मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 6 April 2013

लश्कर-कश्मीर-जंग

                एक अमेरिकी रिपोर्ट में यह कहा गया है कि लश्कर-ए-तैयबा में भर्ती होने वाले ज़्यादातर युवाओं की सोच यही होती है कि कश्मीर में जंग चल रही है और वे उसी का हिस्सा बनने के लिए इस तथाकथित धर्म युद्ध में शामिल होते रहते हैं. अमेरिकी सेना ने यह रिपोर्ट सुरक्षा बलों द्वारा विभिन्न आतंकी घटनाओं में मारे गए इन आतंकियों द्वारा लिखी गई अपनी लगभग ९०० आत्मकथाओं में से ५ सर्वाधिक चर्चित कथाओं का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकल कर सामने आया है. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आज लश्कर की जमात में शामिल होने वाले युवा पिछड़े और गरीब क्षेत्रों से नहीं आते हैं बल्कि ये पाकिस्तान के सबसे संपन्न राज्य पंजाब के संपन्न परिवारों से आते हैं जिनके सामने किसी तरह से आजीविका चलाने का कोई संकट आज नहीं है इससे यही पता चलता है कि अभी तक इस्लामी आतंक के लिए जिस तरह से अशिक्षा और गरीबी को ज़िम्मेदार बताया जाता है वह धारणा अब पूरी तरह से या तो बदलनी होगी या फिर उस पर फिर से विचार किये जाने की आवश्यकता है ?
                          धर्म के नाम पर जिस तरह से पाकिस्तानी पंजाब में मुस्लिम युवाओं को गुमराह किया जाता है वह स्थिति भारत के लिए तो आने वाले समय में समस्याएं पैदा करती ही रहेगी पर साथ ही पाकिस्तान के लिए भी इन पढ़े लिखे नयी सोच वाले आतंकियों से पार पाना बहुत ही मुश्किल होने वाला है क्योंकि जब ये पंजाब के उन संपन्न परिवारों से आने वाले बच्चे होंगें जो वहां की सेना और आतंकियों पर बड़ा प्रभाव रखते हैं तो आने वाले समय में पाक के लिए भी इन पर कोई भी कार्यवाही कर पाना लगभग नामुमकिन ही होने वाला है. उस स्थिति में आज का पाकिस्तान कल का इराक हो सकता है जहाँ एक दूसरे की मार काट करने वाले मुसलमानों को यह पता ही नहीं है कि वे आख़िर किस समाज और किस विचार धारा के लिए यह संघर्ष कर रहे हैं ? उन देशों में अन्य धर्मों के अनुयायियों पर यह आरोप लगाया जा सकता है जहाँ के शासन तंत्र में इस्लाम नहीं है पर इस्लामी देशों में इस तरह की मार काट से क्या संदेश जाता है ?
                         इस समस्या से निपटने के लिए जिस तरह से रूस, चीन और भारत ने काम करना शुरू कर दिया है वह निश्चित तौर पर आने वाले समय में इस क्षेत्र में इस्लाम के इस कट्टर पंथी स्वरुप को रोक पाने में सफल हो पायेगा क्योंकि चीन पाक की चाहे कितनी भी मदद करता रहे पर जब बात उसके सैनिकों और आर्थिक प्रतिष्ठानों की आएगी तो वह एक झटके में ही पाक में पोषित किये जा रहे इन आतंकियों के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने से नहीं चूकेगा. चीन जिस तरह से पाक होकर आपना रास्ता ग्वादर पोर्ट तक आसान कर रहा है वह निश्चित तौर पर भारत के लिए चिंता की बात है पर जब इस्लामी आतंकी चीन के व्यापारिक और आर्थिक हितों पर चोट करने लगेंगें तो वह पलटवार किये बिना नहीं रहेगा जिससे चीन के लिए पाक में काम करना और भी मुश्किल हो जायेगा. चीन इस सत्य को समझता है और इसी समस्या से निपटने के लिए उसने पास भारत,रूस के साथ मिलकर एक कार्य योजना बनाने की तैयारियां शुरू भी कर दी हैं जो इस क्षेत्र में इस्लामी चरम पंथियों से इन तीनों देशों को सुरक्षित रख पाने का काम कर सकेगी. दुनिया को अब यह सोचना ही होगा कि आने वाले समय में इन शिक्षित आतंकियों से निपटने के लिए उसके पास क्या नीतियां होनी चाहिए क्योंकि आज यह भारत, चीन और रूस के लिए एक समस्या है तो कल अन्य देशों के लिए भी ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं.     
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