की विभीषिका को बढ़ाने में पूरा योगदान किया है. यह सही है कि इस तरह की प्राकृतिक आपदा को समय रहते अच्छी तरह से तैयारी करके ही निपटा जा सता है पर जिस तरह से इसमें दो देशों का मामला फँस जाता है तो उसे देखते हुए कम से कम यह तो किया ही जा सकता है कि नेपाल के साथ इस मसले को साझा तौर पर बराबरी के नियमों से निपटा जाये क्योंकि भारत के किसी भी कदम को वहां के विपक्षी दल नेपाल के शोषण के तौर पर ही अधिक देखते हैं.
     आज जो सबसे महत्वपूर्ण बात की जा सकती है कि उत्तर प्रदेश में उत्तर की इन नदियों को नहरों के ज़रिये दक्षिणी भाग से जोड़ने की कोशिश की जाये इसके लिए उत्तर प्रदेश में कम से कम संसाधनों से ही काम चलाया जा सकता है क्योंकि पूरे उत्तरी भाग में छोटी-छोटी बरसाती नदियों की भरमार है जो समय पड़ने पर अपने प्राकृतिक स्वरुप से ही मदद करते हुए उत्तर के इस अधिक जल को प्यासे दक्षिण तक पहुंचा सकती हैं. इसके लिए शारदा सहायक परियोजना को पूरी तरह से फिर से बनाने की आवश्यकता है. शारदा सहायक परियोजना एक ऐसी परियोजना है जो कम लागत में ही पूरे प्रदेश को वर्ष भर पानी दे सकती है और प्रदेश में बाढ़ की स्थति को सुधारने में मदद कर सकती है. इसके लिए कोई बहुत बड़ी योजना बनाने की ज़रुरत नहीं है वर्तमान में प्रायोगिक तौर पर केवल लखीमपुर जिले की उल्ल, सीतापुर में गोन, सरायन आदि नदियों के बेड को साफ़ करने की ज़रुरत है और इनमें शारदा से पानी डाले जाने की आवश्यकता है जो बाद में जाकर गोमती में मिल जाती है. इससे जहाँ इन सूखी पड़ी नदियों में जान आ जाएगी साथ ही इनके आस पास की कृषि योग्य भूमि को भी सिंचाई हेतु पानी मिल सकेगा. 
   पर जब किसी को डूबते हुए तराई क्षेत्र की परवाह ही नहीं है तो कौन इस मामले में पहल करेगा ? फिलहाल पानी बढ़ जाने पर लैया चने को मोहताज होने वाली जनता किसी बड़े नेता की बाट जोह रही है क्योंकि बड़ी सोच के बिना इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाली नहीं है. अब आवश्यकता है कि सिंचाई विभाग अपना होमवर्क ठीक से करे जिससे इस क्षेत्र को बाढ़ से निज़ात मिल सके और पूरे प्रदेश के साथ देश के अमूल्य संसाधन बर्बाद होने से बच सकें. पूरे पदेश की प्रगति में उत्तर प्रदेश अपनी आबादी के अनुसार हर समय आगे बढ़ाने या फिर पाँव में बेडी डालने के मामले में साथ तो हो ही सकता है देखना है कि अब देश के कर्णधारों की नज़रें कब इन पर पड़ती हैं ?
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