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गुरुवार, 27 अक्तूबर 2011

यूपी और मनेरगा

    केंद्रीय ग्राम विकास मंत्री जयराम रमेश ने जिस तरह से यूपी में मनेरगा में हो रहे भ्रष्टाचार के बारे में राज्य सरकार से सीबीआई की जांच करने की मांग की है उससे यही लगता है कि कांग्रेस ने किसी भी तरह से माया सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने का मन बना लिया है. प्रदेश में इस योजना में घोटालों की जो स्थिति है उससे यही लगता है कि यह माँग माया सरकार के लिए बहुत बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है. अभी तक इस योजना से जुड़े २२ मामलों में जांच की सिफारिशें की जा चुकी है पर किसी में भी कोई कार्यवाही नहीं की गयी है जिससे कांग्रेस को माया सरकार पर हमला करने का और अवसर मिल रहा है. यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर मायावती की बोलती बंद हो जाती है क्योंकि राज्य में भ्रष्ट अफसरों ने जिस तरह से लूट मचाई हुई है वह किसी से छिपी भी नहीं है. आज भी नए नए घोटाले सामने आते जा रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि केंद्रीय योजनाओं में राज्य के अधिकारियों ने पूरी लूट मचाई हुई है.
  एक आंकड़े के अनुसार पिछले चार वर्षों में लगभग २० हज़ार करोड़ रूपये इस योजना के तहत राज्य को मिले हैं और इसमें से लगभग ४०% ही सही लाभार्थियों तक पहुँच पाए है जिससे सरकार की तरफ़ और ज्यादा उँगलियाँ उठने लगती हैं और सरकार की मुसीबतें बढ़ने लगती हैं. सरकार पर भ्रष्टाचार के साथ यह भी आरोप लगने लगता है कि वह गरीबों और समाज के निचले और पिछड़े तबके के लिए एक मसीहा होने का दावा करती है पर जब ज़मीन पर कुछ करना होता है तो वह अपने कदम रोक लेती है. मनेरगा से जितने लोगों को लाभ होने वाला था वे बसपा के वोट बैंक से ही आते हैं इसलिए भी बसपा इस योजना को यूपी में लागू करने में शुरू से ही हिचकती रही और जब लागू भी किया गया तो आधे अधूरे मन से जिससे जिस हद तक लोगों को लाभ पहुँच सकता था वह नहीं पहुँच पाया जबकि कुछ राज्यों ने इस योजना के तहत रोज़गार देकर अपने यहाँ इस वर्ग के लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाने में सफलता पायी है. माया सरकार को यह लगता था कि इस योजना का कांग्रेस प्रचार करेगी कि उसने यह योजना बनायीं थी जिससे उसके वोट कट सकते हैं.
   भ्रष्टाचार और सुशासन अब देश में मुद्दे बन चुके हैं कांग्रेस जानबूझकर रणनीति के तहत यूपी में आने वाले चुनावों को देखते हुए माया सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है क्योंकि अभी तक जो भ्रष्टाचार के आरोप उस पर लगते हैं वे यूपी में उसको कुछ हद तक नुकसान पहुंचा सकते हैं जिसकी भरपाई करने के लिए उसे यह बंदूकें माया सरकार पर ताननी ही पड़ेंगीं क्योंकि इसके बिना उसे यहाँ पर वोटों का लाभ नहीं होने वाला है ? इस सारी कवायद और बेकार की बातों में अच्छी योजनायें भी राजनीति की भेंट चढ़ जाया करती हैं इसीलिए इस बात की बहुत ज़रुरत है कि इस तरह की योजनाओं के लिए राष्ट्रीय नीति जल्दी ही बनायीं जाये जिससे किसी भी स्तर पर आम लोगों से जुड़ी किसी भी योजना को लागू करने के लिए कोई राज्य सरकार किसी भी तरह की अडंगेबाज़ी न लगा सके. अब समय है कि देश के लिए योजनायें बनाने को प्राथमिकता दी जाये और इसमें राजनीति को हावी न होने दिया जाये.

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