मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 20 May 2012

सड़क सुरक्षा

         यू पी में एक बार फिर से जिस तरह से सड़क दुर्घटना के बाद धार्मिक यात्रा से लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी बस के खड़े ट्रक से टकरा जाने के बाद लगी आग़ अनेकों लोगों की जाने चली गयी उससे यही पता चलता है कि आज भी हमने सड़क सुरक्षा के बारे में कुछ भी ठीक से करना नहीं सीखा है. यह सही है कि इस बारे में पहले से ही कई तरह के कानून देश में बने हुए हैं फिर भी इनके अनुपालन में हर स्तर पर जिस तरह से लापरवाही की जाती है उससे सड़क पर चलने वाले नागरिक हमेशा ही ख़तरे में रहा करते हैं. अभी तक जिस तरह से पुरानी और जर्जर बसों को भी ले देकर सड़क पर चलने की अनुमति दी जाती रहती है वह भी इस तरह की दुर्घटनाओं को जन्म देती रहती हैं. जिस तरह से सड़क सुरक्षा के मामले में देश में लगातार नियमों की अनदेखी की जाती है वह बहुत ही ख़तरनाक है क्योंकि इसके बिना सुरक्षा की बात करना भी बेईमानी है. यदि हम किसी ऐसे आयोजन में जा रहे हैं तो यह हमारा अधिकार बनता है कि उस बस या वाहन के बारे में पूरी छानबीन भी करें कि वह कैसी स्थिति में है ? साथ ही उसमें सुरक्षा से जुड़ी सभी वस्तुएं मौजूद हैं या नहीं और हमें भी अपनी तरफ से सभी की सुरक्षा के बारे में भी सचेत रहना चाहिए.
        अभी तक सड़क सुरक्षा के लिए जिस तरह से यह अनिवार्य है कि यात्री बसों में किसी भी तरह के ज्वलनशील पदार्थों को लेकर नहीं चलना चाहिए पर इस बस में जिस तरह से गैस के सिलेंडर भी थे उससे यही लगता है कि इनमें टक्कर के बाद आग लगने से ही इतनी बड़ी दुर्घटना हुई है. यह सही है कि इस बस में तीर्थयात्री सफ़र कर रहे थे जो आम तौर पर अपने साथ खाना बनाने की सभी सुविधाएँ लेकर चला करते हैं. इस बात पर किस तरह से रोक लगायी जाये यह सोचने का विषय है पर जब इस तरह से लोग अपने साथ ज्वलनशील पदार्थों को लेकर चल रहे हों तो उनके साथ आग बुझाने की सुविधाएँ भी अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए. यह भी सही है कि इस तरह के आवागमन में लगी हुई बसों में आम तौर पर दुर्घटना नहीं होती रहती हैं पर जब कभी इस तरह की घटनाएँ हो जाती हैं तो सभी के पास केवल पछतावा करने के सिवाय कुछ नहीं बचता है. इससे बचने के लिए सभी को इस बारे में यात्रा शुरू करने से पहले ही तैयारियां कर लेनी चाहिए.
       इस बारे में अब आम नागरिकों को ज़िम्मेदार होना ही होगा क्योंकि जब भी ऐसी कोई घटना हो जाती है तो उसमें आम लोग ही हताहत होते हैं. किसी भी तरह के ऐसे आयोजनों में जाने वाले लोगों के लिए यह अनिवार्य किया जाना चहिये कि उनके साथ आग बुझाने के कुछ आवश्यक उपकरण अवश्य ही हों यदि वे किसी भी तरह के ज्वलनशील पदार्थ को साथ में लेकर चल रहे हों और इस बात को कानून के दबाव के स्थान पर अपनी सुरक्षा से जोड़कर देखना चाहिए क्योंकि हम जिस तरह से कानून को केवल किताब में छपी हुई एक बात ही मानते हैं वह भी आम लोगों के जीवन पर कई बार बहुत भारी पड़ जाया करती है. अभी तक इस मामले में कुछ भी ठोस कदम नहीं उठाये जा सके हैं क्योंकि ऐसा आम तौर पर नहीं होता है और इसे हम भाग्य का खेल मानकर अपनी सुरक्षा से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते हैं ? क्यों हर बात के लिए सरकार ही ज़िम्मेदार हो जबकि यह हमारी आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ बहुत ही महत्वपूर्ण मसला है ?      
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