मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 22 December 2012

आज़म का थप्पड़ अखिलेश सरकार को ?

                             यूपी के बहुचर्चित और विभिन्न कारणों से विवादों में रहने वाले चार में से एक मुख्यमंत्री और प्रभावशाली मंत्री आज़म खान पर पंजाब मेल के कोच सहायक निर्मल मुर्मू ने जिस तरह से दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है वह निश्चित तौर पर चिंता को बढ़ाने वाला है. मुर्मू का आरोप है कि १८ दिसंबर को लखनऊ से रामपुर जाते समय आज़म ने उन्हें अपने डिब्बे में बुलाकर पहले चादरों के गंदे होने के बारे में कहा और उसके बाद उन्हें थप्पड़ भी मारा, प्रताड़ना का यह सिलसिला यहीं पर नहीं रुका उनसे कहा गया कि कान पकड़कर ५० बार उठ्ठक बैठक लगाने पर ही उसे जाने दिया जायेगा. क्या किसी भी प्रभावशाली नेता या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रेलवे में इस तरह की कमियों से निपटने का यही तरीका होना चाहिए जैसा आज़म ने किया ? क्या कोच में अपने घरों से दूर रहकर इस तरह का काम करने वाले लोगों के लिए किसी भी तरह के अधिकार सुरक्षित नहीं है और आज़म जैसे लोग जब चाहें जहाँ चाहें किसी के साथ अमर्यादित आचरण कर सकते हैं ? कहने को यह बहुत छोटा सा मामला खुद आज़म द्वारा बताया जा रहा है और स्वाभाविक तौर पर उन्होंने जिस तरह से मीडिया से ख़बर मिलते ही अपना बयान दिया कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है उससे मामले को हल्का करने की नियति साफ़ हो जाती है.
               आज़म को यह इसलिए भी याद नहीं होगा क्योंकि उन्हें इस बात का ज़रा भी इल्म नहीं होगा कि रेलवे का एक अदना सा कर्मचारी अपने साथ हुए इस दुर्व्यवहार की शिकायत भी कर देगा जबकि उसकी ड्यूटी यूपी से गुज़रने वाली ट्रेनों में ही लगती रहती हो ? क्यों सपा सरकार में इस तरह की हरकतें करने में सभी आगे रहना चाहते हैं जबकि राज्य से होकर गुज़रने वाली किसी भी ट्रेन की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी देश में राज्यों पर ही है. जब इस तरह की अराजकता सरकार के चार मुख्यमंत्रियों में से एक के द्वारा दिखाई जाये तो कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बारे में सोचा ही जा सकता है. क्या निर्मल मुर्मू को इस शिकायत पर कोई ठोस कार्यवाही होने का भरोसा रामपुर पुलिस दे पायेगी क्योंकि भले ही इस मामले की शिकायत मुर्मू ने अमृतसर में की हो पर मामला रामपुर का होने के कारण यह केस अब वहीं पर चलेगा ? क्या रामपुर रेलवे पुलिस की इतनी औक़ात है कि वह आज़म के खिलाफ कार्यवाही कर सके ? इतना दम तो आज यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश में भी नहीं है कि वे आज़म के ख़िलाफ़ कुछ कर सकें मिशन २०१४ के चक्कर में वोटों के लालच में सपा जो कुछ भी करने में लगी है वही उसके मिशन में पलीता लगाने का काम करने वाली है.
              आज़म के मना करने और निर्मल के शिकायत करने के पीछे एक बात तो समझी ही जा सकती है कि कहीं न कहीं कुछ न कुछ तो अवश्य है इसलिए इस मामले की पूरी जांच रेलवे पुलिस को दिल्ली या देहरादून स्थानांतरित करके करके चाहिए क्योंकि यूपी में खुद सीएम अखिलेश आज़म के ख़िलाफ़ कुछ बोल नहीं सकते तो उनके नीचे काम करने वाली पुलिस की क्या औक़ात है कि वह आज़म के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही कर सके या फिर कोई निष्पक्ष जांच भी कर सके ? जब आरोप लगे हैं तो सरकार पर दबाव तो बनेगा ही पर आज़म पर कौन दबाव बनाएगा इस बात का फैसला कौन करेगा ? रामपुर में जिस तरह से उनकी तूती बोलती है तो राज्य पुलिस के प्रतिनियुक्ति पर गए चंद रेलवे पुलिसकर्मी उनके ख़िलाफ़ जांच में क्या ढूंढ पायेंगें यह भी सोचने का विषय है ? जिन पर जनता के सामने सभ्यता से पेश आने का उत्तरदायित्व है यदि उनके ख़िलाफ़ ही इस तरह की शिकायतें आयेंगीं तो सरकारी कर्मचारियों के बारे में कौन सोचेगा ? इस मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और यदि आज़म के कहने के अनुसार निर्मल झूठ बोल रहे हैं तो उनके ख़िलाफ़ भी सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए जिससे पूरा मामला सामने आ सके. वैसे आज़म का यह थप्पड़ निर्मल के नहीं बल्कि प्रदेश के सीएम अखिलेश के गाल पर है क्योंकि कानून व्यवस्था कितनी बेहतर है उसका यह एक नमूना भर है ? क्या आज़म एक बात का जवाब दे सकते हैं कि कोई अगर उनको थप्पड़ मारे और उसका कारण यह बताये कि प्रदेश में नालियों में गंदगी रहती है और वे नगर विकास मंत्री हैं इसलिए उन्हें थप्पड़ मारा गया है तो क्या वे उसके ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं करेंगें ?        
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

2 comments:

  1. बेहतर लेखनी, बधाई !!

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  2. कभी वोटों की राजनीति और कभी गठबंधनों की राजनीति, पिसना निर्मल मुर्मू जैसों को ही है और दादागिरी इन नेताओं ने ही करनी है। रेल मंत्रालय जो कि केन्द्र सरकार का विभाग है, उसे भी इस घटना को अपने स्तर से हैंडल करना चाहिये। सेवा में कुछ कमी थी भी तो उसे इस तरह से सुधारा जायेगा?

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