मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 10 August 2011

हमारा सार्वजनिक परिवहन

हमारे देश में यातायात के सार्वजनिक परिवहन के बारे में जो कुछ भी कहा जाए वह कम ही है क्योंकि देश की इतनी बड़ी आबादी को देखते हुए हमारे ये तंत्र पूरी तरह से नाकाम साबित होता रहा है. आज भी देश के हर हिस्से में हर जगह पर छोटे बड़े यातायात के साधनों में आदमी जानवरों की तरह भरे हुए देखे जा सकते हैं जिस कारण से कई बार बड़ी दुर्घटनाएं भी हो जाया करती हैं ? हमारे सार्वजानिक परिवहन तन्त्र को आज बहुत मज़बूत किये जाने की आवश्यकता है क्योंकि जब तक हमारे पास आने जाने के लिए इस तरह के अच्छे और सुगम साधन नहीं होंगें तब तक लोग अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल करने से नहीं चूकेंगें क्योंकि अपने वाहन से आने जाने में समय की बचत तो होती ही है साथ ही सुगमता भी रहती है. पर इस तरह से सभी के अपने वाहन उपयोग में लाये जाने से सड़कों पर यातायात का दबाव बहुत बढ़ जाता है जिसको कम करने का कोई उपाय नहीं होता है. 
      आज हमारी प्राथमिकता अपने सार्वजनिक परिवहन को कुछ इस तरह से बनाने की होनी चाहिए जिससे कोई भी कहीं भी आसानी से आ जा सके क्योंकि जब तक लोगों के पास बेहतर साधन नहीं होंगें तब तक वे कहीं से भी किसी भी तरह से अपने वाहनों का उपयोग कम नहीं करने वाले हैं. हमारे राज्यों में चलने वाली परिवहन निगम की सेवाएं किस तरह से जर्जर अवस्था में हैं यह किसी से भी नहीं छिपा है और जहाँ कहीं भी किसी भी स्तर पर निजी क्षेत्र अपनी सेवाएं दे रहा है तो उसके बारे में हम सभी जानते हैं. आज हमारे राजमार्ग अच्छे हो रहे हैं पर हमें आने जाने में पहले से अधिक समय लगने लगा है. क्या कारण है कि अच्छी सड़कें होने के बाद भी हमारी यात्रा के समय में तब कटौती नहीं हो पाती है जब हम किसी सार्वजनिक साधन का उपयोग करते हैं ? देश को एक सुगम और सुचारू यातायात व्यवस्थाकी आवश्यकता है क्योंकि इसके बिना हमारी प्रगति बाधित होती है और हमारे लाखों मानव घंटे इन घटिया यात्राओं में ही लग जाया करते हैं.
    तेल की कीमतों पर बहुत हल्ला मचाया जाता है पर इसकी बचत को कैसे बढ़ावा दिया जाये इस पर विचार करने के लिए किसी के पास भी समय नहीं है ? दिल्ली मेट्रो से बहुत सारे सबक सीखे जा सकते हैं जिन विपरीत परिस्थितियों में मेट्रो ने बहत अच्छा प्रदर्शन किया है वह पूरे देश के लिए गर्व की बात है पर यहाँ पर यह समस्या है कि हम इस तरह की व्यवस्था देश के अन्य हिस्सों में कर पाने में पूरी तरह से असफल साबित हुए हैं. दिल्ली में मेट्रो की पहुंचा वाले क्षेत्र में आज लोग अपने निजी वाहनों का प्रयोग कम कर चुके हैं. अब आवश्यकता है कि इसे और बढाया जाए जिससे पूरी दिल्ली में आसानी से आने जाने का कोई बेहतर साधन लोगों के पास बना रहे. देश में हर काम केवल राजनैतिक लाभ हानि के चश्में से देखे जाने से भी बहुत सारी समस्याएं पनपती रहती हैं. आज भी किसी के पास इन बातों का कोई जवाब नहीं होता है कि न चल सकने वाली परियोजनाएं आख़िर देश के चुनिन्दा खास स्थानों पर क्यों लगा दी जाती हैं जहाँ पर उनके चलने की कोई भी सम्भावना नहीं होती है और जहाँ इनकी आवश्यकता होती है वे स्थान तरसते रह जाते हैं ?   
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